नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अफ्रीकी देश युगांडा के दौरे पर हैं. भारत-युगांडा बिजनस फोरम में पीएम ने इस मौके पर दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने पर बल दिया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाषण के दौरान एक चुटकुला भी सुनाया. भले ही आज भारत और युगांडा के बीच रिश्ते मजबूत हो रहे हैं. लेकिन एक समय ऐसा भी था जब यहां से हजारों भारतीयों को निकाल दिया गया था. तानाशाह ईदी अमीन 70 के दशक में सैन्य तख्तापलट के बाद युगांडा के शासक बने. इसके बाद उन्होंने हजारों भारतीयों को युगांडा से निकल जाने के आदेश दिया. इस आदेश का असर यहां रह रहे 40 हजार भारतीयों पर पड़ा था जिसमें बड़ी संख्या में मोदी के गृह राज्य गुजरात के भी लोग थे. Also Read - डोनाल्ट ट्रंप के आभार के बाद पीएम मोदी ने कहा- मानवता की मदद के लिए हरसंभव काम करेगा भारत

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1972 में ईदी अमीन ने ‘आर्थिक युद्ध’ का ऐलान किया और एशिया और यूरोप के लोगों की संपत्तियों पर कब्जा शुरू कर दिया. अमीन का मानना था कि युंगाडा में रहने वाले एशिया और यूरोपीय लोग ना तो उसके वफादार हैं और ना ही समाज में घुलना मिलना चाहते हैं. एशिया और यूरोप के लोगों में उस समय युगांडा के बड़े उद्योग थे जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ थे. Also Read - Covid-19 in India Update: 5290 लोग हुए कोविड-19 का शिकार, 162 की मौत, इस राज्य की स्थिति सबसे खराब

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ईदी अमीन के आदेश के बाद रातों रात 30 हजार एशियाई ब्रिटेन चले गे. वहीं कई लोग ऑस्ट्रिया, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा, स्वीडन, फिजी और भारत चले गए. ईदी ने यहां से जाने वाले लोगों की संपत्तियों और कारोबार को अपने कब्जे में ले लिया और अपने समर्थकों में बांट दिया. एशियाई और यूरोपीय लोगों के युगांडा से जाने के बाद वहां की अर्थव्यवस्था चरमरा गई. 14 साल बाद जब योवेरी मुसेवेनी युंगाडा के राष्ट्रपति बने तब हजारों लोग वापस लौट आए. कहा जाता है कि गुजरातियों ने फिर से युगांडा की अर्थव्यवस्था को जान फूंकी और यहीं बस गए. युगांडा के 10 धनी लोगों में से तीन भारतीय हैं. यहां भारतीयों ने अपनी कंपनियों के जरिए हजारों लोगों को रोजगार दिए हैं.

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गुजरात से तालुक रखने वाले पीएम मोदी युगांडा के दौरे पर हैं. और जीरो डिफेक्ट के साथ युगांडा को मशीन देने की बात कर रहे हैं. पीएम ने कहा कि हम टेक्नॉलजी देने को तैयार हैं. मोदी कहा कि युगांडा के पास हजारों एकड़ ऐसी जमीन है जहां कोई केमिकल की बूंद तक नहीं गिरी है. वहां पर पैदा होने वाली चीजों के लिए दुनिया पागल हो सकती है. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं युगांडा को लाभ मिले और दुनिया भी स्वस्थ रहे.