Veer Savarkar Birth Anniversary: क्यों वीर सावरकर हैं विवादित? पढ़ें जीवन की कुछ अहम घटनाएं

28 मई 1883 को जन्में सावरकर का आज जन्मदिवस है. वैसे तो वीर सावरकर भारत में कई बार हीरो तो कई बार विलेन के तौर पर पेश किए जाते हैं.

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Veer Savarkar Birth Anniversary: वीर सावरकर का भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान रहा है. 28 मई 1883 को जन्में सावरकर का आज जन्मदिवस है. वैसे तो वीर सावरकर भारत में कई बार हीरो तो कई बार विलेन के तौर पर पेश किए जाते हैं. लेकिन आज हम आपको वीर सावरकर के हर पहलू के बारे में बताने वाले है. बता दें कि सावरकर को एक बार गांधी जी ने कहा था कि अंग्रेजों के खिलाफ उनकी रणनीति कुछ ज्यादा ही आक्रामक है. वैसे तो सावरकर RSS से जुड़े हुए नहीं थे, बावजूद इसके RSS में वीर सावरकर को बहुत सम्मान दिया जाता है.

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संघ परिवार में सम्मान

वैसे तो वीर सावरकर RSS से संबंधित नहीं थे लेकिन उनकी नाम संघ परिवार में बेहद इज्जत के साथ लिया जाता है. बता दें कि साल 2000 में वाजपेयी सरकार द्वारा वीर सावरकर को भारत रत्न देने का प्रस्ताव भेजा गया लेकिन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने इसे अस्वीकार कर दिया था. बता दें पीएम नरेंद्र मोदी साल 2014 में जब प्रधानमंत्री बने थे इस दौरान उन्होंने 26 मई 2014 को शपथ लिया था. इस दिन वीर सावरकर की 131वीं जन्मतिथि थी.

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कलेक्टर की हत्या में गिरफ्तारी

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मुखर हिंदू विचारधारा के माने जाने वाले वीर सावरकर ने साल 1910 में नासिक के कलेक्टर की हत्या मामले में लंदन में गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद उन्हें पुणे के फरग्यूसन कॉलेज से निकाल दिया गया था. सावरकर पर आरोप था कि उन्होंने लंद न से अपने भाई को एक पिस्टल भेजी थी. जिसका कलेक्टर की हत्या में इस्तेमाल किया गया था. बता दें कि उन्हें एसएस मौर्य पानी के जहाज से भारत लाया जा रहा था. लेकिन फ्रांस के मार्से बंदरगाह पर जहाज रूका तो इस दौरान जहाज से वे बीच समंदर में कूद गए.

कालापानी की सजा

हालांकि फिर कुछ मिनट की आजादी के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया और अगले 25 सालों तक वो किसी न किसी तरीके से अंग्रेजों की कैद में वे रहे. बता दें कि उन्हें 25-25 साल की दो सजा दी गई औऱ उन्हें अंडमान निकोबार स्थित काला पानी यानी सेल्युलर जेल में भेज दिया गया. यहां उन्हें कोठरी नंबर 52 में रखा गया था. जेल जीवनी में आशुतोष देशमुख वीर सावरकर की जीवने के बारे में लिखते हैं अंडमान में सराकर अफसर बग्घी से चलते थे और राजनैतिक कैदी अन बग्घियों को खींचते थे. वहां रास्ते खराब होते थे ऐसे में अगर कोई कैदी बग्घी को खींच नहीं पाता तो उसे मारा पीटा जाता और गालियां दी जाती साथ ही पनियल सूप दिया जाता था.

अंग्रेजों को माफीनामा

भारत में दरअसल वीर सावरकर की आलोचना अंग्रेजों को लिखे माफीनामे को लेकर किया जाता है. सेल्युलर जेल में वे 9 साल 10 महीने रहें. लेकिन यहां उन्हें इतना प्रताड़ित किया गया गया उन्होंने अंग्रेजों को माफीनामा लिखा. 9 सालों में सावरकर ने अंग्रेजों को 6 बार माफीनामा लिखा. सावरकर ने अपनी आत्मकथा में लिखा था कि अगर मैंने जेल में हड़ताल की होती तो मुझसे भारत पत्र भेजने का अधिकार छीन लिया जाता. वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय की मानें तो भगत सिंह और वीर सावरकर में बहुत मौलिक अंतर था. जिस दिन भगत सिंह ने संसद में बम फेंकने का फैसला लिया उस दिन उन्होंने यह तय कर लिया था कि उन्हें फांसी के फंदे पर झूलना तय है. वहीं सावरकर एक चतुर क्रांतिकारी थे. उनकी सोच थी कि आजादी के लिए भूमिगत रहकर काम किया जाए. उनका कहना था कि सावरकर ने ये नहीं सोचा कि उनकी माफी मांगने से लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे. उनका मानना था कि अगर वो जेल से बाहर रहेंगे तो जो करना चाहते हैं कर सकते हैं.

महात्मा गांधी हत्याकांड में जुड़ा नाम

वीर सावरकर को महात्मा गांधी की हत्या में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था. लेकिन ठोस सबूतों के अभाव में कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया गया. एक यह भी कारण है कि देश में वीर सावरकर की कई बार लोग आलोचना भी करते हैं. हालांकि स्वतंत्रता संग्राम में वीर सावरकर का अहम योगदान भी था इस बात को झुठलाया नहीं जा सकता है.

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Published Date:May 28, 2021 10:08 AM IST

Updated Date:May 28, 2021 10:08 AM IST

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