No Permanent Enemies or Friends, Only Permanent Interests (किसी भी देश का कोई दोस्त या दुश्मन नहीं होता, केवल राष्ट्र का निजी हित होता है)- Winston Churchill. Also Read - PM नरेंद्र मोदी का नया रिकॉर्ड, सबसे लंबे समय तक रहने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने

नई दिल्ली: अमेरिका में नवंबर महीने में चुनाव होने वाले हैं. इस दौरान रिपब्लिकन पार्टी (Republican Party) की तरफ से डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और डेमोक्रेट पार्टी ( Democratic Party) की तरफ से जो बाइडेन (Joe Biden) राष्ट्रपति चुनावों में भाग लेने वाले हैं. इस दौरान वहां की राजनीति भी खूब गरमाई हुई है. वैसे तो राष्ट्रपति ट्रंप के बारे में लगभग पूरी दुनिया को अब ज्यादातर चीजे पता चल चुकी हैं. क्योंकि उनके राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने ऐसे कई फैसले लिए जिसपर कई बार उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. इस कारण ट्रंप की नीतियों से ज्यादातर लोग परिचित हैं. लेकिन जो बाइडेन एक ज्यादातर लोगों के लिए नया नाम है. तो आज हम जो बाइडेन के बारे में ही आपको बताने वाले हैं. हम आपको बताएंगे कि जो बाइडेन की सोच क्या है. या वह अबतक किन किन पदों पर रह चुके हैं. साथ ही हम यह भी बताएंगे कि अगर जो बाइडेन अमेरिका के राष्ट्रपति बनते हैं तो भारत पर इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है. Also Read - पहले शतक को याद कर सचिन तेंदुलकर बोले-उसकी नींव तो सियालकोट में ही पड़ गई थी

कौन हैं जो बाइडेन (Who Is Joe Biden)? Also Read - PoK में चीन के खिलाफ नाराजगी बढ़ी, लोगों ने मशाल रैली नि‍कालकर किया भारी विरोध प्रदर्शन

सबसे पहले हम आपको जो बताएंगे वो जानकर आप थोड़ा बहुत उनके बारे में समझ जाएंगे. जो बाइडेन अमेरिका के उपराष्ट्रपति रह चुके हैं. अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति बराक ओबामा (Barack Obama) के कार्यकाल के समय जो बाइडेन अमेरिका के उप राष्ट्रपति थे. हालांकि राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति के पद पर आने से पहले दोनों की कुछ खास नहीं बनती थी. क्योंकि दोनों ही राष्ट्रपति की रेस का हिस्सा थे. लेकिन चुनावों में फंड्स और सपोर्ट इकट्ठा न कर पाने के कारण इस रेस में जो बाइडेन बराक ओबामा से पीछे रह गए और फिर ओबामा को डेमोक्रेटिक पार्टी का राष्ट्रपति उम्मीदवार चुना गया था. इसके बाद जब ओबामा राष्ट्रपति बने तब जो बाइडेन को उप राष्ट्रपति नामित किया गया था.

ट्रंप की नीति और नजरिया (Donald Trump Policy)

राजनीति की हल्की समझ रखने वालों को भी इस बात का अंदाजा है कि ट्रंप चीन की खूब आलोचना करते हैं. डोनल्ड ट्रंप ही थे जिनके द्वारा अमेरिका फर्स्ट की नीति को अमेरिका में लाया गया था. साथ ही इन्होंने ही चीन से अपने व्यापार को कम से कम करने की बात कही थी. यही नहीं हाल ही में कोरोना महामारी के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने चीन की जितनी खुलकर आलोचना की है. शायद ही उतनी आलोचना किसी अन्य देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री ने की हो. डोनाल्ड ट्रंप ने हांगकांग में चीन द्वारा लाए गए कानून के खिलाफ अमेरिका के संसद में एक बिल भी पास किया है. इस बिल के अंतर्गत चीनी अधिकारियों व नागरिकों की संपत्ति को अमेरिका में सीज कर दिया जाएगा. साथ ही अन्य कई प्रवाधान है जिससे चीन को भारी नुकसान हो सकता है. कोरोना वायरस के मामले में ट्रंप चीन को कई बार चेतावनी भी दे चुके हैं कि अगर चीन द्वारा इस वायरस का निर्माण को लेकर किसी तरह का प्रमाण मिलता है तो चीन पर कार्रवाई की जाएगी. यही नहीं कोरोना माहामारी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति अमेरिकी कंपनियों को पहले ही बता चुके हैं कि चीन से अमेरिकी कंपनियों को हटाया जाए.

साथ ही भारत चीन के बीच गलवान घाटी और LAC पर लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच भी अमेरिका ने मध्यस्थता करने व भारत के हित में बोलने व भारत की हर संभव मदद करने की पेशकश भी कर चुके हैं. साथ ही कूटनीतिक व सैन्य स्तर पर भी वह लगातार भारत की चीन के खिलाफ मदद करते भी दिख रहे हैं. चाहे दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी युद्धपोतो व नेवी की तैनाती को लेकर ही क्यों न हो. साथ ही डोनाल्ड ट्रंप के ही शासनकाल में अमेरिका और भारत की सेना के बीच सैन्य समझौता किया गया था. इसका मतलब यह है कि दोनों देश एक दूसरे देश के नौसैनिक अड्डों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. साथ ही हर तरह की सुविधा जैसे युद्धपोतों में रिफ्यूलिंग यानी इंधन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. साथ ही पाकिस्तान और पाकिस्तान में पनप रहे आतंकवाद को लेकर भी डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ खड़े दिखाई दिए हैं. यही नहीं बीते दिनों पाकिस्तान द्वारा 2 भारतीय व्यापारियों को अफ्गानिस्तान में गिरफ्तार करने व उन्हें आतंकवादी घोषित करने को लेकर भी अमेरिका ने भारत का समर्थन किया और पाकिस्तान के हथकंडे में सिरे से नकार दिया था.

जो बाइडेन का हित व नजरिया (Joe Biden’s Intrest and View)

अगर डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन की बात करें तो डोनाल्ड ट्रंप जहां चीन से नाराज नजर आते हैं वहीं जो बाइडेन की तत्कालीन समय में निजी हित भी चीन में नजर आते हैं. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जब साल 2013 में जो बाइडेन अमेरिका के उप राष्ट्रपति थे उस वक्त ये अपने बेटे हंटर बाइडेन के साथ चीन के दौरे पर गए थे. इस यात्रा से जब जो बाइडेन और उनके बेटे हंटर बाइडेन (Hunter Biden) चीन से लौटते हैं उसके कुछ वक्त बाद ही हंटर बाइडेन को चीन की एक फर्म कंपनी का पार्टनर बनाया गया. इसके बाद चीन की फर्म ने 1.5 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा पैसा बाजार व बैंकों से लिया. यही नहीं साल 2017 में चीन की एक कंपनी BHR पार्टनर्स में जो बाइडेन को Xianchai यानी Sinecure का पद दिया गया. ‘Sinecure का मतलब एक ऐसा पद जिसपर आपको किसी प्रकार का काम नहीं करना होता. इस दौरान आपको या तो अच्छी खासी तनख्वाह दी जाती है या फिर अच्छी-खासी स्टेटस कंपनी द्वारा मुहैया कराई जाती है.’

वहीं अगर BHR पार्टनर्स की बात करें तो यह एक 20 बिलियन डॉलर शेयरहोल्डर्स फंड है. इसमें चाइना डेवलपमेंट बैंक, चाइन लाइफ और कई सरकार द्वारा चलाई जाने वाली चीनी कंपनियां इसमें शामिल हैं. इससे कहीं न कहीं यह समझ आता है कि चीन में जो बाइडेन का कहीं न कहीं सीधा निजी हित और फायदे हैं. यही नहीं साल 2010 में जो बाइडेन ने कहा था- A Rising China is a positive development not only for china, but for americia. वहीं साल 2019 में राष्ट्रपति चुनावों के कैंपन में जब ट्रंप ने चीन पर जुबानी हमला किया था. इस दौरान जो बाइडेन ने कहा था- China is going to eat our lunch? Come On Man, They are not bad folks (चीन के लोग बुरे नहीं है और वो हमें किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाने वाले). यही नहीं आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप अपने कैंपेन में जो बाइडेन को China Joe कहकर बुला रहे हैं. अपने कैंपेन में वे अब China Joe को शामिल भी कर चुके हैं. खबरों की मानें तो चीन भी कहीं न कहीं जो बाइडेन को ही राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन कर रही है. क्योंकि चीन को इस बात का पता है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप अगर राष्ट्रपति रहें तो चीन को आर्थिक और व्यापारिक नुकसानों को झेलना पड़ेगा.

अमेरिका चीन ट्रेड वॉर से किसे हुआ फायदा? (Trade War Between USA-China)

बता दें कि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर काफी लंबे समय से चला आ रहा है. इस बीच अमेरिका और चीन के व्यापार में भारी अंतर था. इसी Trade Deficit को अमेरिका कम करना चाहता था. हालांकि उसको चीन से मंगवाई जा रहे सामानों की जरूरत थी. इस कारण जो सामान पहले चीन से मंगाया जा रहा था उसे अमेरिका ने भारत से खरीदना शुरू किया. अगर सितंबर 2019 के आंकड़े की बात करें तो भारत से अमेरिका के निर्यात में 9.46 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई थी. इस दौरान अमेरिका ने भारत से कुल 203 अलग अलग सामानों का निर्यात करवाया. इसमें ग्रेफाइट, कार्पेट, रबर, इलेक्ट्रोड जैसी कई चीजे शामिल थीं. वहीं अक्टूबर 2019 के आंकड़ों के बात करें तो भारत को अमेरिका से कुल 755 मिलियम अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त मुनाफा हुआ था. इसमें ज्यादा भारत को फायदा केमिकल, मेटल और ओर (ore) के निर्यात पर हुआ. यह आंकड़े संयुक्त राष्ट्र के एक अध्ययन में सामने आई थीं. माना जा रहा है कि अगर अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध और भी बढ़ता है तो भारत को इससे और भी ज्यादा भविष्य में फायदा देखने को मिलेगा.

जो बाइडेन के चुनावी कैंपेन का भारत पर प्रभाव (Joe Biden Election Campaigne And Its’ Effect On India)

जो बाइडेन की चुनावी कैंपेनिंग वेबसाइट के मुताबिक भारत सरकार द्वारा असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) के कार्यान्वयन और उसके बाद कानून में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA)के पारित किए जाने से जो बाइडेन को काफी निराशा हुई है. साथ ही कश्मीर को लेकर लिखा गया है कि भारत सरकार को कश्मीर में रह रहे सभी लोगों के अधिकारों को बहाल करने के लिए सबी आवश्यक कदम उठाने चाहिए. शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को रोकना, इंटरनेट को बंद करना या धीमा करना लोकतंत्र को कमजोर करता है.

अगर इन बातों को ध्यान में रखते हुए बात करें तो कहीं न कहीं चुनाव जीतने के बाद हो सकता है कि जो बाइडेन भारत पर कश्मीर मामले, CAA और NRC मामले पर दबाव बना सकते हैं. हालांकि यह चुनावी वादे भी हो सकते हैं लेकिन चुनावी कैंपेन का यह एक हिस्सा है. साथ ही जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद कहीं न कहीं चीन से ट्रेड वॉर खत्म हो सकता है. यही नहीं पाकिस्तान के भारत विरोधी कई मुद्दे पर ट्रंप भारत का कई अंतरराष्ट्रीय बैठकों में साथ देते आए है लेकिन जो बाइडेन की तरफ से अभी इस बाबत कुछ भी सफाई नहीं दी गई है.

H-1 विजा पर जो बाइडेन की राय (Joe Biden on H-1 Visa)

NBC न्यूज द्वारा एशियाई अमेरिकी और प्रशांत द्वीप समूह के लोगों के मामलों पर आयोजित एक बैठक में जो बाइडेन ने H-1 वीजा धारकों के अमेरिका में योगदान की प्रशंसा की थी. बाइडेन ने इस दौरान कहा था कि ट्रंप सरकार द्वारा इस विजा को इस साल के लिए समाप्त कर दिया गया है लेकिन मेरा प्रशासन ऐसा नहीं होगा. उन्होंने कहा कि कंपनी विजा पर आए लोगों ने अमेरिका का निर्माण किया है. यह वीजा एक गैर-अप्रवासी वीजा है. यह वीजा अमेरिकी कंपनियों को विशेष व्यवसायों के मामलों में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की इजाजत देता है. बाइडेन आगे कहा कि मैं अपने कार्यकाल के पहले ही दिन 1.1 करोड़ दस्तावेज रहित अप्रवासियों की नागरिकता की राह आसान करुंगा. मैं इसे कांग्रेस में विधायी आव्रजन सुधार विधेयक भेजने जा रहा हूं. बाइडेन ने इमिग्रेशन पॉलिसी को क्रूर और अमानवीय भी बताया है. उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया के एक लाख से अधिक योग्य लोग इस वीजा में शामिल हैं.