पश्चिम राजस्थान की 43 सीटों पर इस बार सबकी नजर है. इसके पीछे वजह पूर्व सीएम अशोक गहलोत हैं. वह इसी क्षेत्र से आते हैं और साल 2013 के चुनाव में कांग्रेस यहां से सिर्फ 3 सीटें जीत पाई थी. इसमें एक सीट अशोक गहलोत की है. दूसरी तरफ हनुमा बेनीवाल इस बार अपनी पार्टी रालोपा से मैदान में हैं. उन्होंने कई सीटों पर कैंडिडेट भी उतारे हैं. ऐसे में उनकी अग्नि परीक्षा भी होनी है कि जाटों और किसानों की बच उनकी कितनी पकड़ है.

बीजेपी की बात करें तो साल 2013 में उसे 39 सीटों पर कामयाबी मिली थी. ऐसे में उसके ऊपर दबाव है कि वह इस बार अपने प्रदर्शन को दोहरा दे. लेकिन सीटों के गणित, निर्दलीय और बागियों ने इस बार उसका समीकरण बिगाड़ दिया है. खास बात ये है कि बड़े चेहरे अपनी ही सीटों पर फंसते नजर आ रहे हैं.

जोधपुर
जोधपुर की बात करते ही अशोक गहलोत की बात होने लगती है. वह यहां के सरदारपुर से चुनाव लड़ते रहे हैं. इस बार उन्हें बीजेपी के शंभूसिंह चुनौती दे रहे हैं. फलोदी से लेकर लोहावट, भोपालगढ़, बिलाड़ा और जोधपुर शहर में इस बार बीजेपी और कांग्रेस की सीधी टक्कर के बीज हनुमान बेनीवाल की पार्टी आ गई है. बेनीवाल की सभाओं में तो युवा जुट रहे हैं, लेकिन वह कितने वोट पाएंगे इस पर सबकी नजरें टिकी हैं.
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बाड़मेर
बाड़मेर में बीजेपी के बड़े चेहर माने जाने वाले खुमाण सिंह अपनी ही सीट पर फंसते नजर आ रहे हैं. शिव क्षेत्र में अमीन खान और मानवेंद्र के साथ ने उनके लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है, दूसरी तरफ गुड़ामलानी से लेकर पचपदरा, सिवाना, चौहटन और बायतु सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस में सीधी टक्कर है. इस दौरान बीजेपी के स्टार प्रचारकों ने जहां स्थिति संभालने की कोशिश की है तो दूसरी तरफ कांग्रेस राहुल, गहलोत और पायलट से करिश्मे की उम्मीद लगाए हुए है.

जैसलमेर
जैसलमेर से लेकर पोकरण तक में पिछली बार बीजेपी ने बड़ी जीत का परचम लहराया था. लेकिन इस बार कांग्रेस ने सोशल इंजीनियरिंग दिखाते हुए टिकट वितरण में काफी समझदारी दिखाई है. इससे वह दलित और राजपूतों को साधने की कोशिश की है. इस पूरे इलाके में इस बार वोटों की ध्रुवीकरण पर बात हो रही है. यहां के नतीजे साल 2019 के चुनाव के लिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

बेनीवाल की परीक्षा
नागौर एक ऐसा इलाका है जहां से हनुमान बेनीवाल के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय हो सकती है. यहां जाटों और किसानों की अच्छी संख्या है तो यह भी कहा जाता है कि हनुमान की इस इलाके में अच्छी पकड़ है. नागौर, मेड़ता, खींवसर, मकराना, नावां, जायल और परबतसर में अबतक जहां बीजेपी और कांग्रेस में सीधी टक्कर होती थी, इस बार रालोपा और निर्दलियों ने पूरा समीकरण बदल दिया है.

जालौर, सिरोही और पाली
जालौर, सिरोही और पाली इलाकों में भी बीजेपी और कांग्रेस की सीधी टक्कर को निर्दलियों और बागियों में महत्वपूर्ण बना दिया है. इसमें बीजेपी को नुकसान होता तो दिख रहा है, लेकिन कांग्रेस उसका कितना फायदा उठा पाएगी ये रिजल्ट के बाद ही तय हो पाएगा. हनुमान बेनीवाल ने भी इन इलाकों में काफी प्रचार किया है. उनके हेलीकॉप्टर ने कई बार इन इलाकों का दौरा किया है. ऐसे में रिजल्ट के आने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी.

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