नई दिल्ली: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की स्थापना 1875 में आज के ही दिन की गई थी. एएमयू की उम्र 143 साल हो गई है. 143 सालों के लंबे सफ़र में एएमयू ने गौरवपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं. यहां से पढ़कर निकले स्टूडेंट्स राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति से लेकर पीएम तक बने. किसी को भारत रत्न मिला तो किसी को दूसरे बड़े सम्मान. सिर्फ देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के स्टूडेंट्स के लिए एएमयू पढ़ने-लिखने की पसंदीदा जगह बना हुआ है. हिंदू-मुस्लिम एकता के हितैषी रहे सर सैयद अहमद खान द्वारा स्थापित किए गए इस विश्वविद्यालय के संग्रहालय में लेटे भगवान विष्णु की प्रतिमा व लाइब्रेरी में कुरआन के साथ ही गीता की प्राचीन पांडुलिपियाँ रखी हुई हैं. जिन्ना जैसे विवाद का दाग मिटा दें तो एएमयू की शैक्षणिक उपलब्धियां एतिहासिक कही जा सकती हैं. 143 वें जन्म दिन के मौके पर India.com एएमयू का इतिहास बताने जा रहा है… Also Read - AMU: कुलपति ने 22 मार्च तक स्थगित की कक्षाएं, 31 मार्च तक नहीं होगा कोई बड़ा प्रोग्राम

ये था पुराना नाम, सर सैयद अहमद खान ने रखी थी नींव
समाज सुधारक सर सैयद अहमद खान ने एएमयू की स्थापना 1875 में यूपी के अलीगढ़ शहर में की थी. तब इसका नाम मुहम्मदीन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज रखा गया था, जो बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय हो गया. देश में कुल 23 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं, इनमें एएमयू का अहम स्थान है. इसे 1920 से ही सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला था. संसद ने 1951 में एएमयू संशोधन एक्ट पारित किया. इसके बाद इस संस्थान के दरवाजे गैर-मुसलमानों के लिए खोले गए. Also Read - पति ने होली पर नए कपड़े दिलवाने से किया इंकार, महिला ने छह माह की बेटी को बेहरहमी से पीट-पीटकर मार डाला

अटल बिहारी व आडवाणी ने किया था अल्पसंख्यक संस्थान होने का समर्थन
1920 से 1965 तक एएमयू बढ़िया तरह से चलता रहा. इसके बाद 1965 से 1972 के दौरान सरकारों ने कई तरह पाबंदी लगा दीं. 1961 में अजीज पाशा नाम के शख्स ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी कि इसे अल्पसंख्यक संस्थान नहीं माना जाए. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फैसला सुनाते हुए एएमयू को अल्संख्यक संस्थान मानने से मना कर दिया था. बाद में 1981 में केंद्र सरकार ने फिर से कानून में संशोधन किए और अल्पसंख्यक दर्जा दिया. आम सहमति से बिल पास हुआ. एएमयू को इसी बिल के पास होने के बाद से अब तक अल्संख्यक होने का दर्जा मिला हुआ है. ये वो समय था जब अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी ने एएमयू के अल्पसंख्यक होने का समर्थन किया था. Also Read - अलीगढ़: सीएए के विरोध में बेकाबू हालात, पुलिस ने किया लाठी चार्ज, मोबाइल इंटरनेट सेवा ठप

इन मशहूर हस्तियों ने एएमयू से की पढ़ाई
हामिद अली अंसारी जो 2007 से 2017 तक हमारे देश के उप राष्ट्रपति रहे, ने एएमयू से पढ़ाई की थी. हाल ही हामिद अंसारी एएमयू पहुंचे थे. लियाकत अली खान, जो पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने, ने 1913 में एएमयू से उच्च शिक्षा ग्रहण की थी. लियाकत अली खान ने एएमयू से लॉ और पॉलिटिकल साइंस की डिग्री ग्रहण की थी. अली अशरफ फातमी ने यहाँ से शिक्षा ली. अशरफ भारत सरकार के पूर्व मानव संसाधन राज्यमंत्री रहे. हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद ने यहां से पढाई की. दिल्ली के सीएम रहे साहिब सिंह वर्मा, क्रिकेट खिलाड़ी रहे लाला अमरनाथ, कैफ़ी आज़मी, राही मासूम रजा, जिनका एएमयू की प्रष्ठभूमि पर लिखा गया टोपी शुक्ला उपन्यास बेहद मशहूर है, मशहूर गीतकार जावेद अख्तर के साथ ही मशहूर फिल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने भी एएमयू से पढ़ाई की थी. इनके साथ ही ऐसे तमाम लोग हैं, जिन्होंने यहां से पढ़ने के बाद देश को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया.

भारत रत्न से सम्मानित हुए ये दो नाम
देश तीसरे राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन ने एएमयू से पढ़ाई की थी. यहाँ पढ़े खान अब्दुल गफ्फार खान को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था.

एएमयू में 250 से अधिक कोर्स चलते हैं, मौजूद है दुर्लभ लाइब्रेरी
एएमयू में 250 से अधिक पाठ्यक्रम पढ़ाये जाते हैं. यहां की लाइब्रेरी बड़ी लाइब्रेरी मानी जाती है. इसकी स्थापना 1877 में हुई थी. लाइब्रेरी में साढ़े चार लाख से अधिक दुर्लभ किताबें हैं. यहां फ़ारसी में अनुवादित गीता भी उपलब्ध है. इसके साथ ही चार सौ साल पहले फारसी में अनुवादित की गई महाभारत की पांडुलिपि भी रखी हुई है. चौदह सौ साल पुरानी कुरआन लाइब्रेरी में है. इसके साथ ही कई दुर्लभ दस्तावेज हैं, जो मुग़ल शासन की याद दिलाते हैं.

संग्रहालय में हैं शैया पर लेटे भगवान विष्णु
इसके साथ ही लाइब्रेरी में महावीर जुल स्तूप, आदिनाथ की प्रतिमाएं, शैया पर लेटे भगवान विष्णु व कंक्रीट के सूर्यदेव की प्रतिमा भी यहां मौजूद है. संग्रहालय में लोहे व पत्थर के पुराने हथियार, पुराने बर्तन भी हैं. ये दुर्लभ वस्तुओं को समेटे दुर्लभ जगह है.