नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो (ISRO) ने चंद्रमा पर भेजे जाने वाले दूसरे मिशन की तैयारी शुरू कर दी है. इसरो का चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) अगले महीने लॉन्च किया जा सकता है. इससे पहले बुधवार को चंद्रयान-2 की तस्वीरें जारी की गईं. मीडिया को दी गई जानकारी में बताया गया कि अगले महीने 9 से 16 जुलाई के बीच चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण की तैयारियां की जा रही हैं. इससे पहले इसी साल चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण की योजना किन्हीं कारणों से टाल दी गई थी. मिशन के लंबा खींचे जाने के कारणों का भी उस वक्त खुलासा नहीं किया गया था. लेकिन अब जबकि चंद्रयान-2 की तस्वीरें जारी कर दी गई हैं, साथ ही लॉन्च करने की संभावित तारीख भी बता दी गई है तो इसरो के इस महत्वाकांक्षी मिशन के पूरा होने की उम्मीद दिख रही है. इसरो के मुताबिक लॉन्च होने के करीब दो महीने बाद यह चंद्रमा की सतह पर उतरेगा.

इसरो के मुताबिक, चंद्रमा के लिए भारत का दूसरा मिशन पूरी तरह से स्वदेशी मिशन है. चंद्रयान-2 के मुख्य रूप से तीन भाग हैं- ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर. इसमें लैंडर का नाम विक्रम है, जबकि रोवर को प्रज्ञान का नाम दिया गया है. रोवर में छह पहिये लगे होंगे, जिसके सहारे यह चंद्रमा पर किसी भी दिशा में चल सकेगा. GSLV MK-III स्पेसक्राफ्ट के जरिए इसे चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचाया जाएगा. चंद्रयान-2 के तहत रोवर लैंडर के भीतर पैबस्त होगा, जो चंद्रमा पर पहुंचने के बाद उससे अलग हो जाएगा. चंद्रमा की सतह के पास पहुंचने के बाद लैंडर इस रोवर को काफी सावधानी के साथ उतार देगा. चंद्र की सतह छूने के साथ ही रोवर अपना काम शुरू कर देगा.

इसरो के मुताबिक, रोवर का नियंत्रण धरती पर स्थित इसरो के कंट्रोल रूम में बैठे वैज्ञानिकों के हाथ में होगा, जहां से इसे समय-समय पर निर्देश दिए जाएंगे. इसी रोवर पर वह मशीनें भी होंगी जो चंद्रमा की सतह की तस्वीरें लेंगी और वहां के बारे में और ज्यादा जानकारी इसरो को भेजेगी. इस रोवर की मदद से पता चलेगा कि चंद्रमा की मिट्टी कैसी है, जो आने वाले दिनों में विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए लाभकारी होगा. इसरो के मुताबिक चंद्रयान-2 का वजन लगभग 3290 किलोग्राम होगा. यह चंद्रमा की कक्षा का परिक्रमा करेगा और चंद्र के सुदूर संवेदन के उद्देश्यों को पूरा करेगा. धरती से चंद्रमा तक की लगभग 3.84 लाख किलोमीटर की दूरी तय करने में चंद्रयान-2 को करीब दो महीने लगेंगे. इसरो के मुताबिक 9 से 16 जुलाई के बीच लॉन्च होने के बाद इसके 6 सितंबर के आसपास चंद्रमा की सतह पर उतरने का अनुमान है.

आपको बता दें कि भारत ने चंद्रयान-1 को करीब 11 साल पहले यानी 22 अक्टूबर 2008 को लांच किया था. इसके एक दशक बाद 800 करोड़ रुपए की लागत से चंद्रयान-2 को लांच किए जाने की तैयारी चल रही है. चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग से इसरो अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में इतिहास बनाने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाएगा. चंद्रयान-2 से न सिर्फ भारत को वैज्ञानिक लाभ मिलेगा, बल्कि दुनिया के जो देश चंद्रमा-मिशन पर काम कर रहे हैं, उनके लिए भी ढेर सारी जानकारियां जुटाने में मददगार साबित होगा.