नई दिल्ली: दिल्ली जल बोर्ड सीवर की सफाई करते हुए 37 साल के अनिल ने 14 सितंबर को अपनी जान गंवा दी. अनिल अपनी पत्नी रानी और तीन बच्चों के साथ दबरी एक्सटेंशन में एक किराए के कमरे में रहते थे. निमोनिया के कारण अनिल के चार महीने के बच्चे ने 6 दिन पहले ही अपनी जान गंवाई थी. एक हफ्ते के भीतर ही परिवार पर मुसिबतों का पहाड़ टूट पड़ा और अनिल की सीवर की सफाई के दौरान मौत हो गई. पिता के शव के पास बच्ची की बिलखती तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सैकड़ो लोग मदद को आगे आए और देखते ही देखते लाखों रुपए जमा हो गए.

सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर के साथ लिखा था, परिवार के पास सीवर की सफाई के दौरान मरने वाले अनिल के अंतिम संस्कार तक के लिए पैसे नहीं हैं. साथ ही लोगों से परिवार की मदद की अपील की गई थी. पोस्ट देखने के बाद कई लोग मदद के लिए आगे आए और अनिल की पत्नी के बैंक खाते में पैसा जमा कराया. रिपोर्ट के अनुसार, अब तक लगभग 24 लाख रुपये जमा किए जा चुके हैं.

अनिल की पत्नी रानी ने मदद करने वाले लोगों को धन्यवाद दिया है. उनका कहना है कि इन पैसे से वह अपने बच्चों को शिक्षित करना चाहती हैं और यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि वे एक अच्छा जीवन जी सकें. रानी ने कहा, मैं उन लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहती हूं जिन्होंने दिल खोलकर हमारी मदद की. मैं चाहती हूं कि मैं अपने तीनों बच्चों को शिक्षित करूं और यह सुनिश्चित कर सकूं कि वे एक अच्छी जिंदगी जी सकें. अगर इसमें आप मेरी मदद कर सकते हैं तो मैं बहुत आभारी हूं.

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) के आंकड़ों के अनुसार पिछले 25 साल में सेप्टिक टैंकों और सीवरों की पारंपरिक तरीके से सफाई के दौरान 634 सफाई कर्मचारियों की जान गई है. इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा कि यह आंकड़ा बदल सकता है क्योंकि आयोग राज्यों से ब्योरा एकत्र करने और जानकारी अद्यतन करने की प्रक्रिया में है. सरकारी इकाई ने पहली बार इस तरह की मौतों का ब्योरा एकत्र किया है. पिछले हफ्ते दिल्ली में दो अलग-अलग घटनाओं में छह सफाईकर्मियों की मौत के बाद बयोरा एकत्र करने की प्रक्रिया ने जोर पकड़ा.

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 1993 से लेकर अब तक देशभर में सेप्टिक टैंकों और सीवर की पारंपरिक तरीके से सफाई के दौरान 634 सफाई कर्मचारियों की मौत हुई है. 194 लोगों की मौत के आंकड़े के साथ तमिलनाडु में इस तरह की सर्वाधिक मौतें हुईं. इसके बाद गुजरात में 122, कर्नाटक में 68 और उत्तर प्रदेश में 51 सफाईकर्मियों की जान गई. दिल्ली में 1993 से लेकर अब तक सीवर और सेप्टिक टैंकों की पारंपरिक तरीके से साफ-सफाई के दौरान 33 लोगों की मौत हुई है. अधिकारी ने कहा, ‘पारंपरिक तरीके से साफ-सफाई का कोई विशिष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. इस तरह के काम के लिए लोगों की सेवा लेने वाले ठेकेदार कानून का पालन नहीं करते. देश में सीवर और सेप्टिक टैंकों की पारंपरिक तरीके से साफ-सफाई पर 1993 में रोक लगा दी गई थी.