नई दिल्ली. बिहार के मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में 34 लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न का जो मामला आज मीडिया की सुर्खियों में है, वह हैवानियत के इस गंदे खेल का सिर्फ एक हिस्साभर है. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) ने बिहार के विभिन्न जिलों में चल रहे ऐसे कई संस्थानों पर सवालिया निशान लगाए हैं. यह गौरतलब है कि खुद बिहार सरकार के समाज कल्याण मंत्रालय के कहने पर ही TISS ने प्रदेश में गैर सरकारी संस्थाओं (NGO) द्वारा चलाए जा रहे इन आश्रय गृहों का सोशल ऑडिट किया है. इस ऑडिट रिपोर्ट के निष्कर्ष चौंकाने वाले हैं. प्रदेश में ऐसे कुल 110 संस्थान हैं, जहां पर न तो सरकारी नियमों का पालन किया जाता है और न ही अल्पावास गृहों में रखे जाने वाले लोगों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाता है.

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मुजफ्फरपुर में ब्रजेश ठाकुर द्वारा चलाए जा रहे बालिका गृह स्कैंडल की घटना सिर्फ एक उदाहरण है. TISS की रिपोर्ट के अनुसार बिहार के कई अन्य जिलों में चल रहे आश्रय गृहों में भी हैवानियत का यही गंदा खेल खेला जाता है. TISS की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के 6 अल्पावास गृहों में यौन उत्पीड़न और 14 शेल्टर होम में अमानवीय तरीके से लोगों को रखने का जिक्र किया गया है. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, TISS ने बिहार सरकार के समाज कल्याण मंत्रालय को जो रिपोर्ट सौंपी है, उसके ‘Grave Concerns’ नामक अध्याय में इन आश्रय गृहों की बदइंतजामी का विस्तृत विवरण दिया गया है. इंडियन एक्सप्रेस ने इस रिपोर्ट के आधार पर बिहार के विभिन्न जिलों के शेल्टर होम के बारे में TISS की रिपोर्ट के निष्कर्षों के कुछ अंश प्रकाशित किए हैं. आप भी पढ़िए इस रिपोर्ट के चौंकाने वाले निष्कर्ष.

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बालिका अल्पावास गृह- मुजफ्फरपुर (NGO सेवा संकल्प एवं विकास समिति)
सरकारी नियमों और निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाकर यह संस्थान चलाया जा रहा है. यहां रहने वाली कई लड़कियों ने संस्थान में हिंसा और यौन उत्पीड़न के बारे में बताया. इस अल्पावास में चल रही गतिविधियां संदिग्ध हैं. यहां रहने वाली लड़कियों को खुली जगह में नहीं जाने दिया जाता. भोजन के लिए डाइनिंग हॉल में जाने के अलावा, उन्हें लगभग अपने वार्डों में ही बंद करके रखा जाता है.

बालक आवास – मोतिहारी (NGO निर्देश)
यहां रहने वाले बच्चों ने अपने साथ गंभीर हिंसा, मार-पीट किए जाने की शिकायत की है. अल्पावास गृह के एक कर्मचारी के ऊपर बच्चों ने शारीरिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं. बच्चों ने बताया कि छोटी से छोटी गलतियों पर भी उन्हें बुरी तरीके से मारा-पीटा जाता है. उन्हें अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता है. मोतिहारी में ही स्थित बालिकाओं और महिलाओं के एक अन्य अल्पावास गृह में भी शारीरिक हिंसा की शिकायतें मिली हैं.

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बालक आवास – भागलपुर (NGO रूपम प्रगति समाज समिति)
यहां रहने वाले बच्चों की स्थिति भी दयनीय है. बच्चों ने बताया कि एनजीओ का सिर्फ एक कर्मचारी ही उनके पक्ष में बोलता है. इसके कारण उसे भी संस्था के सचिव की प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है. अल्पावास गृह में रखी गई शिकायत पेटी में यहां रहने वाले ढेरों बच्चों की शिकायतें मिली हैं, जिसमें मार-पीट और शारीरिक हिंसा के संबंध में शिकायत की गई है.

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बालक आवास – मुंगेर (NGO पनाह)
यहां रहने वाले बच्चों को इस संस्था के अधीक्षक प्रताड़ित करते हैं. बच्चों को संस्था के परिसर में ही मौजूद अधीक्षक के आवास में घरेलू काम करने के लिए मजबूर किया जाता है. अधीक्षक द्वारा मार-पीट कैसे की जाती है, इसका एक उदाहरण यहां पर लंबे समय से रह रहा एक बच्चा, जो खाना भी बना लेता है. बच्चे ने बताया कि भोजन संबंधी किसी बात पर अधीक्षक ने उसे इतना पीटा कि उसकी गाल पर 3 इंच लंबा निशान पड़ गया. यहां स्थित बालिका अल्पावास गृह में भी लड़कियों के रहने की अच्छी व्यवस्था नहीं है.

बालक आवास – गया (NGO डीओआरडी)
यह संस्था बच्चों के शोषण का अड्डा है. यहां रहने वाले बच्चों की स्थिति पर तत्काल संज्ञान लिया जाना चाहिए. बच्चे हमेशा बंद करके रखे जाते हैं. बच्चों ने बताया कि संस्था में काम करने वाली कुछ महिलाएं बच्चों को गंदे मैसेज लिखने को कहती हैं और इन संदेशों को दूसरी महिला स्टाफ तक पहुंचाने का दबाव बनाती हैं. कुछ बच्चों ने यहां पर मार-पीट किए जाने की भी बात कही.

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गवर्नमेंट ऑब्जर्वेशन होम – अररिया
इस संस्थान में बिहार सरकार की तरफ से सुरक्षा के लिए एक पुलिसकर्मी की तैनाती की गई है, जो बच्चों को बुरी तरीके से मारता-पीटता है. उसकी क्रूरता और हैवानियत की कहानी बताते हुए एक बच्चे ने कहा कि यहां लंबे समय से रह रहे एक बच्चे को पुलिसकर्मी ने इतना पीटा कि उसकी पूरी छाती पर निशान पड़ गए. मार-पीट के कारण उसे कई जगह सूजन आ गई.

बालिका अल्पावास गृह – पटना (NGO IKARD)
इस संस्थान में काम करने वाले स्टाफ हर वक्त अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं. वे यहां रहने वाले बच्चों के साथ गाली-गलौज करते हैं. यहां के अमानवीय वातावरण में रहने से तंग आकर एक बच्ची ने आत्महत्या कर ली थी. यहां रहने वाली कई लड़कियों ने बताया उन्हें कपड़े, दवाइयां या साफ-सफाई के अन्य साधन तक नहीं दिए जाते हैं.

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बालिका अल्पावास गृह – मधेपुरा (NGO ग्राम स्वराज सेवा संस्थान)
यहां रहने वाली लड़कियों के साथ भी अमानवीय व्यवहार किया जाता है. यहां रहने वाली महिलाओं और लड़कियों ने बताया कि संस्थान में सुरक्षा के लिए तैनात सिक्योरिटी गार्ड उनसे अक्सर गाली देकर बात करता है. वह आती-जाती लड़कियों को देखकर अभद्र टिप्पणी करता है. लड़कियों के साथ खुलेआम छेड़खानी की जाती है.