Tejas Fighter Jet: 13 जनवरी 2021 को जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से 83 उन्नत तेजस मार्क 1 ए (Tejas Mk1A) एयरक्राफ्ट खरीदने की घोषणा की, तो भारत के सभी रक्षा आधारित एवं अन्य औद्योगिक समूहों द्वारा इसका स्वागत किया गया. वास्तव में यह बहुत बड़ी उपलब्धि है, जहां कुल 73 सिंगल सीटर और 10 ट्विन सीटर (ट्रेनर) जहाजों को खरीदने के लिए 46,898 करोड़ रुपये के सौदे पर हस्ताक्षर किए गए थे.Also Read - म्यांमार में तख्तापलट- आखिर क्यों म्यांमार की सेना न्याय से ऊपर है

1984 में भारत ने वैमानिकी विकास एजेंसी (ADA) की स्थापना से एक लंबा रास्ता तय किया है, जो लालफीताशाही, प्रोटोकॉल, अक्षमता, परियोजनाओं की देरी, भ्रष्टाचार, धन की कमी और सबसे महत्वपूर्ण रूप एक स्पष्ट दूरदर्शिता के अभाव जैसी विभिन्न बाधाओं से गुज़रते हुए यहां तक पहुंचा है. इस परियोजना में काफी देरी हुई और पहला प्रोटोटाइप लगभग 18 वर्षों के बाद उड़ान भर सका और पहले संपूर्ण रूप से सक्षम जहाज को उड़ान भरने में लगभग 24 साल लग गए. Also Read - चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा- पाकिस्तान की आर्थिक आत्महत्या

पिछले 10 साल महत्वपूर्ण थे, जहां परियोजना ने तेज गति ली और परिणाम हमारे सामने है. आज हमारे पास परियोजना में 60% से अधिक स्वदेशी सामग्री और 40 से अधिक विभिन्न भारतीय कंपनियों की प्रमुख भागीदारी वाला एक ऐसा लड़ाकू जहाज़ है जो सभी मामलों में भारत की वायुसेना का एक अभिन्न अंग बनने को तैयार है. तेजस मार्क 1 ए सभी परिप्रेक्ष्य में अलग मशीन है. आइए जानते हैं इसके बारे में…

संरचना
तेजस दुनिया के कुछ गिने चुने हवाई जहाजों में से एक है, जिसे कार्बन फाइबर, टाइटेनियम और एल्यूमीनियम के विभिन्न मिश्रण जैसे सामग्री से बनाया जाता है. Tejas की बाहरी संरचना 92% से अधिक इस सामग्री से बनी है. यह विमान को अधिक स्थिरता, अधिक वजन ले जाने की क्षमता और एक अच्छे स्तर की स्टेल्थ क्षमता प्रदान करता है. चूंकि विमान की संरचना मॉड्यूलर है और इसमें जोड़ों की संख्या आधे से भी कम है. अतः यह न केवल एयरफ्रेम के जीवन को बढ़ाता है, बल्कि लम्बे समय तक मरम्मत और रखरखाव में भी मदद करता है.

एवियोनिक्स
अधिकांश एवियोनिक्स हमारे अपने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा बनाए / एकीकृत किए गए हैं. इसमें मल्टी-फंक्शन डिस्प्ले, स्मार्ट लैंडिंग सिस्टम, हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले और एक सुरक्षित डेटा लिंक-आधारित संचार प्रणाली शामिल है. इसमें विभिन्न आधुनिक सेंसर और एक अत्याधुनिक नेविगेशन प्रणाली भी है जो उपग्रह आधारित डेटा लिंक के साथ भी एकीकृत है.

रडार
तेजस मार्क 1 ए का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसका रडार है. पहले वाले तेजस जहाजों में मौजूद मैन्युअल प्लानर एरे रडार को अब एलाटा सिस्टम- इजराइल द्वारा बनाए गए एक बहुत ही उन्नत इलेक्ट्रॉनिक फेज्ड एरे रडार से बदल दिया गया है. आज, दुनिया के केवल कुछ चुने हुए हवाई जहाजों (चौथी पीढ़ी या उससे आगे) के पास इस प्रकार का रडार है. यह रडार किसी भी प्रकार के जैमिंग से बचते हुए 200 डिग्री से अधिक कवरेज दे सकता है. चूंकि यह एक फेज्ड एरे रडार है, इसलिए इसका पता लगाना भी मुश्किल है.

सेल्फ-प्रोटेक्शन जैमर (SPG)
मौजूदा तेजस पर यह एक और अतिरिक्त चीज जोड़ी गई है. यह एक ऐसी प्रणाली है जो पूर्णतया स्वचालित है और वायु और सतह दोनों से लॉन्च किए गए विभिन्न रडार निर्देशित हथियार प्रणालियों से तेजस मार्क 1 ए विमान को बचाता है. यह उन मिसाइलों और विमानभेदी तोपों व अन्य रडार की फ्रीक्वेंसी को पहचानकर उनको जाम करने की क्षमता रखता है. इसमें एक समय में कई लक्ष्यों का पता लगाने और उन्हें लक्ष्य बनाकर बर्बाद करने की क्षमता है, ताकि हमारा तेजस मार्क 1 ए इस प्रकार के खतरों से बचा रहे.

रख-रखाव की कम जरूरत
नए तेजस मार्क 1 ए में एक और खास बात है. इस प्रणाली के काफी सारे हिस्सों को मॉडुलर बनाया गया है और उनके जीवन काल को भी बढ़ाया गया है. इससे न केवल इस जहाज की क्षमता बढ़ी है, बल्कि इसके रखरखाव में भी भारी कमी आयी है. नए जहाज़ के रखरखाव में अब कम समय लगता है और इसकी मरम्मत में आने वाला अंतराल भी बढ़ गया है. इससे जहाज़ के जीवन काल में भी बढ़ोतरी हुई है.

बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल्स
तेजस मार्क 1 ए अपने बेहतर एईएसए रडार के कारण लंबी दूरी तक मार करने वाली बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइलों से दुश्मन को नेस्तनाबूद करने में सक्षम है. मेटेओर एवं अस्त्र जैसे उन्नत मिसाइल प्रणालियों को प्रभावी रूप से इस विमान के साथ एकीकृत किया जा सकता है जो इसे एक घातक स्वरूप प्रदान करता है. भारतीय रक्षा एवं विकास संस्थान ने इस विमान से अस्त्र मिसाइल का अत्यंत सटीकता के साथ परीक्षण भी किया है.

एयर टू एयर रिफ्यूलिंग
किसी विमान की मारक क्षमता और दूरी को बढ़ाने के लिए हवा से हवा में ईंधन भरना महत्वपूर्ण है. इस प्रकार, तेजस मार्क 1 ए में एक नवीनतम तकनीक वाला ईंधन पॉड लगाया गया है, जो कम समय में विमान का ईंधन पूरा भर देता है. बाद के सभी संस्करणों में भी यह सुविधा होगी.

शस्त्र प्रणालियां
तेजस मार्क 1 ए की हथियार ले जाने की क्षमता 5,300Kg से भी अधिक है. इसमें एक 23 मिलीमीटर की ट्विन बैरल गन शामिल है. यही नहीं, इस विमान में विभिन्न प्रकार की मिसाइलों और रॉकेट को ले जाने के लिए कुल 8 हार्ड प्वाइंट हैं, जिनसे तेजस मार्क 1 ए एक दुर्जेय फाइटिंग मशीन बन जाता है. यह रॉकेट, छोटी, माध्यम और लंबी दूरी की एयर टू एयर मिसाइल, ब्रह्मोस जैसी क्रूज़ मिसाइल और स्पाइस और हैमर सहित अन्य कई तरह के हथियारों को ले जा सकता है।

तेजस मार्क 1 ए हालांकि पहले बने हुए तेजस मार्क 1 और आगे आने वाले अत्याधुनिक तेजस एमके 2 के बीच का संस्करण है पर फिर भी यह अत्यंत घातक है. इसके अंदर लगी हुई प्रणालियां छिपे हुए दुश्मन का भी पता लगाकर उसका बड़े पैमाने पर विनाश करने में सक्षम है. तेजस मार्क 2 भारतीय प्रौद्योगिकी का एक और अधिक घातक नमूना है, जिसके अगले 3 वर्षों में तैयार होने की उम्मीद है.

हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और एडीए भारतीय वायु सेना को निर्धारित समय सीमा में सही गुणवत्ता का विमान दे पाएगी? इतिहास साक्षी है कि आज तक एचएएल ने एक भी परियोजना को समय पर पूरा नहीं किया है और बार-बार लागत में वृद्धि करके अपनी सारी परियोजनाओं को आर्थिक रूप से मुश्किल बना दिया है. जैसा कि मैंने पहले उल्लेख किया है, लालफीताशाही, अभाववादी रवैया, भ्रष्टाचार, जवाबदेही का अभाव और नौकरशाही की मानसिकता की वजह से इन संगठनों की संपूर्ण विश्वसनीयता खो चुकी है. तेजस मार्क 1 ए का ये ऑर्डर उनके लिए बेहतर और तेजी से काम करने और अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को एक बार फिर से हासिल करने का सुनहरा मौका है. उम्मीद है HAL और एडीए इस मौके को पहले की तरह बरर्बाद नहीं करेंगे.


(अमित बंसल रक्षा मामलों के जानकार हैं. अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी रुचि है. वह लेखक, ब्लॉगर और कवि भी हैं.)