आज वो देखने आने वाले थे. घर में सुबह से तैयारियां चल रही थीं. कुछ करीबी गिने-चुने से रिश्तेदार भी थे. घर में चहल-पहल थी और मेरे दिल में, हलचल. अजीब सा अहसास था. बस फोटो देखी थी. शादी से पहले बातचीत की इजाज़त नहीं थी. कई ख्याल मन में आ रहे थे. शाम ढल रही थी. ठीक उसी वक्त दरवाजे पर दस्तक हुई. दो महिलाएं बाहर खड़ी थीं. रवि नहीं थे साथ में. देखकर सब हैरान हो गए. आखिर क्या हुआ? मां के माथे पर शिकन थी. पूछा- सब खैरियत तो है? उनमें एक रवि की मम्मी थीं और एक बुआ. परेशान लग रही थीं. बोली-हम ये शादी नहीं कर सकते. ये सुनकर मां का मुंह खुला का खुला रह गया. क्यों? अचानक से ऐसा क्या हो गया. सब तो ठीक है. धर्म भी एक है. ना जात-पात का कोई झंझट. हमने सारी तैयारियां कर ली हैं. फिर क्या दिक्कत? और कोई दिक्कत थी भी तो पहले कहना चाहिए था. आपके कहने पर ही हमने आज पक्का करने का सोचा था. आखिर हुआ क्या? लड़के को कोई परेशान है? Also Read - Sapna Choudhary भोजपुरी फिल्म में धमाल मचाने को तैयार, निरहुआ संग फरमाएंगी इश्क!

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रवि की मां ने सख्त आवाज में बोला. हमने घर में काफी सोच विचार किया. कुछ और भी रिश्ते आए हैं. उन्हें देखकर ही फैसला लेंगे. वैसे भी हमें घरेलू लड़की चाहिए. जो घर बार संभाल सके. नौकरी पेशा लड़कियों का कुछ ठिकाना नहीं है. अपना घर संभाल नहीं पाएंगी. हमें क्या संभालेंगी. आपको बोल दिया था पहले इसलिए बताने चले आए. कहीं आप बाद में दोष दें. अब चलते हैं. उस वक्त मेरा मन कर रहा था खूब रोऊं. जोर-जोर से. गुस्से से चेहरा लाल हो गया था. आंखों से आंसू बह रहे थे. नज़रें बेवजह एक टक खिड़की से बाहर ठूंठ पर टिकी थीं. सोच रही थी ऐसे कैसे कोई कर सकता है. अजीब बात थी. तभी बिस्तर पर पड़े मोबाइल पर घंटी बजने लगी. रवि का फोन था. पापा से नंबर लिया था. मुझे समझ नहीं आ रहा था क्या बात करूं. मैं कुछ कहूं इससे पहले रवि बोले-Sorry. जो भी हुआ मैं उसके लिए माफी मांगता हूं. मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता था. मां-पिताजी ने खुद फैसला लिया और आपके घर आकर बोल दिया. मैं बेहद शर्मिंदा हूं. आप उदास ना हों. मैं मिलना चाहता हूं एक बार. Also Read - Weird Love: पढ़ते-पढ़ते प्रोफेसर से हुआ प्यार, 48 साल के टीचर से 21 साल की छात्रा ने की शादी

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हम शहर के एक कॉफी हाउस में मिले. उस दिन मैंने गुलाबी रंग का सूट पहना था. रवि को पहली बार सामने से देख रही थी. उसका चेहरा कितना शांत था. उसकी आवाज कितनी मीठी थी. वो दो कॉफी और कटलेट आर्डर कर रहा था और मैं उसके हाव-भाव देख रही थी. वेटर के जाने के बाद रवि ने कहा- मम्मी की बातों के लिए मैं माफी मांगता हूं. मुझे इस बारे में बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि ऐसे बोल आएंगी. मैं लड़की की इज्जत समझता हूं. वो बोल रहा था. मैं सुन रही थी. सारा गुस्सा हवा हो गया था. कितनी अच्छी सोच है ना इसकी. काश! हम साथ रहते. मैं ये सोच ही रही थी कि रवि ने मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया. कहा- मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं. मम्मी-पापा को मैं समझा लूंगा. लेकिन इस बात से जो तुम्हारे घरवाले गुस्सा हैं उन्हें मनाना होगा. ये सब सुनकर मैं बहुत खुश थी. कॉफी हाउस से बाहर निकली तो अचानक से सब बदल गया था. धूप भी छाया लगने लगी थी. मैं घर पहुंची और दरवाज़े को अंदर से बंद कर लिया. बिस्तर पर गिर गई. रवि की बातें मेरे दिमाग में अभी तक गूंज रही थी.

Travel couple

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मैंने अगली सुबह मां से बात की. सोचा था उन्हें सुनकर अच्छा लगेगा. लेकिन वो गुस्सा हो गईं. बोली-खबरदार! दोबारा उससे मिलना हुआ तो. ऐसा भी हो सकता है ये तो सोचा नहीं था. अब. अब क्या होगा. मन जो अटक गया था वहां, उसका क्या. रवि और मेरे बीच मुलाकातें बढ़ने लगी. हफ्ते में एक बार तो मिल ही लेते थे. मां ने पहले पापा से इस बात को छिपा कर रखा. लेकिन बात बढ़ ना जाए इसे देखते हुए एक दिन बता दिया. मुझे समझ नहीं आ रहा था जिस लड़के को खुद इन्होंने मेरे लिए चुना था. अचानक वो इतना बुरा कैसे हो गया. शायद बात अहम की थी. या फिर आत्मसम्मान की. बात कुछ भी हो मेरा मन नहीं लग रहा था. मुझे रवि से ही शादी करनी थी. रवि भी समझ नहीं पा रहा था कि मम्मी-पापा को कैसे मनाए. दोनों परिवारों में एक ही बात.

कई बार मन में ख्याल आया कि भाग कर शादी कर लें. लेकिन हो ना पाया. मां-बाप को ऐसे धोखा नहीं दे सकते थे. फिर यही फैसला हुआ कि शादी तो उनकी इजाजत से ही होगी. जब तक मान नहीं जाते इंतजार करते हैं. उस दिन तो मम्मी ने हमें कॉफी हाउस में देख लिया था. फिर सिर्फ पिटाई ही नहीं हुई. सामान भी घर से बाहर फेंक दिया गया. लेकिन धीरे-धीरे कुछ ठीक हुआ. इस बात को पांच साल हो चुके हैं. शादी की इजाज़त तो अभी भी नहीं मिली है लेकिन हां. अब सभी ने स्वीकार कर लिया है कि बिना शादी के ये प्यार करने वाले जिद्दी इंसान मानेंगे नहीं. उनका आशीवार्द भी जल्द ही मिल ही जाएगा. तब तक हम अभी भी उड़ रहे हैं स्वच्छंद परिंदों की तरह प्यार के आसंमा में. दिन में. रात में. पता नहीं ये पागलपन है या प्यार. जो भी है. उसका है. मेरा है. हमारा है.