नई दिल्ली. एक तरफ जहां दक्षिण भारत के केरल में सबरीमला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर विवाद हो रहा है. वहीं, दूसरी ओर केरल के पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में एक ऐसा मंदिर है, जहां बगैर किसी भेदभाव के हर श्रद्धालु को प्रसाद के रूप में बिरयानी खिलाई जाती है. जी हां, तमिलनाडु के मदुरै से सिर्फ 45 किलोमीटर दूर वडक्कमपट्टी नामक स्थान पर मुनियंडी स्वामी का मंदिर है, जहां परंपरागत रूप से मनाए जाने वाले सालाना उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं को यह प्रसाद दिया जाता है. तिरुमंगलम तालुका के छोटे से गांव वडक्कमपट्टी में स्थित इस मंदिर की यह परंपरा नई नहीं है, बल्कि 80 वर्षों से ज्यादा समय से यहां के लोग पूरे श्रद्धा-भाव के साथ परंपरा का पालन कर रहे हैं. इस बार भी जनवरी के अंतिम सप्ताह में तीन दिनों के उत्सव के दौरान मुनियंडी स्वामी के भक्तों को यह प्रसाद खिलाया जाएगा. वडक्कमपट्टी में सालाना मंदिर उत्सव इस बार 24, 25 और 26 जनवरी को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा. Also Read - PM Kisan Samman Nidhi Scheme: सावधान! 33 लाख किसान मिले हैं फर्जी, तुरंत वापस कर दें पैसे, वरना...

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2 हजार किलो चावल से बनती है बिरयानी

मुनियंडी स्वामी के मंदिर के सालाना जलसे में सिर्फ भक्त ही शामिल नहीं होते, बल्कि इस उत्सव के दौरान वडक्कमपट्टी आने वाले किसी भी व्यक्ति को पूरी श्रद्धा के साथ भगवान का यह प्रसाद खिलाया जाता है. अंग्रेजी अखबार द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 83 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा को बरकरार रखने में वडक्कमपट्टी गांव के निवासियों का बड़ा योगदान है. सालाना मंदिर उत्सव के दौरान यहां पर बड़ी मात्रा में बिरयानी बनाई जाती है. इस उत्सव के आयोजक-मंडल में शामिल एन. मुनिस्वरन ने अखबार को बताया, ’50 से ज्यादा बड़े-बड़े बर्तनों में बिरयानी तैयार की जाती है. मुनियंडी स्वामी के भक्त ही यह प्रसाद तैयार करते हैं. पूरी रात जागकर तैयार की जाने वाली बिरयानी सुबह 4 बजे तैयार की जाती है, जिसे प्रसाद के रूप में सुबह करीब 5 बजे भक्तों के बीच बांटा जाता है.’ उन्होंने बताया कि मंदिर उत्सव के दौरान हजारों की तादाद में भक्त और अन्य लोग बडक्कमपट्टी आते हैं. इतने लोगों के लिए प्रसाद बनाने में 2 हजार किलो चावल, बकरे का मांस लगता है, जिससे बिरयानी तैयार होती है.

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बडक्कमपट्टी के एक स्थानीय निवासी संतकुमार ने अखबार को बताया कि पिछले साल 200 बकरों और 250 मुर्गों की बलि दी गई थी, तब जाकर 1800 किलो बिरयानी तैयार की गई थी. इस साल यह मात्रा और बढ़ने वाली है. मंदिर उत्सव आयोजन से जुड़े एन. मुनिस्वरन ने कहा, ‘सुबह-सवेरे नाश्ते के रूप में बिरयानी प्रसाद खाना, अलग तरह का अनुभव है. मुनियंडी स्वामी के मंदिर का यह प्रसाद बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों के बीच बांटा जाता है. मंदिर में आने वाले हर आयुवर्ग और विभिन्न समुदायों के श्रद्धालु उत्सव के दौरान बिरयानी प्रसाद के लिए लंबी प्रतीक्षा करते हैं और प्रसाद पाकर आनंद का अनुभव करते हैं. कई लोग तो अपने साथ घर से बर्तन भी लाते हैं ताकि बिरयानी प्रसाद घरवालों के लिए ले जा सकें.’

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वडक्कमपट्टी में हर कोई है बिरयानी का फैन

द हिन्दू अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, वडक्कमपट्टी गांव में रहने वाला हर व्यक्ति बिरयानी को पसंद करता है. खासकर मुनियंडी स्वामी के मंदिर में सालाना उत्सव के दौरान मिलने वाले बिरयानी प्रसाद के लिए पूरा गांव उत्साहित रहता है. एक ग्रामीण ने अखबार को बताया कि न सिर्फ गांव वाले, बल्कि हमारे भगवान भी बिरयानी खाना पसंद करते हैं. अखबार के अनुसार, वडक्कमपट्टी की लजीज बिरयानी पूरे तमिलनाडु, यहां तक कि दक्षिण भारत के अन्य राज्यों में भी मशहूर है. इसी कारण मदुरै में बाकायदा श्रीमुनियंडी विलास नाम से एक रेस्टोरेंट है, जिसके खास डिश के तौर पर वडक्कमपट्टी शैली की बिरयानी मशहूर है. सिर्फ मदुरै ही नहीं, श्रीमुनियंडी विलास एक रेस्टोरेंट-चेन है, जिसके आउटलेट तमिलनाडु के अन्य शहरों में भी हैं. इसके एक हजार से ज्यादा रेस्टोरेंट तमिलनाडु और दक्षिण भारत के अन्य शहरों में लोगों को वडक्कमपट्टी-बिरयानी का स्वाद चखाते हैं.