Rishi Kapoor Death: देश अभी इरफ़ान खान की मौत से उभरा भी नहीं था कि अब ऋषि कपूर भी हमें कुछ घड़ी पहले अलविदा कह गए. क़ुरान की एक आयत में कहा गया है कि ‘कुल्लु नफ़सिन ज़ायकातुल मौत’. इसका मतलब है ‘हर इंसान को एक दिन मौत का मज़ा चखना है’. किसे पता था इतनी जल्दी हमारे बीच दो ‘चेहरे’ केवल ‘यादें’ बन कर रह जाएंगे. Also Read - ऋषि कपूर-इरफान खान पर शर्मनाक कमेंट करना कमाल राशिद खान को पड़ा भारी, FIR दर्ज

ऋषि कपूर, एक ऐसे कलाकार जिन्होंने अपने ख़ानदान की विरासत को बख़ूबी आगे बढ़ाया और एक्टिंग की दुनिया में एक ऐसा सितारा बन के उभरे जिसकी चमक से बॉलीवुड हमेशा हमेशा के लिए रौशन हो गया. लगभग 3 साल की उम्र में पहली बार पापा राज कपूर की फ़िल्म “मेरा नाम जोकर” में ऋषि ने एक चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पे कैमरा फेस किया. हालांकि उस वक़्त उन्हें एक्टिंग और फिल्मों की दुनिया में यकीन नहीं था. वो तो महज़ नरगिस द्वारा दी गई चॉक्लेट की रिश्वत के लोभ में कुछ पल पर्दे पर खुद को दिखाने के लिए राज़ी हो गए. Also Read - अनिल कपूर ने किया ऋषि कपूर को इस फिल्म के ज़रिए याद, कहा- जेम्स को मिस कर रहा हूं   

आज के सदी में ऋषि कपूर एक कामयाब एक्टर की फेहरिस्त का सबसे जगमगाता नाम है. जिस उम्र में बाक़ी एक्टर्स थक कर बिस्तर पर करवटें लेना पसंद करते हैं उस वक़्त उन्होंने सपोर्टिंग रोल्स में ख़ुद को मुक्कमल तौर पे पेश किया. एक ऐसा अभिनेता जिसनें अपनी ज़िंदगी में उसूल और आदर्श का चश्मा पहना था. ऋषि की इंसानियत उनके व्यक्तित्व का चेहरा था. देखिए न, कैसे इस शख्स ने मरने से पहले ही अपने अंग दान की घोषणा कर दी थी और अपने चाहने वालों से भी आगे कर इस मुहिम से जुड़ने की अपील की थी. Also Read - ऋषि कपूर की तेरहवीं पर उमड़ा बॉलीवुड, आलिया को लेकर पहुंचे रणबीर, देखिए INSIDE PICS 

ऋषि अपने ट्वीट्स के चलते कई बार विवादों में भी आए लेकिन फिर भी उन्होंने अपनी बातों को सबके सामने रखना बंद नही किया. वो आज ना होकर भी अपनी फ़िल्मों के माध्यम से हम सबके बीच हैं और अनंत काल तक रहेंगे. आने वाली सभी पीढ़ियों में  ‘दर्द ए दिल’ और ‘बचना ए हसीनो’ एक एंथम बन कर उनकी प्लेलिस्ट में सबसे ऊपर रहेगा. कभी न ख़त्म होने वाला एक किस्सा है ऋषि कपूर.

ज़िंदगी इक हादसा है और कैसा हादसा
मौत से भी ख़त्म जिसका सिलसिला होता नहीं
-जिगर मुरादाबादी