नई दिल्ली: क्या आप उसी तरह के जहाज में सफर करना चाहेंगे तो भंयकर हादसे का शिकार हुआ हो और जिसमें 1500 से ज्यादा लोग मारे गए हों. कभी दुनिया का सबसे विशाल जहाज रहा टाइटैनिक सैकड़ों साल पहले विशाल हिमखंड से टकरा कर दो हिस्सों में टूट गया था. ढाई घंटे बाद जहाज अटलांटिक महासागर में डूब गया. इस हादसे में 1500 से ज्यादा पुरुष, महिलाएं और बच्चों की मौत हुई थी. 1912 में यह जहाज ब्रिटेन के साउथैम्पटन बंदरगाह से न्यूयॉर्क जा रहा था. इतिहास के पन्नों में दर्ज इस हादसे के ठीक 110 साल बाद 2022 में टाइटैनिक-2 फिर से समुद्र की लहरों से टकराएगा. जब यह जहाज पानी में उतरेगा तो पुराने टाइटैनिक की याद दिलाएगा.

डेली मेल की खबर के मुताबिक 2022 में समुद्र में उतरने वाला जहाज उसी रास्ते पर चलेगा जिस रास्ते पर चलते हुए टाइटैनिक-1 हादसे का शिकार हुआ था. इतना ही नहीं इस जहाज में भी उतने ही यात्री होंगे जितने की पहले वाले जहाज में थे. टाइटैनिक में 2400 यात्री और 900 चालक दल के सदस्य थे. हादसे से सबक लेते हुए टाइटैनिक-2 को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा. इसमें आधुनिक नेविगेशन और रडार उपकरण लगे होंगे जिससे संभावित हिमखंडों को पहले से ही देखा जा सके. पहले के जहाज की तुलना में अधिक लाइफबोट होंगीं. 1912 में टाइटैनिक हिमखंड से टकराने के बाद ही दो हिस्सों में बंट गया था.

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चीन में बन रहा है जहाज
नया जहाज, टाइटैनिक द्वितीय का निर्माण ऑस्ट्रेलियाई कंपनी ब्लू स्टार लाइन द्वारा चीन में किया जा रहा है. इसका निर्माण लंबे समय तक वित्तीय विवाद में फंसा रहा. महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग $500 मिलियन डॉलर खर्च होगा. टाइटैनिक-2 पिछले वाले जहाज के मूल मार्ग पर चलते हुए दुबई से साउथैम्पटन, इंग्लैंड, और उसके बाद साउथैम्पटन-न्यूयॉर्क मार्ग के माध्यम से न्यूयॉर्क शहर में अपनी दो सप्ताह की पहली यात्रा शुरू करेगा. पहले वाले जहाज की ही तरह इसमें भी तीन तरह के टिकट होंगे जिसमें पहली, दूसरी और तीसरी श्रेणी होगी.

 

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कैसे हुआ था हादसा
10 अप्रैल 1912 को टाइटैनिक ने अपनी यात्रा शुरू की थी. टाइटैनिक के डूबने का मुख्य कारण इसकी स्पीड थी. 14 अप्रैल 1912 को टाइटैनिक को 6 बर्फ की चट्टानों की चेतावनियां मिली थी. कप्तान को लगा की बर्फ की चट्टान आने पर जहाज मुड़ जाएगा. लेकिन जहाज बहुत बड़ा था और राडार छोटा, बर्फ की चट्टान आने पर वह अधिक गति के कारण समय पर नहीं मुड़ पाया और चट्टान से जा टकराया. इससे जहाज के आगे के हिस्से में छेद हो गए और वह डूबने लगा. 2.5 घंटे में जहाज पूरी तरह डूब गया. टाइटैनिक उस समय के सबसे अनुभवी इंजीनियरों के द्वारा डिजाइन किया गया था और इसके निर्माण में उस समय में उपलब्ध सबसे उन्नत तकनीकी का इस्तेमाल किया गया था. व्यापक सुरक्षा और सुविधाओं के बावजूद, टाइटैनिक डूब गया था.

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12 हजार फीट की गहराई में पड़ा है मलबा
टाइटैनिक पर विलासिता की सारी सुविधाएं थीं. स्विमिंग पूल, जिम, एक स्क्वैश कोर्ट, स्नानगृह, और कैफे. पहली श्रेणी के कमरों को महंगे फर्नीचर और अन्य सजावट से सजाया गया था. बिजली से चलने वाली तीन लिफ्ट थी. इस विशालकाय शिप को बनाने वाले थॉमस एंड्रयू को टाइटैनिक का असली हीरो माना जाता है. 7 फरवरी 1873 को जन्में एंड्रयू बिजनेसमैन होने के साथ-साथ शिपमेकर भी थे. थॉमस ने ही टाइटैनिक को डिजाइन किया था. 15 अप्रेल 1912 की रात जब टाइटैनिक आइसबर्ग से टकराया तभी एंड्रयू समझ गए थे कि अब जहाज नहीं बचेगा. लेकिन उन्होंने खुद को बचाने की जगह लोगों की मदद की. कई सालों बाद जब अटलांटिक महासागर में खोज की गई तो टाइटैनिक समुद्र में 12 हजार फीट की गहराई में मिला.