नई दिल्ली. साइकिल से काम पर जाने से 1800 अरब रुपए का फायदा हो सकता है जो 2015-16 की भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 1.6 प्रतिशत है. एक नए अध्ययन में ऐसा दावा किया गया. द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) के अध्ययन “भारत में साइकलिंग के फायदे: आर्थिक, पर्यावरणीय एवं सामाजिक मूल्यांकन’ में अनुमान जताया गया है कि छोटी दूरी के सफर के लिए अगर बाइक या कार की बजाय साइकिल का इस्तेमाल किया जाए तो इससे सालाना 1800 अरब रुपये का का फायदा हो सकता है. शुक्रवार को जारी किए गए इस अध्ययन में यह भी गौर किया गया कि सुरक्षित साइकलिंग के लिए अवसंरचना उपलब्ध कराने और साइकलिंग के विभिन्न फायदों को दर्शाने के लिए जागरूकता अभियान चलाकर ये फायदे हासिल किए जा सकते हैं. साथ ही उस धारणा को खत्म करने से लाभ होगा कि साइकिल “गरीब लोगों के परिवहन का माध्यम है.” Also Read - दिल्‍ली में प्रदूषण पर सख्‍त राज्‍य सरकार, 3 नवंबर से पटाखा विरोधी अभियान होगा शुरू

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अध्ययन में कहा गया, “इसके अलावा, शहरों को कुछ खास स्थानों पर ध्यान देने की बजाए साइकिल साझा योजनाओं को शहर भर में लागू करने की योजना बनानी चाहिए. पसंद से साइकिल चलाने वाले लोगों के बीच इसे बढ़ावा देने के लिए, उपर्युक्त उपायों के साथ ही निजी मोटर वाहनों के इस्तेमाल को भी नियमित करना चाहिए जैसे कि पार्किंग शुल्क एवं प्रदूषण कर लगाना आदि. टेरी की स्टडी रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि पिछले कुछ दशकों में साइकिल के मुकाबले बाइक या कार के ऊपर लोगों की निर्भरता बढ़ी है. इस कारण साइकिल खरीदने वालों की संख्या में कमी आई है. टेरी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2001 से लेकर 2011 के दौरान साइकिल रखने वाले परिवारों की संख्या में महज एक फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. हालांकि इस अवधि में लोगों की आमदनी का ग्राफ बढ़ा है, लेकिन साइकिल के ऊपर निर्भरता कम हुई है.

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ईंधन की खपत और प्रदूषण में वृद्धि का भी जिक्र

टेरी की रिपोर्ट में साइकिल से होने वाले फायदे और इसके बजाय मोटर गाड़ियों पर निर्भरता के कारण आने वाली समस्याओं का भी जिक्र किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के गांवों और शहरों में वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण कई समस्याएं पैदा हो रही हैं. लोगों की पेट्रो पदार्थों पर निर्भरता, जाम की समस्या, प्रदूषण में बढ़ोतरी के अलावा सेहत संबंधी समस्याएं भी वाहनों की संख्या में हो रही लगातार बढ़ोतरी का ही परिणाम है. इसके अलावा वाहनों के इस्तेमाल से घर-परिवारों के ऊपर आर्थिक बोझ भी बढ़ता है. वहीं, साइकिल ऐसी किसी समस्या का कारण नहीं बनती है. टेरी की रिपोर्ट में इस बात की सलाह दी गई है कि साइकिल चलाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के कई सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे. रिपोर्ट में कहा गया है कि साइकिल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ से भी प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए. सरकार कम आय वर्ग वालों को टैक्स में छूट दे सकती है. साइकिल चलाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कराया जाना चाहिए, ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा संख्या में इस दिशा में आगे बढ़ें.

TERI की पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें

साइकिल के दाम कम होंगे तो मिलेगा प्रोत्साहन

द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट के चार सदस्यों की टीम के द्वारा किए गए इस अध्ययन में साइकिल निर्माण को बढ़ावा देने की भी सलाह दी गई है. चूंकि आज की तारीख में एक साइकिल खरीदना, निम्न आय वर्ग के परिवारवालों के लिए बहुत आसान नहीं है, इसलिए रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि साइकिल निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए इसके निर्माताओं को ज्यादा से ज्यादा छूट दी जानी चाहिए. 5 हजार रुपए से कम की साइकिल बनाने वालों को अभी GST की मौजूदा दरों के तहत 12 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है. टेरी की रिपोर्ट में इस रेट को 5 फीसदी किए जाने की सलाह दी गई है. वहीं, साइकिल विकास आयोग बनाने की भी सलाह दी गई है, जो देश के गांवों और शहरों में साइकिल चलाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे सके. BENEFITS OF CYCLING INDIA नामक 48 पन्नों की इस रिपोर्ट में विदेशों में साइकिल चलाने को लेकर अपनाए गए तरीकों का भी जिक्र किया गया है.

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रिपोर्ट से गिनाए साइकिल चलाने के फायदे

1- पेट्रोल-डीजल पर कम होगी निर्भरता

2- प्रदूषण के स्तर में आएगी कमी

3- सेहत संबंधी लाभ

4- कम दूरी के लिए सुविधाजनक सवारी

5- शहरों में जाम की समस्या कम होगी

6- निम्न आयवर्ग के लोगों के लिए सस्ता ट्रांसपोर्ट साधन

7- सबसे टिकाऊ ट्रांसपोर्ट साधन

8- वाहनों के काले धुएं से निजात

(इनपुट – एजेंसी/टेरी)