नई दिल्ली. साहित्य, नाटक और सिनेमा जगत की जानी-मानी हस्ती गिरीश कर्नाड (Girish Karnad) का सोमवार को कर्नाटक के बेंगुलुरू में निधन हो गया. उनकी उम्र 81 साल थी. 19 मई 1938 को जन्मे गिरीश कर्नाड को फिल्मों की दुनिया में साहित्य की जगह दिलवाने वाले शख्सियत के रूप में जाना जाता है. फिल्मों से पहले नाटक की विधा में देश ने उनकी कलम का लोहा माना था. साहित्य में उनकी पहुंच को वर्ष 1998 में मिले उन्हें ज्ञानपीठ सम्मान की उपलब्धि से समझा जा सकता है. कन्नड़ भाषा में नाटक और साहित्य की रचना करने वाले गिरीश कर्नाड को आधुनिक भारतीय नाटकों के लेखन के लिए हमेशा याद किया जाएगा.

अपनी रचनाओं से कीर्तिमान स्थापित करने वाले गिरीश कर्नाड, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संबंधी विषयों पर भी मुखर रहा करते थे. कुछ साल पहले जब कर्नाटक में उर्दू भाषा में छपने वाले लेखों में सरकार विरोधी बातें न छापने को लेकर विवाद हुआ, उस समय विभिन्न भाषाओं के लेखकों और साहित्यकारों के साथ गिरीश कर्नाड ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरकर अपनी बातें रखी थीं. वहीं, कर्नाटक चुनाव के समय टीपू सुल्तान को लेकर दिए गए बयान पर भी जब सियासी विवाद उठ खड़ा हुआ, उस समय भी कर्नाड अपनी बातों पर अडिग रहे थे. अपने जीवन के 5 दशकों तक साहित्य और कला की दुनिया में सक्रिय रहे गिरीश कर्नाड ने सिर्फ साहित्यकार, नाटककार और कलाकार के रूप में अपनी पहचान बनाई, बल्कि वे फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे.

गिरीश कर्नाड के बारे में

1- गिरीश कर्नाड को कन्नड़ भाषा के रचनाकारों में प्रमुख स्तंभ के रूप में जाना जाता है.

2- न सिर्फ साहित्य, बल्कि नाटक और फिल्मों के जरिए भी उन्होंने 5 से ज्यादा दशकों तक देश को अपनी सेवाएं दी हैं.

3- गिरीश कर्नाड ने वर्ष 1970 में कन्नड़ फिल्म ‘संस्कार’ से सिनेमा में कदम रखा. इस फिल्म की पटकथा उन्होंने खुद ही लिखी थी.

4- ‘निशांत’, ‘मंथन’, ‘पुकार’ जैसी फिल्मों से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में गिरीश कर्नाड ने अपनी पहचान बनाई थी.

5- गिरीश कर्नाड का लिखा नाटक ‘तुगलक’, आधुनिक भारतीय नाटकों की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में से एक माना जाता है.

6- ‘तुगलक’ नाटक का हिंदी अनुवाद प्रसिद्ध नाटककार बी.वी. कारंत ने किया था. राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में इसका मंचन इब्राहिम अलकाजी के निर्देशन में हुआ.

7- साहित्य और कला के क्षेत्र में गिरीश कर्नाड की असाधारण उपलब्धि के लिए उन्हें भारत सरकार ने संगीत नाटक अकादमी के पुरस्कार से सम्मानित किया था.

8- पद्मश्री, पद्मभूषण, कन्नड़ साहित्य अकादमी पुरस्कार, साहित्य अकादमी सहित उन्हें भारतीय भाषाओं के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी नवाजा गया था.

9- फिल्म ‘संस्कार’ में उनके निर्देशन के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया था.

10- गिरीश कर्नाड को हिंदी में मोहन राकेश, बांग्ला में बादल सरकार और मराठी भाषा में विजय तेंदुलकर के समतुल्य माना जाता है.