Underworld Don Karim Lala: शिवसेना नेता कांग्रेस (Congress) पर भी किसी न किसी तरह से निशाना साध रहे हैं. शिवसेना नेता संजय राउत (Sanjay Raut) ने एक दिन पहले ही इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) को लेकर जो कहा उससे खलबली मची हुई है. संजय राउत (Sanjay Raut) ने कहा कि अंडरवर्ल्ड माफिया करीम लाला (Karim Lala) से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मुंबई में मिलने आया करती थीं. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) और डी-कंपनी जिसे चाहती थी, वही मुंबई का पुलिस कमिश्नर बनता था. मुंबई का पुलिस कमिश्नर डी कंपनी ही तय किया करती थी. अब तो सिर्फ चिल्लर हैं. संजय राउत के हालिया बयानों से कांग्रेस बेचैन है. वहीं, संजय राउत ने जिस करीम लाला का ज़िक्र किया, उसकी भी चर्चा शुरू हो गई है. वही करीम लाला जिसने दाऊद इब्राहिम को पीटा. वही करीम लाला जिसकी तूती बोलती थी, लेकिन वह गरीबों की मदद करने वाला रॉबिनहुड भी था. बॉलीवुड के बड़े-बड़े स्टार मुश्किल में फंसने पर अगर किसी का दरवाजा खटखटाते थे, तो वह करीम लाला ही था. करीम लाला को हाजी मस्तान भी अंडरवर्ल्ड का पहला डॉन मानते थे.

कौन था करीम लाला (Who is Karim Lala)

हाजी मस्तान (Haji Mastan) से प्रेरित होकर बॉलीवुड में ‘वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई’ (Once opon a time in Mumbai) जैसी सुपरहिट फिल्म भी बन चुकी हैं. हाजी मस्तान को अंडरवर्ल्ड का पहला डॉन कहा जाता था, लेकिन वहीं ये भी माना जाता था कि पहला अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान (Underworld Don Haji Mastan) नहीं बल्कि करीम लाला था. वही करीम लाला जिसके बारे में कहा जाता था कि उसने डी कंपनी के डॉन दाऊद इब्राहीम को लात घूंसों से जमकर पीटा था. उसे दाऊद इब्राहीम भी डरता था. मुंबई में करीम लाला (Karim Lala) का आतंक सिर चढ़कर बोलता था.

अफगानिस्तान में अपने समुदाय का आखिरी राजा माना जाता था

करीम लाला अफगानिस्तान (Afghanistan) का रहने वाला था. 1911 में अफगानिस्तान में जन्मे करीम लाला का असली नाम अब्दुल करीम शेर खान (Abdul Karim Sher Khan) था. अफगानिस्तान में पश्तून समुदाय का आखिरी राजा भी कहा जाता था. बताते हैं कि करीम अफगानिस्तान के संपन्न परिवार से था, लेकिन वह और अधिक अमीर होना चाहता था. वह बेशुमार पैसा चाहता था. यही वजह रही कि सन 1932 में 21 साल की उम्र में करीम लाला ने भारत आया. करीम लाला ने अविभाजित भारत के पेशावर (अब पाकिस्तान में) के रास्ते भारत में प्रवेश किया. करीम लाला ने मुंबई में कारोबार के तौर तरीके सीखे, कारोबार किया भी, लेकिन इसकी आड़ में वह हीरों की तस्करी करने लगा. करीब 10 साल में ही वह इस काम का माहिर खिलाड़ी बन गया. करीम लाला (Karim Lala) बेहद बेख़ौफ़ था, यही वजह रही कि मुंबई में उसकी टूटी बोलने लगी.

10 साल में हुआ अमीर, दाऊद को खूब पीटा था

करीम लाला 35 साल की उम्र तक आते-आते अच्छा खासा अमीर हो गया. मुंबई में उसके शराब और जुए के अड्डे खुल गए. हाजी मस्तान भी इसी दौर में सक्रिय हुआ. एक बेहद मशहूर किस्सा है, जिसे हमेशा याद किया जाता है कि अंडरवर्ल्ड में सक्रिय होने की कोशिश कर रहे दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) को करीम लाला (Karim Lala) ने एक बार खूब पीटा था. दोनों के बीच भयंकर दुश्मनी थी, जिसमें करीम लाला भारी पड़ता था. 1986 आते-आते ये दुश्मनी खूनी गैंगवार में भी बदल गई थी.

बॉलीवुड के बड़े-बड़े स्टार करीम लाला से मांगते थे मदद, रॉबिनहुड की भूमिका में था करीम लाला

करीम लाला दाऊद इब्राहिम जैसों का भले ही दुश्मन रहा हो लेकिन वह रॉबिनहुड की भूमिका में भी रहता था. बेशुमार दौलत का मालिक बना करीम लाला (Karim Lala) गरीबों की खूब मदद करता था. वह आज के नेताओं की तरह उस दौर में लोगों की समस्याएं सुनने के लिए जनता दरबार लगाता था. इसके साथ ही फ़िल्मी दुनिया (Bollywood) के बड़े-बड़े स्टार कलाकरों (Film Stars) से उसके रिश्ते थे. कोई परेशानी होने पर एक्टर एक्ट्रेस उसके पास पहुँचते थे. दिलीप कुमार, हेलन जैसी फिल्म स्टार के वह संपर्क में रहता था. बताते हैं कि हेलन की एक बड़ी समस्या का हल करीम लाला ने चुटकियों में करा दिया था. मामला हेलन के रुपयों से जुड़ा था, जिसे हेलन का दोस्त लेकर भाग गया.

मौत के साथ ही ख़त्म हुआ माफिया राज का दौर

हाजी मस्तान उस दौर में सबसे बड़ा डॉन माना जाता था और जब हाजी को लगा की करीम लाला को साथ लेने पर फायदा है तो उसने करीम लाला और वरदराजन मुदलियार (Varadarajan Mudaliar) को एक साथ ले लिया, लेकिन कहतें हैं की उसके बाद दाऊद इब्राहिम ने अंडरवर्ल्ड की दुनिया में उसने अपना कदम रखा और 1981 से 1985 के बीच करीम लाला गैंग और दाऊद के बीच जमकर गैंगवार होने लगी. अंडरवर्ल्ड के जानकारों की माने तो उस वक्त करीम लाला उतना सक्रिय नहीं रहता था और दाऊद की गैंग ने मुंबई और अपना कब्जा करना शुरू कर दिया. आलम ऐसा हुआ की दोनों के गैंगवार में दर्जनों लोग मारे गए और फिर करीम लाला भी बीमार रहने लगा था और 19 फरवरी, 2002 को मुंबई में ही 90 की उम्र में करीम लाला की मौत हो गई. करीम लाला (Karim Lala) के साथ मुंबई से माफिया राज का वह दौर भी खत्म हो गया.