कोलकाता. कालजयी शास्त्रीय गायिका गिरजा देवी की सफलता में उनके अपने कठिन परिश्रम के अलावा उनकी जिंदगी से जुड़े दो महत्वपूर्ण पुरुषों के सहयोग का बहुत बड़ा हाथ था. ये दोनों पुरुष कोई और नहीं बल्कि उनके पिता और पति थे. शास्त्रीय गायक देबप्रिय अधिकारी और सितार वादक समन्वय सरकार द्वारा बनाई गई फिल्म ‘गिरजा : ए लाइफटाइम इन म्यूजिक’ में यह बात कही गई है. गिरजा देवी के जीवन और उनके वक्त को दिखाने वाली इस फिल्म ने हाल में 65वें राष्ट्रीय पुरस्कारों में ‘कला और संस्कृति’ क्षेत्र की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीता है. इस फिल्म में गिरजा देवी के जीवन में संगीत से जुड़ी कई अनसुनी-अंजानी बातों को शामिल किया गया है. Also Read - UP Legislative Council की 11 सीटों पर मतगणना जारी, जल्‍द आएंगे परिणाम

पति ही संभालते थे संगीत कार्यक्रम का मैनेजमेंट
इसमें कहा गया कि जब भी वह कार्यक्रम में प्रस्तुति देने गईं तब भी वह अपने व्यवसायी पति मधुसूदन जैन के खिलाफ नहीं गईं और परिवारिक मूल्यों के प्रति सदैव समर्पित रहीं. यदि वह अपने एक कार्यक्रम के लिए जाती थीं और उनका दूसरा कार्यक्रम अगर उसी स्थान पर दो दिन बाद होता था, तो ऐसे में उनको वहां एक दिन से अधिक रुकने नहीं दिया जाता था. अधिकारी ने कहा, ‘वह लौटकर आती थीं और फिर वापस जाती थीं. लेकिन वह कभी भी अपने पति के खिलाफ नहीं गईं.’ अधिकारी ने बताया कि उनके पति संगीत कार्यक्रम का प्रबंध करते थे और इससे उन्हें अपने पेशे में आगे बढ़ने में मदद मिलती थी. उन्होंने बताया कि गिरजा देवी के पिता भी चाहते थे कि वे बचपन से ही प्रख्यात गायकों से शास्त्रीय संगीत सीखें . Also Read - काशी: पीएम मोदी ने किया 'देव दीपावली' का आगाज: विपक्ष पर साधा निशाना, 'कुछ लोगों के लिये विरासत का मतलब परिवार से है'

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बनारस में हुई है इस डॉक्यूमेंट्री के बड़े हिस्से की शूटिंग
हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत को देश-विदेश तक फैलाने वाली संगीतकार गिरजा देवी के जीवन पर बने इस वृत्तचित्र के काफी बड़े हिस्से की शूटिंग बनारस में हुई है. गिरजा देवी ने यहीं पर अपने बचपन और अपनी जिंदगी का काफी वक्त गुजारा है. वृत्तचित्र में उनके पुराने कार्यक्रमों की कुछ महत्वपूर्ण फुटेज भी शामिल की गई हैं. अधिकारी और सरकार ने याद किया कि कैसे उन्होंने संगीत को जिया. उनकी जिंदगी में संगीत समाहित रहा और यहां तक कि उन्होंने अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के कामकाज को संगीत के साथ साथ निपटाया.

प्यार से ‘अप्पा जी’ कहकर बुलाते थे लोग उन्हें
प्यार से अप्पा जी के नाम से पुकारी जाने वाली गिरिजादेवी का विवाह मात्र 15 वर्ष की उम्र में हो गया था. उन्होंने ठुमरी गायन को शास्त्रीय संगीत का हिस्सा बनाने के लिए कड़ी मेहनत की. अधिकारी और सरकार उनके शिष्य थे. गिरिजा देवी का निधन 24 अक्तूबर 2017 को हुआ .उनके निधन के करीब छह महीने बाद उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए दुर्लभ चित्रों की एक प्रदर्शनी ‘प्रणाम अप्पा’ आयोजित की गई जिसमें शास्त्रीय संगीत की प्रमुख हस्तियों, उस्ताद अमजद अली खान, पंडित बिरजू महाराज, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, पंडित जसराज आदि ने गिरिजादेवी के बारे में अपने कुछ संस्मरण साझा किए.

(इनपुट – एजेंसी)