Valentines Day 2020: शाम का वक्त था. हल्की सर्दी होने के कारण अंधेरा हो चला था. हाथों में हाथ डाले ऑफिस से बस स्टॉप तक हमने एक लंबी दूरी तय कर ली थी. फिर भी थकावट नहीं थी. हाथ भी पसीना आने के बावजूद एक दूसरे से छूट नहीं रहे थे. बस स्टॉप पर पहुंचकर हम वहीं फुटपाथ पर बैठ गए और बस का इंतजार करने लगे. उस वक्त बातें करने के लिए बहुत कुछ था. इतना कुछ की वक्त कम पड़ जाए. मन करता था कि बस ऐसे बैठे रहे. हमेशा. एक दूसरे का हाथ पकड़े. कई बसें आकर गुजर जाती लेकिन हमारी बातें खत्म ना होतीं. और हमेशा की तरह अंत में ऑटो लेना पड़ता ताकि कुछ देर और साथ में वक्त बिता सकें.

Representational image

कल वेलेंटाइन डे है. ऑफिस से जल्द काम खत्म करके मैं बगल वाले बस स्टॉप पर चली गई थी. हम दोनों वहीं मिलते थे. कनाट प्लेस. फिर वहां से साथ में आईटीओ तक पैदल ही बातें करते हुए चले आते थे. मैंने राज को बहाना बना दिया था, बाजार से कुछ लेना है. आज जल्दी घर पहुंचना होगा. असल में तो मुझे उसके लिए ग्रीटिंग, फूल और चॉकलेट लेने थी. वो भी जल्दी में था. मैंने अंदाजा लगा लिया था उसे भी मेरे लिए कुछ लेना होगा. हम दोनों ही अपने-अपने रास्ते चल दिए. दुकानों पर कई कार्ड्स देखने के बाद एक हार्ट शेप वाला कार्ड काफी पसंद आया. उस पर कोटेशन भी अच्छी लिखी थी. मैंने फटाक से उसे ले लिया. कोने में लटका एक टेडी भी बहुत अच्छा लग रहा था सो उसे भी ले लिया. अब कल शाम का इंतजार था. जब हम मिलते. इस वक्त मोबाइल फोन का ज्यादा चलन नहीं था. ऑफिस में काम करते हुए भी बार-बार घड़ी पर ध्यान जा रहा था. फिर शाम हुई. कदम तेजी से बस स्टॉप की ओर बढ़ने लगे. बार-बार राज का चेहरा सामने आ रहा था. धड़कने तेज थीं. समझ नहीं आ रहा था विश कैसे करूंगी. कार्ड कैसे दूंगी जो उसके लिए मैंने लिए थे. पता नहीं आज नज़र मिलाने की हिम्मत नहीं हो रही थी. सोचकर ही शरम से चेहरा लाल हो गया था.

Travel couple

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वो हमेशा की तरह बस स्टॉप पर खड़ा मुस्कुरा रहा था. मुझे देखते ही अपना हाथ आगे बढ़ाया और गले लगा लिया. दोनों चुप थे कुछ देर. चल रहे थे पैदल. लेकिन कुछ बोलने का मन नहीं था. धड़कने तेज धड़क रही थीं. हाथों की कसावट एक वादा सा कर रही थी. हमेशा साथ रहने का. हम बस स्टॉप पहुंच चुके थे. राज, ने अपने बैग में से मुझे ग्रीटिंग कार्ड, लाल गुलाब, चॉकलेट निकाल कर दी. मैंने भी मुस्कुराकर शुक्रिया अदा कर दिया. फिर उसने धीरे से कहा- शादी करोगी मुझसे. मैं खुश रखूंगा हमेशा.

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था. उसके बुदबुदाते हुए शब्द कानो में गूंज रहे थे. मैंने कांपती आवाज में ऑटो को आवाज दी. उसका हाथ खींचकर अंदर बैठ गई. मेरी आंखें बंद थी. धड़कने तेज. सिर उसके कंधे पर. रास्ता लंबा था. आज हमारे पास शब्द नहीं थे. इतना करीब पहली बार महसूस किया था मैंने उसे. अपने बालों में उसकी ऊंगलियों की सहलाहट एक नई सी उमंग पैदा कर रही थी. घर आ गया था. उफ्फ! इतनी जल्दी. कुछ देर और बैठना था. कुछ कहना था. रह गया. पर जो मिल गया. वो हमेशा के लिए था. हां, ये वेलेंटाइन मेरे लिए खास था.