नई दिल्ली. यह हैरान करने वाली बात ही है कि एक देश ने रंगभेद से संबंधित दो आंदोलन देखे. पहले आंदोलन से इसने कोई सीख नहीं ली. मोहनदास करमचंद गांधी या महात्मा गांधी वर्ष 1893 में दक्षिण अफ्रीका पहुंचे थे. उस समय वहां रहने वाले भारतीयों के साथ अंग्रेजों के भेदभाव का मामला सरगर्म था. गांधी ने सत्याग्रह आंदोलन की नींव दक्षिण अफ्रीका में ही रखी. फिर जो हुआ, वह आज इतिहास है. गांधी के वहां से लौटने और भारत आकर स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा बनने के बीच, दक्षिण अफ्रीका में एक और रंगभेदी आंदोलन ने पांव जमाना शुरू किया. यह श्वेत और अश्वेत के बीच था. इस आंदोलन से जो शख्स दुनिया के नक्शे पर उभरा, वह थे नेल्सन मंडेला. बचपन में मंडेला को उनके पिता ने जो नाम ‘रोलिह्लाला’ दिया था, उसका अर्थ विद्रोही होता है. ‘मंडेला’ सरदार के बेटे को कहा जाता है. यानी विद्रोह करने और सरदार बनने के गुण, नेल्सन मंडेला में बचपन से ही थे. उनके पूरे जीवन में उनके इन नामों का असर दिखता है. मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेदी आंदोलन का नेतृत्व किया. लगभग 30 वर्षों तक जेल में रहे. वर्ष 1990 में वे रिहा हुए, यानी गांधी के अफ्रीका पदार्पण के लगभग 100 साल बाद. Also Read - South Africa vs Pakistan, 3rd T20I: Babar Azam ने रच दिया इतिहास, पाकिस्तान की ओर से ठोका सबसे तेज T20I शतक

जेल से आने के बाद मंडेला के नेतृत्व में दक्षिण अफ्रीका में पहली बार अश्वेतों की सरकार बनी. नया संविधान बना, जिसमें रंगभेद, जातिगत भेदभाव और सामाजिक न्याय के बारे में विस्तार से लिखा गया. नेल्सन मंडेला को कभी दुनिया के कई देशों ने ‘आतंकी’ मानते हुए अपने यहां आने से मना किया था. लेकिन उनके कार्यों ने उन्हें विश्व में दूसरे गांधी की उपाधि दिला दी. 2009 में मंडेला के जन्मदिवस को संयुक्त राष्ट्रसंघ ने वैश्विक तौर पर मनाने की शुरुआत की. तभी से हर साल 18 जुलाई को Nelson Mandela International Day मनाया जाता है. आज उनकी 100वीं जयंती है.

नेल्सन मंडेला के बारे में

1- नेल्सन मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका का राष्ट्रपति पद छो़ड़ने के बाद दुनियाभर में लोकतंत्र के समर्थन, मानव अधिकार और एड्स की रोकथाम से संबंधित अभियान चलाया था. एड्स की रोकथाम के लिए उनके योगदान को समर्थन देने के लिए बाद में 46664 नाम से अभियान शुरू किया गया. यह नंबर दरअसल, जेल में रहने के दौरान नेल्सन मंडेला का कैदी नंबर था.

2- रंगभेद खत्म करने, लोकतंत्र के समर्थन में आंदोलन चलाने, दुनिया से गरीबी मिटाने और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतरीन कार्यों के लिए नेल्सन मंडेला को विश्वप्रसिद्ध नोबेल अवार्ड से भी सम्मानित किया गया. भारत सरकार ने वैश्विक स्तर पर मंडेला के योगदान को देखते हुए उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से भी नवाजा.

3- लोकतंत्र और विश्व शांति के समर्थक नेल्सन मंडेला को दुनिया में कई देशों ने विभिन्न पुरस्कार देकर सम्मानित किया. उन्हें 700 से ज्यादा सम्मान व पुरस्कार दिए गए. इनमें विश्व के कई नामी-गिरामी विश्वविद्यालयों से प्राप्त मानद डिग्री, विभिन्न देशों के नागरिक सम्मान और नोबेल अवार्ड शामिल है.

4- नेल्सन मंडेला के पिता ने 4 शादियां की थीं. वहीं नेल्सन मंडेला ने भी अपने जीवनकाल में तीन शादियां की. रंगभेद आंदोलन के समय उनकी पहली शादी हुई, जबकि जेल में रहने के दौरान उन्होंने विनी मंडेला से शादी की. इसके बाद 80 वर्ष की अवस्था में नेल्सन मंडेला ने तीसरी शादी की.

5- जेल में रहते हुए बिना चश्मे के काम करने के कारण उनकी दृष्टि कमजोर हो गई थी. राष्ट्रपति का पद छोड़ने के कई वर्षों बाद तक वे विश्व में शांति स्थापना के लिए कार्य करते रहे. 5 दिसंबर 2013 को नेल्सन मंडेला की मृत्यु हो गई.

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