नई दिल्ली. विराट कोहली के कमान संभालने के बाद से टीम इंडिया ने भारतीय उप-महाद्वीप कि पिचों पर तो खूब टेस्ट जीत दर्ज की. इसी का नतीजा है कि वो टेस्ट की नंबर वन टीम भी बने. लेकिन, कुछ ऐसे टेस्ट मैच भी रहे जिनमें टारगेट आसान होते हुए भी उनका जीत से 36 का आंकड़ा रहा. मतलब ये कि विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया उस टेस्ट को जीत सकती थी पर ऐसा हो नहीं सका. Also Read - COVID-19: कोरोनावायरस से छिड़ी जंग में सुरेश रैना ने मदद को बढ़ाया हाथ, डोनेट किए 52 लाख रुपये

गॉल टेस्ट, श्रीलंका (2015) Also Read - COVID-19: 'टीम इंडिया के खिलाड़ियों को प्रैक्टिस के लिए जगह की कमी पहुंचा सकती है नुकसान'

फुल फ्लेज कप्तान बनने के बाद ये विराट कोहली का पहला बड़ा दौरा था. इस दौरे का पहला टेस्ट मैच भारत और श्रीलंका के बीच गॉल में खेला गया. श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पहली पारी में 183 रन बनाए जवाब में टीम इंडिया ने 375 रन स्कोर बोर्ड पर लगा दिए और पहली पारी में 192 रन की बढ़त हासिल कर ली. श्रीलंका ने दूसरी पारी में संभलकर खेलते हुए दिनेश चंडीमल के नाबाद 162 रन की बदौलत 367 रन बनाए और भारत के सामने जीत के लिए 176 रन का आसान सा टारगेट रखा. लेकिन टीम इंडिया इस आसान लक्ष्य को चेज करते हुए रंगना हेराथ की फिरकी में फंस गई और सिर्फ 112 रन पर ऑल आउट हो गई. रंगना हेराथ ने दूसरी पारी में 7 विकेट लिए और भारत 62 रन के अंतर से ये मुकाबला हार गया. Also Read - COVID-19: केएल राहुल LockDown में भी खुद को फिट रखने के लिए कर रहे हैं ये काम, देखें VIDEO

केपटाउन टेस्ट, साउथ अफ्रीका (2018)

एशिया के बाहर विराट कोहली की कप्तानी का सबसे बड़ा इम्तिहान 2018 में हुआ जब टीम इंडिया साउथ अफ्रीका दौरे पर गई. इस हाई-प्रोफाइल दौरे का पहला टेस्ट मैच केपटाउन में खेला गया. मेजबान टीम ने पहले बल्लेबाजी की और पहली पारी में 286 रन बनाए जवाब में टीम इंडिया 209 रन ही बना सकी और साउथ अफ्रीका को 77 रन की बढ़त मिल गई. भारतीय गेंदबाजों ने दूसरी पारी में धारदार गेंदबाजी की और साउथ अफ्रीका को सिर्फ 130 रन पर रोकने में कामयाब रहे. यानी, भारत को लिए जीत का टारगेट मिला 208 रन. लेकिन टीम इंडिया ने अफ्रीकी गेंदबाज फिलेंडर की उफनती गेंदों के आगे केवल 135 रन पर घूटने टेक दिए. फिलेंडर ने दूसरी पारी में 6 विकेट लिए और भारत 72 रन से मुकाबला हार गया.

सेंचुरियन टेस्ट, साउथ अफ्रीका (2018)

केपटाउन टेस्ट के बाद भारत-साउथ अफ्रीका का कारवां पहुंचा सेंचुरियन, जहां सीरीज का दूसरा टेस्ट खेला गया. लेकिन एक बार फिर से टीम इंडिया ने अपने फैंस को वैसे ही निराश किया जैसे केपटाउन में किया था. साउथ अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पहली पारी में 335 रन बनाए जवाब में टीम इंडिया ने भी 307 रन स्कोर बोर्ड पर लगा दिए. यानी साउथ अफ्रीका की बढ़ता का फासला ज्यादा नहीं रहा. भारत ने साउथ अफ्रीका की दूसरी पारी 258 रन पर समेट दी, जिसके बाद जीत के लिए उसे 287 रन का लक्ष्य मिला लेकिन भारतीय टीम युवा तेज गेंदबाज लुंगी नगीदी की घातक गेंदबाजी के आगे 151 रन पर ही ढेर हो गई. लुंगी ने दूसरी पारी में 6 विकेट चटकाए और भारत ये मैच 135 रन से हार गया.

एजबेस्टन टेस्ट, इंग्लैंड (2018)

साउथ अफ्रीका के बाद विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया इंग्लैंड खेलने पहुंची. इस दौरे को विराट कोहली के कप्तानी का सबसे बड़ा इम्तिहान कहा गया. लेकिन, कहानी यहां भी साउथ अफ्रीका जैसी ही रही. इंग्लैंड दौरे पर पहला टेस्ट बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर खेला गया. पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने पहली पारी में 284 रन बनाए जवाब में भारत ने भी 274 रन जोड़े . इसके बाद इंग्लैंड की दूसरी पारी 180 रन पर सिमट गई और भारत को 190 रन का आसान सा लक्ष्य मिला. लेकिन टीम इंडिया स्टोक्स की शानदार गेंदबाजी के आगे सिर्फ 162 रन पर आउट हो गई और भारत ये मुकाबला 31 रन के अंतर से हार गया.

साउथैम्प्टन टेस्ट, इंग्लैंड (2018)

इंग्लैंड दौरे का चौथा टेस्ट साउथैम्प्टन में खेला गया. इस टेस्ट में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी की और पहली पारी में 246 रन बनाए जवाब में चेतेश्वर पुजारा के शतक के दम पर भारत ने 273 रन का टोटल खड़ा किया और 27 रन की बढ़त बनाई. इंग्लैंड ने दूसरी पारी में 271 रन बनाए और टीम इंडिया के सामने जीत के लिए 245 रन का लक्ष्य रखा. भारत को ये टेस्ट जीतने के लिए कोई हड़बड़ी नहीं थी. उसके सामने 2 दिन का समय शेष था. लेकिन मोइन अली की फिरकी के आगे भारत की पूरी टीम चौथे दिन ही 184 रन बनाकर ऑलआउट हो गई. मोइन अली ने इस मैच में 9 विकेट लिए और भारत को 60 रन से हराने में अहम किरदार निभाया.