नई दिल्ली. गर्मी के दिनों में बर्फ से ढंके रहने वाले रोहतांग दर्रे की सैर करना यूं तो पर्यटकों का सबसे पसंदीदा शगल है. लेकिन इससे होकर गुजरने वालों के लिए यह रास्ता साल के ज्यादातर महीनों में बंद ही रहता है. लेकिन एक से डेढ़ साल में रोहतांग दर्रे से गुजरना आसान हो जाएगा. क्योंकि पिछले करीब 9 वर्षों से रोहतांग दर्रे से होकर गुजरने वाली सुरंग का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में है. दुनिया की सबसे कठिन परिवहन परियोजनाओं में से एक रोहतांग सुरंग का निर्माण कार्य 2020 तक पूरा हो सकता है. समुद्र तल से 3000 मीटर ऊपर चल रही परियोजना के पूरे होने के बाद चारों तरफ से जमीन से घिरी लाहौल घाटी तक यहां से हर मौसम में जाया जा सकेगा.

8 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सुरंग
अपने तरह की सबसे महंगी और महत्वाकांक्षी परियोजना में से एक रोहतांग सुरंग में निर्माण संबंधी सारे काम पूरे कर लिए गए हैं. इस सुरंग पर अब सिविल इंजीनियरिंग का काम चल रहा है. एक बार काम पूरा होने के बाद इस रास्ते से किसी भी मौसम में सफर करना आसान हो जाएगा. अभी सर्दी के दिनों में यह रास्ता आम लोगों के लिए बंद कर दिया जाता है. घोड़े के खुर के आकार की 8.8 किलोमीटर लंबी रोहतांग सुरंग पिछले साल अक्टूबर में बन चुकी है. सुरंग का 3978 मीटर हिस्सा हिमालय के रोहतांग दर्रे से होकर गुजरता है. हालांकि, 2012 में सुरंग के लिए खुदाई करने के दौरान निकली छोटी नदी का जोरदार प्रवाह परेशानी पैदा कर रहा है.

फोटो साभारः टि्वटर

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दिसंबर 2019 तक पूरा हो जाएगा काम
सुरंग परियोजना में कार्यरत एक इंजीनियर ने बताया, ‘वर्तमान में काम की रफ्तार देखते हुए इसके सिविल इंजीनियरिंग के काम के दिसंबर 2019 तक पूरे होने की उम्मीद है.’ उन्होंने कहा कि इसके साथ ही विद्युत और वायु संचार का काम भी चल रहा है. उन्होंने कहा, ‘सभी संभावनाओं को देखते हुए, सुरंग 2020 में मई-जून तक बनकर तैयार हो जाएगी.’ यह सुरंग रक्षा मंत्रालय के सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा ‘स्ट्राबैग एजी’ के संयुक्त उपक्रम ‘एफ्कॉन्स’ के साथ मिलकर तैयार की जा रही है. सुरंग की आधारशिला संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 28 जून 2010 में यहां से निकट सोलांग घाटी में रखी थी. परियोजना की लागत राशि 1,495 करोड़ रुपए है.

सिर्फ 6 महीने ही होता है सुरंग का काम
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सुरंग के निर्माण की पिछली समय सीमा फरवरी 2015, यहां की कठोर भौगोलिक परिस्थितियों के कारण निकल चुकी है. यहां अतिकठोर मौसम होने के अलावा सुरंग के दक्षिणी द्वार पर काम सिर्फ छह महीने होता है. इंजीनियर ने स्वीकार किया कि सुरंग निर्माण की दूसरी समयसीमा 2019 भी सुरंग का निर्माण हुए बिना निकल जाएगी. 20 भूस्खलन और हिमस्खलन से निपटने के बाद सुरंग के दोनों द्वार बनाए जा सके हैं. यह सुरंग समुद्र तल से 3000 मीटर की ऊंचाई पर बर्फ से ढंके रोहतांग दर्रे में स्थित है. रोहतांग का 70 फीसदी भाग गर्मियों में भी बर्फ से ढंका रहता है. पांच साल की देरी होने के कारण परियोजना में 2,000-2,500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा.

फोटो साभारः टि्वटर

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सुरंग में 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी गाड़ियां
इंजीनियरों के लिए हिमनद से भरी सेरी नदी को वश में करना भी एक चुनौती है. एक अन्य इंजीनियर ने कहा, ‘इससे पहले हम 562 मीटर के क्षेत्र में सेरी नदी का सामना कर रहे थे. अब हम इसका प्रभाव मात्र 30 मीटर के दायरे में रखने में कामयाब हो सके हैं. बहुत जल्द हम इसे और सुरंग के अंदर रिसाव पर पूरी तरह काबू पा लेंगे.’ पीर पंजाल क्षेत्र में स्थित रोहतांग दर्रा राजमार्ग सुरंग में दोतरफा यातायात के लिए पर्याप्त जगह है. इसे इस तरह से बनाया गया है कि इसके अंदर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन चलाया जा सकेगा.

(इनपुट – एजेंसी)