Vizag Gas Leak Vs Bhopal Gas Tragedy: आंध्र प्रदेश में आज सुबह गैस फैक्टरी में जहरीली गैस के लीक होने की खबर ने देश में हड़कंप मचा दिया. इस दौरान कई लोग रात को सोए लेकिन सुबह मौत के मुंह में समा गए. इस दौरान 11 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है. मरने वालों में 1 छोटा बच्चा भी शामिल है. इस जहरीले गैस के प्रभाव में आने के कारण अबतक 800 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. साथ ही इस हादसे ने पूरे देश व सभी राजनीतिक दलों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. लेकिन इस एक घटना ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में हड़कंप मचा दिया है. इस दौरान सोशल मीडिया पर दो चीजें खूब ट्रेंड कर रही थीं. एक तो विजाग गैस लीक और दूसरी भोपाल गैस त्रासदी (#VizagGasLeak & #BhopalGasTragedy) सोशल मीडिया पर विजाग गैस लीक से जुड़ी कई भयावह तस्वीरें वायरल हो रही हैं. लेकिन 3 दिसंबर 1984 को इससे भी बुरी घटना ने देश को झंकझोर कर रख दिया था. आज हम आपको इससे जुड़ी हर बात बताने वाले हैं. Also Read - आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल को छोड़कर पूरे देश में आज से शुरू होंगी घरेलू यात्री उड़ानें, राज्यों के अलग-अलग नियम

क्या हुआ विशाखापट्टनम में Also Read - इंदौर में कोरोनावायरस : रेड जोन इंदौर में संक्रमितों की संख्या 3,000 के पार, अब तक 114 मरीजों की मौत

यहां सुबह सुबह लोगों को सांस लेने व आंखों में जलन की शिकायत हुई व कई लोग बेहोश होकर गिरने लगे. इस दौरान लोग आनन फानन में भारी संख्या में अस्पताल पहुंचने लगे. इस बात की भनक जैसे ही प्रशासन को लगी प्रशासन फौरन मामले को गंभीरता से लेते हुए अलर्ट हो गई. जब जांच की गई तो पता चला कि वेंकटपुरम इलाके में स्थित एलजी पॉलीमर इंडस्ट्री में रात के करीब ढ़ाई बजे जहरीली रसायनिक गैस STYRENE का रिसाव हुआ था. इस कारण लोगों को बेहोशी, हालत गंभीर, आंखों में जलन व सांस लेने में दिक्कते आ रही थीं. आनन फानन में पुलिस प्रशासन व दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची जैसे तैसे पूरे हालात पर नियंत्रण पाया गया और आस पास के सभी इलाकों को खाली करवा दिया गया. बावजूद इसके कई लोगों की गैस की चपेट में आने के कारण जान चली गई और कईंयों को अस्पताल में भर्ती कराया गया. मामले की गंभीरता का आंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि घटना की खबर बाहर आते ही प्रधानमंत्री, गृहमंत्री व राष्ट्रपति तक ने आंध्र प्रदेश सरकार को मदद करने की बात कही है. Also Read - कोरोना काल वाली शादी: दुल्हन का कोविड-19 टेस्ट पॉजिटिव, दूल्हा पड़ा मुश्किल में, 35 बाराती क्वारंटाइन

हालात काबू में न आते तो क्या होता

हालात अगर बद से बदतर हो जाते तो यहां हजारों लोगों की जान पर आफत आ सकती थी. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि एक अधिकारी ने बताया कि गैस रिसाव की सूचना के बाद 1500 से अधिक लोगों को घटनास्थल से बचाकर निकाला गया है. राष्‍ट्रीय आपदा त्‍वरित बल (National Disaster Response Force) के डायरेक्‍टर जनरल एसएन प्रधान ने बताया कि स्‍थानीय लोगों ने गले, त्‍वचा में तकलीफ और कुछ जहरीले इंफेक्‍शन की शिकायत दर्ज की. इसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने लगभग 1000-1500 लोगों को घटनास्‍थल से निकाला, जिनमें से करीब 800 लोगों को अस्‍पताल पहुंचाया गया.

भोपाल गैस त्रासदी और उसके झूठे सरकारी आंकड़े!

3 दिसंबर साल 1984 की रात मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी ऐसी ही घटना हुई थी. यहां पुराने भोपाल में स्थित यूनियन कर्बाइड फैक्टी से जहरीली गैस का रिसाव हुआ था. इसका असर भोपाल के लोगों पर आज भी देखा जा सकता. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भोपाल में गैस रिसाव के कारण कुछ ही देर में 3 हजार लोग मारे गए थे. लेकिन वहां के भोपाल शहर में रहने वालों की मानें तो यह आंकड़े कहीं ज्यादा थे. साथ ही उनका कहना है कि इस त्रासदी में इतने लोग मरे थे कि उनके शवों को ट्रकों में भरकर एक जगह से दूसरे जगह ले जाया जा रहा था. बता दें कि यह हादसा भारत के सबसे बुरे हादसों की श्रेणी में आता है. रासायनिक गैस की चपेट में आने वाले लोगों में आज भी इसके लक्ष्ण देखे जाते हैं. कई लोगों की इस हादसे के बाद कैंसर के कारण व अन्य बीमारियों के कारण मौतें हुई. लेकिन जो लोग इस हादसे में बच गए, उनके बच्चे व आगे की पीढ़ियों में इसके लक्ष्ण साफ देखे जा सकते हैं.

भोपाली देते हैं गवाही

भोपाल के निवासियों व प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो तत्कालीन सरकार द्वारा मौत के सही आंकड़े को छिपाया गया था. इस दौरान उन्होंने बताया कि जब यूनियन कार्बाइड खाद निर्माता कंपनी से गैस का रिसाव शुरू हुआ तो इसका धुआं पूरे शहर में काले बादल की शक्ल में फैल गया. आधी रात को घटी इस घटना ने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया. कई लोगों की सोते-सोते ही मौत हो गई. वहीं कई लोग अफरा-तफरी व जान बचाने के लिए भागने की स्थिति में गैस की चपेट में आने से मारे गए. इस हादसे के प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो इस हादसे में लगभग 15 हजार लोगों की मौके पर ही मौत हुई थी. बाकि इससे प्रभावित लोग धीरे-धीरे कर दर्दनाक मौत के शिकार हुए. सरकार का कहना है कि इस हादसे में 3 हजार लोगों की मौत हुई थी लेकिन भोपाल के निवासी इस बात को आज भी झुंठलाते हैं. उनका कहना है कि कई मौतों को दर्ज ही नहीं किया गया, ताकि लोगों को मुआवजा न देना पड़े. इस घटना से प्रभावित जो बच गए उनकी आगे की पीढ़ियों में भी रसायनिक गैस के लक्ष्ण साफ दिखाई देते हैं. विकलांग होना, फेफड़े संबंधी, त्वचा संबंधी रोग भोपाल में बहुत आम बात है. यह सब भोपाल गैस त्रासदी की ही देन है जिसे आजतक भोपाल के लोग भुगत रहे हैं.