नई दिल्ली: क्रिकेट के इतिहास में कुछ तारीख ऐसी हैं जिन्हें याद कर मन भारी सा हो जाता है. यूं तो दुनिया भर में हर रोज कई रिकार्ड्स बनते हैं और टूटते हैं और इन रिकार्ड्स के साथ वो दिन भी दर्ज हो जाता है जिसे इतिहास के सुनहरे पन्नों पर जगह मिल जाती है मगर कुछ ऐसी भी तारीखें हैं जिनके पीछे ना कोई रिकॉर्ड है ना ही कोई उपलब्धि मगर फिर भी इसे दुनिया हमेशा याद रखती है. साल 2013 में 16 नवंबर को भारतीय क्रिकेट के एक ऐसे स्तंभ ने क्रिकेट को अलविदा कहा था जिसे पूरी दुनिया ने ‘ क्रिकेट का भगवान’ माना था.

जी हां, आज के ही दिन सचिन तेंदुलकर नेअपने घरेलू मैदान वानखेड़े स्टेडियम से अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा था. यह दिन क्रिकेट प्रेमियों के लिए वो एहसास है जिसके दम पर वो आज तक ‘क्रिकेट’ को अपने अंदर जिंदा रखने में कामयाब हुए हैं. 15 नवंबर, 1989 को पाकिस्तान में अपने करियर की शुरूआत करने वाले सचिन ने इसी तारीख के एक दिन बाद अपने 24 साल के क्रिकेट को अलविदा कह दिया था.

सचिन तेंदुलकर

टीम इंडिया के इस दिग्गज क्रिकेटर ने अपने क्रिकेटिंग करियर में ना जाने कितने झंडे गाड़े हैं. करियर के शुरुआत से ही भारतीय टीम का कंधा बनने वाले सचिन ने अपने आखिरीअंतर्राष्ट्रीय मैच में भी खुद को उस बुलंदी पर रखा था जो आज के खिलाड़ियों के लिए महज एक सपना ही हो सकता है. 200वां टेस्ट मैच को अपने करियर का पूर्ण-विराम बनाने वाले इस दिग्गज ने वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने सफर को समाप्त किया था. सचिन ने इस मैच के अंतिम पारी में 74 रन बनाकर टीम के प्रति अपना महत्वपूर्ण योगदान दे दिया था.

पवेलियन लौटने के दौरान पूरा स्टेडियम जब ‘सचिन सचिन की गूंज से सराबोर हो गया तब वो दृश्य इस खिलाड़ी की होने वाली अनुपस्थिति की गाथाएं गा रहा था. इस लम्हें में पूरा भारतवर्ष अपनी भीगी आंखों से इस खिलाड़ी को आखिरी सलाम पेश कर रहा था.

सचिन तेंदुलकर

यूं तो सचिन ने 200 टेस्ट मैचों की 329 पारियों में 5.78 के औसत से 15291 रन बनाएं और 463 वनडे मैचों में 44.38 के औसत से 18426 रन बनाकर महानतम खिलाड़ियों की सूची में शीर्ष स्थान पर काबिज हो गए. सचिन ने टेस्ट से पहले वनडे फॉर्मेट से संन्यास ले लिया था.

महान खिलाड़ी वही होता है जिसका नाम सदियां गुनगुनाती हैं. और सचिन भी एक ऐसा नाम है जिसे हर पीढ़ी दुनिया के सामने गर्व से लेती रहेगी. संन्यास के बाद भी इस दिग्गज ने अपने आप को मैदान और क्रिकेट से दूर नहीं रखा. कभी मेंटर के रूप में तो कभी कमेंटेटर के अवतार में सचिन ने हम सब के अंदर ‘क्रिकेट’ को जिंदा रखा है.