नई दिल्ली: इतिहास में 2 मार्च 1949 का दिन सरोजिनी नायडू की पुण्यतिथि के रूप में दर्ज है. राजनीतिक कार्यकर्ता, महिला अधिकारों की समर्थक, स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष सरोजिनी नायडू को उनकी प्रभावी वाणी और ओजपूर्ण लेखनी के कारण ‘नाइटिंगेल ऑफ इंडिया’ कहा जाता था. 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में जन्मीं सरोजिनी के पिता अघोरेनाथ चट्टोपाध्याय हैदराबाद के निजाम कॉलेज में प्रिंसिपल थे. सरोजिनी ने यूनिवर्सिटी आफ मद्रास के अलावा लंदन के किंग्स कॉलेज और उसके बाद कैंब्रिज के गिरटन कॉलेज से शिक्षा ग्रहण की. Also Read - UP: CM योगी का निर्देश, शवों को बहाने पर रोक लगाने के लिए पुलिस नदियों में करे गश्त

उन्होंने देश की आजादी के संघर्ष में शिरकत की और आजादी के बाद उन्हें यूनाइटेड प्राविंसेज (वर्तमान में उत्तर प्रदेश) का राज्यपाल बनाया गया. उन्हें देश की पहली महिला राज्यपाल होने का भी गौरव हासिल है. उनकी लेखनी ने भी देश के बुद्धिजीवियों को प्रभावित किया. देश-दुनिया के इतिहास में दो मार्च की तारीख पर दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा इस प्रकार है:- Also Read - Nargis-Sunil Dutt Love Story: सुनील दत्त की लाई साड़ियां नहीं पहनती थीं नरगिस, डॉक्टर ने दी थी मारने की सलाह

1498: पुर्तगाल का यात्री वास्को डी गामा और उसका बेड़ा भारत की तरफ अपनी पहली यात्रा के दौरान मोजाम्बीक द्वीप पहुंचा. Also Read - स्टडी में खुलासा, कोविड-19 से ठीक हो चुके लोगों में मौत, गंभीर बीमारी का खतरा ज्यादा

1807: अमेरिकी कांग्रेस ने एक कानून पास किया, जिससे देश में गुलामों के आयात पर रोक लगा दी गई. इसे दास प्रथा की समाप्ति की दिशा में अहम कदम माना जाता है.

1931: सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव का जन्म, जिन्हें सुधारों की शुरूआत के लिए जाना जाता है.

1969: ब्रिटेन के सुपरसॉनिक विमान कॉनकॉर्ड ने पहली सफल उड़ान भरी. बताया गया कि विमान को 2080 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक उड़ाया जा सकता है.

1970: रोडेशिया के प्रधानमंत्री इयान स्मिथ ने ब्रिटिश साम्राज्य के साथ अपना अंतिम संपर्क समाप्त करते हुए देश को गणराज्य घोषित किया.

1991: श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में एक कार बम विस्फोट में देश के रक्षा उपमंत्री रंजन विजयरत्ने सहित कुल 19 लोगों की मौत.

2008: पाकिस्तान के डेरा आदमखेल में स्थानीय आतंकवादियों के खिलाफ बल के गठन पर विचार के लिए बुलाई गई कबीलों के बुजुर्गों की बैठक में बम फटने से 42 लोगों की मौत और 58 घायल.