नई दिल्ली. पीएम नरेंद्र मोदी आगामी 11 मई को जब नेपाल की पवित्र नगरी जनकपुर पहुंचेंगे तो धार्मिक दृष्टि से यह भारत और नेपाल, दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक होगा. पीएम मोदी हिन्दू धर्म के इस पवित्र स्थान से अपने इस दौरे की शुरुआत कर दोनों देशों के बीच एक अनोखे संबंध की आधारशिला रखेंगे. यह संबंध होगा, भगवान राम से शहर से माता सीता के मायके को जोड़ने का. जी हां, पीएम मोदी अपनी नेपाल यात्रा के दौरान जनकपुर को रामायण सर्किट से जोड़ने और यहां से अयोध्या तक की बस सेवा की शुरुआत करने की घोषणा कर सकते हैं. नेपाल से राजनीतिक संबंधों को और सशक्त बनाने और दोनों देशों के बीच नई कड़ियां जोड़ने के लिए पीएम मोदी की ये पहल काफी महत्वपूर्ण होगी. जनकपुर हिन्दुओं के लिए पवित्रतम स्थलों में से एक है. वहीं अयोध्या को भगवान राम की नगरी के रूप में ख्याति प्राप्त है. प्राचीन हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार अवध के राम और मिथिला की सीता ने इन दोनों क्षेत्रों को जोड़ा था.

जनकपुर के जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे पीएम
पीएम नरेंद्र मोदी नेपाल की अपनी यात्रा के क्रम में सबसे पहले जनकपुर पहुंचेंगे. जनकपुर पहुंचने के बाद नेपाल के रक्षा मंत्री ईश्वर पोखरेल और प्रोविंस-2 के मुख्यमंत्री लालबाबू राउत पीएम नरेंद्र मोदी की आगवानी करेंगे. पीएम मोदी का माता सीता की नगरी के रूप में विख्यात इस शहर में स्थित प्रसिद्ध जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना करने का भी कार्यक्रम है. वे जानकी मंदिर में करीब आधे घंटे तक पूजा-अर्चना करेंगे. यहीं पर पीएम मोदी से नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की मुलाकात होगी. नेपाल के अखबार काठमांडू पोस्ट के अनुसार जानकी मंदिर परिसर में ही पीएम नरेंद्र मोदी जनकपुर को रामायण सर्किट में शामिल करने और अयोध्या तक की बस सेवा शुरू करने की घोषणा कर सकते हैं. इसके बाद जनकपुर के बारहबीघा स्थित रंगभूमि मैदान में उनका नागरिक अभिनंदन किया जाएगा. इसके बाद पीएम मोदी का मुस्तांग जिले में मुक्तिनाथ मंदिर जाने का कार्यक्रम है.

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विवाह पंचमी पर जनकपुर में लगता है बड़ा मेला
राजा जनक की बेटी सीता को जानकी के नाम से भी जाना जाता है. पौराणिक मान्यता है कि मिथिला राज्य में अकाल पड़ने के बाद वहां के राजा जनक ने सीतामढ़ी (बिहार का एक जिला) के पुनौरा में जमीन पर हल चलाकर भगवान इंद्र से वर्षा की कामना की थी. खेत में हल चलाने के दौरान हल का अगला सिरा (फाल) एक मटके से जा भिड़ा, जिसमें से राजा को एक बच्ची की प्राप्ति हुई. यही बच्ची आगे चलकर सीता या जानकी या मैथिली के रूप में प्रसिद्ध हुई. कालांतर में सीता का विवाह तत्कालीन अयोध्या नरेश दशरथ के बेटे राजकुमार राम से हुआ. हिन्दू धर्म ग्रंथों में राम और सीता को भगवान विष्णु और लक्ष्मी का अवतार माना जाता है. सीता और राम का विवाह कार्तिक शुक्लपक्ष पंचमी को हुआ था. जनकपुर में इस दिन को उत्सव के रूप में मनाया जाता है. हर साल कार्तिक मास में जनकपुर में विवाह पंचमी के अवसर पर मेला लगता है. इसमें नेपाल के विभिन्न शहरों के अलावा भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के श्रद्धालु आते हैं.