Tanaji Untold Story: बॉलीवुड में इन दिनों बायोपिक्स का दौर चल रहा है. इसी बीच अजय देवगन (Ajay devgan) की फिल्म तानाजी (Tanhaji) जी आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. दर्शकों की तरफ से फिल्म को लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. बता दें कि इस फिल्म में तानाजी के किरदार को अजय देवगन ने निभाया है वहीं काजोल (Kajol) ने इस फिल्म में तानाजी की पत्नी का किरदार निभाया है. गौरतलब है कि काजोल असल जीवन में भी अजय देवगन की पत्नी हैं. तानाजी फिल्म प्रसिद्ध मराठा योद्धा तानाजी मालुसरे के जीवन पर आधारित है. तानाजी मालसुरे (Tanaji Malusare) के सिंह नाम से भी जाना जाता है. तानाजी को अनसंग हीरो भी कहा जाता है. अनसंग का मतलब है कि वे लोग जिनका योगदान इतिहास में बहुत ज्यादा रहा है लेकिन उनको वो सम्मान नहीं दिया गया या फिर उनके नाम को बहुत ज्यादा प्रसिद्धि नहीं मिली. Also Read - Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti: मुगलों को घुटने टेकने पर शिवाजी ने किया मजबूर, पढ़ें हिंदू हृदय सम्राट की कहानी

हम आपको आज तानाजी (Tanaji Malusare) के बारे में बताने वाले हैं. हम बताएंगे की आखिर तानाजी कौन थें. हम बताएंगे की मराठा युद्ध और हिंदुस्तान के लिए उनकी अहमियत क्या है. तानाजी मालसुरे (Tanaji Malusare) को सिंह नाम से भी बुलाया जाता है. इन्होंने साल 1670 में हुए सिंहगढ़ की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी. या यूं कहें कि इस युद्ध को इतिहास की पहली सर्जिकल स्ट्राईक भी कह सकते हैं. भारत का इतिहास कई युद्धों और लड़ाईयों से भरा पड़ा है. इसमें तानाजी के अगर बात करें तो तानाजी मालसुरे को बहादुर माराठा योद्धाओं में गिना जाता है. तानाजी छत्रपति शिवाजी महाराज के दोस्त थे. साल 1670 में सिंहगढ़ की लड़ाई के लिए तानाजी को सबसे ज्यादा याद किया जाता है. तानाजी ने इस युद्ध में मुगल किला रक्षक उदयभान राठौर के खिलाफ अपनी आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ी थी. इस युद्ध के बाद माराठाओं के जीत का रास्ता साफ हो सका था. Also Read - Maharashtra News: पवनगढ़ दुर्ग के पास खुदाई में मिले 17वीं शताब्दी के तोप के गोले, देखें तस्वीर...

बता दें कि तानाजी को सिंह नाम छत्रपति शिवाजी महाराज ने ही दिया था. शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) तानाजी के वीरता के कायल थे. यही वजह है कि छत्रपति उन्हें सिंह कहा करते थे. तानाजी का जन्म सन 1600 में महाराष्ट्र स्थित सतारा जिले के गोडोली इलाके में हुआ था. उनके पिता का नाम सरदार कोलाजी और माता का नाम पार्वतीबाई था. Also Read - Carryminati की बॉलीवुड में हुई एंट्री, अमिताभ बच्चन और अजय देवगन संग इस फिल्म में करेंगे काम

सिंहगढ़ की लड़ाई

सिंह गढ़ की लड़ाई के बारे में हम आपको विस्तार से बताने वाले हैं. बता दें के युद्ध से पहले तानाजी के पुत्र के विवाह की तैयारियां चल रही थीं. सभी लोग खुशियां मना रहे थे. इस बीच तानाजी शिवाजी महाराज को शादी का निमंत्रण देने उनके पास पहुंचे. यहां उन्हें पता चला की कोंधाना के किले (सिंहगढ़ किला) को शिवाजी महाराज वापस पाना चाहते हैं. यह किला साल 1665 में एक संधि के कारण शिवाजी को मुगलों को देना पड़ा था.

इन किलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी मुगलों की तरफ से राजपूत, पठान और अरब की टुकड़ियां इस किले की रक्षा किया करती थीं. इस किले की सेना का सेनापति उदयभान रौठौर और दुर्गपाल था. दोनों ही बेहतरीन योद्धा थें. बता दें कि मुगलों की तरफ से इस किले में कुल 5 हजार सैनिकों की तैनाती की गई थी. इस किले के चप्पे चप्पे पर सैनिक तैनात थे. किले का सिर्फ एक भाग ही ऐसा था जहां सैनिक नहीं थे. किले का यह भाग ऊंची लटकती चट्टा के उपर था. यहां से हमला होने या फिर घुसपैठ की किसी प्रकार की संभावना नहीं थी. इसी वजह से यहां सैनिकों की तैनाती नहीं की गई थी.

छत्रपति शिवाजी महाराज का आदेश पाकर तानाजी रात के वक्त 300 सैनिकों की एक टुकड़ी बनाई और कोंधाना किले की ओर बढ़ चलें. यहां उन्होंने अपनी पालतू छिपकली/गोह (Monitor Lizard) को इस्तेमाल में लाया. छिपकली की सहायता से मराठा सैनिक व तानाजी ने दीवार को पार कर लिया. किले के अंदर मुगलों के सैनिक अब भी इस बात से अंजान थे कि मराठा योद्धा किले में दाखिल हो चुके हैं. इसके बाद यहां भयानक युद्ध हुआ. इस युद्ध में तानाजी जी उदयभान के हाथों शहीद हो गए. इसके बाद तानाजी के शेलार मामा ने युद्ध की कमान संभाल ली. उन्होंने उदयभान को मौत के घाट उतार दिया और तानाजी की मौत का बदला लिया. सुबह की पहली किरण के साथ कोंधाना किले पर मराठाओं ने कब्जा जमा लिया और भगवा ध्वज फहरा दिया.

अपने दोस्त तानाजी मालसुरे की मौत की खबर पाकर छत्रपति शिवाजी महाराज को काफी दुख हुआ. बताया जाता है कि इस खबर को सुनकर छत्रपति ने कहा कि गढ़ आला पण सिंह गेला मतलब गढ़ यानी किला तो हाथ में आ गया लेकिन मेरा सिंह (तानाजी) चला गया. बता दें कि इस किले का नाम अब सिंहगढ़ है. छत्रपति ने तानाजी के नाम पर ही इस किले का नाम सिंहगढ़ रख दिया.