नई दिल्ली. वर्ष 2017 में पीएम नरेंद्र मोदी ने असम में डोला-सादिया पुल का उद्घाटन किया था. उसी दौरान मीडिया में खबरें आई थीं कि असम का सादिया वही स्थान है, जहां भारत के विलक्षण कलाकार भूपेन हजारिका का जन्म हुआ. और इन्हीं भूपेन हजारिका को याद करते हुए डोला-सादिया पुल का नाम बाद में भूपेन हजारिका सेतु कर दिया गया. असमिया, हिन्दी, बांग्ला भाषा में गीत और संगीत की रचना करने वाले इस मूर्धन्य कलाकार को आज की पीढ़ी उनके गाए चंद फिल्मी गानों की वजह से जानती होगी. लेकिन भूपेन दा, नई पीढ़ी की इस सोच से कहीं ज्यादा बड़े और महान थे.

भारत की संस्कृति, संगीत और प्रकृति का प्रेमी यह शख्स अपने पूरे जीवनकाल में सिर्फ और सिर्फ संगीत के लिए ही जिया. भूपेन हजारिका की लरजती आवाज में गाए गए फिल्मी और गैर-फिल्मी जितने भी गाने आप सुनेंगे, हर गीत में इस महान कलाकार की अनोखी प्रतिभा आपको दिखेगी. जैसे- भूपेन हजारिका का गाया ‘गंगा बहती हो क्यूं’ गाना सुनिए, आप खुद को गंगा के करीब पाएंगे. आज जब भारत के पूर्वोत्तर इलाके के इस संगीत के पुरोधा को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की घोषणा की गई है, ऐसे मौके पर ‘गंगा बहती हो क्यूं’ गाने का यह Video देखिए और महसूस करिए भूपेन हजारिका को.

असम के तिनसुकिया जिले में स्थित सादिया में 8 सितंबर 1926 को भूपेन हजारिका का जन्म हुआ था. उनके माता-पिता की 10 संतानें थीं, जिनमें भूपेन सबसे बड़े थे. घर में मां को देखते-देखते बालक भूपेन ने गाना शुरू कर दिया था. महज 10 साल की उम्र में ही वे असमिया भाषा के गाने गुनगुनाने लगे थे. इसी उम्र में एक दिन फिल्म निर्माता ज्योतिप्रसाद अग्रवाल ने बालक भूपेन की आवाज को सुना और वे उन्हें भा गए. वर्ष 1936 में भूपेन हजारिका का पहला गाना कोलकाता में रिकॉर्ड किया गया. अग्रवाल की फिल्म में भूपेन हजारिका ने दो गाने गए थे. उनके संगीत का सफर तो शुरू हो गया था, लेकिन गीतकार बनना बाकी था. 13 साल की उम्र में हजारिका ने यह काम भी कर लिया. गीत-संगीत के साथ-साथ उनकी पढ़ाई भी चलती रही. 1942 में उन्होंने गुवाहाटी के मशहूर कॉटन कॉलेज से इंटर की परीक्षा पास की और फिर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय आए. यहां से एमए करने के बाद उन्होंने संगीत में ही रम जाने का निर्णय कर लिया.

वे गुवाहाटी लौटकर आए और ऑल इंडिया रेडियो में गाने लगे. इसके अलावा स्टेज परफॉर्मेंस भी देते थे. इसी दौरान एक संगीत कार्यक्रम के सिलसिले में भूपेन हजारिका कोलंबिया गए, जहां उनकी मुलाकात प्रियंवदा पटेल से हुई. दोनों ने अमेरिका में ही शादी की. संगीत को ही जीवन दे देने के कारण भूपेन हजारिका का पारिवारिक जीवन प्रभावित हुआ. लिहाजा, पत्नी अलग हो गईं. इसके बाद कुछ दिनों तक उन्होंने गुवाहाटी यूनिवर्सिटी में शिक्षण का कार्य भी किया. लेकिन इस काम में उनका मन नहीं लगा और अपने पद से इस्तीफा देकर वे पूरी तरह से संगीत की दुनिया में आ गए.

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संगीत को अपना साथी बनाने वाले भूपेन हजारिका ने सिर्फ अपनी मातृभाषा असमिया में ही नहीं, बल्कि बांग्ला और हिन्दी के अलावा कई अन्य भाषाओं में भी गाना गाया है. हिंदी सिनेमा में ‘रुदाली’, ‘दरमियां’, ‘दमन’, ‘गजगामिनी’ जैसी कई फिल्में हैं, जिनमें भूपेन हजारिका ने गीत लिखने, संगीत देने और अपनी गायन प्रतिभा का लोहा मनवाया है. खुद गीत लिखने, उसे संगीतबद्ध करने और गाने की वजह से भूपेन हजारिका को दक्षिण एशिया का श्रेष्ठतम सांस्कृतिक दूत कहा जाने लगा था. असमिया भाषा में गाए उनके कई गानों का दुनिया की कई अन्य भाषाओं में अनुवाद किया गया है. संगीत के क्षेत्र में उनकी इसी विलक्षण प्रतिभा को देखते हुए भूपेन हजारिका को क्षेत्रीय फिल्म पुरस्कार, हिंदी सिनेमा का सबसे बड़ा सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी सम्मान, असोम रत्न के अलावा 2011 में पद्म भूषण सम्मान दिया गया.

8 सितंबर को भूपेन हजारिका का जन्मदिन होता है. पिछले साल इस मौके पर उनके बेटे तेज भूपेन हजारिका ने इस अवसर पर जानकारी दी कि भूपेन हजारिका के गाए गानों का अंग्रेजी अनुवाद भी आ गया है. फेसबुक पर लिखे अपने लंबे पोस्ट में तेज हजारिका ने बताया था कि Winged Horse नाम से आई इस किताब में भूपेन हजारिका के गाए 76 असमिया गानों का अनुवाद प्रकाशित किया गया है. तेज ने अपने पोस्ट में लिखा था कि उनके पिता को जन्मदिन पर इससे अच्छी भेंट और कुछ नहीं हो सकती. तेज हजारिका ने लिखा कि उन्हें उम्मीद है कि नई किताब के जरिए लोग भूपेन हजारिका को महसूस कर सकेंगे. साथ ही उनके गीतों को अनुभव कर सकेंगे.

और अंत में एक रोचक जानकारी…

लेख में ऊपर जिस गैर-फिल्मी गीत ‘गंगा बहती हो क्यूं’ का जिक्र किया गया है, उसे कोलंबिया की मशहूर पॉप सिंगर शकीरा (Shakira) ने भी अपनी आवाज में गाया है. इंटरनेट पर मेहनत करें तो वह गीत भी आप सुन सकते हैं.