Republic Day Special: भारत के राजचिह्न यानी अशोक चक्र केवल एक चिह्न ही नहीं अपितु भारतवर्ष के लिए ग्रंथ के समान. अशोक चक्र भारत के चक्रवर्ती सम्राट अशोक की देन है. अशोक चक्र में एकता, साहस और शक्ति का संदेश छिपा है. अशोक स्तंभ हमें यह बताता है कि सत्य ही सर्वोच्च है. आज हम आपको अशोक चक्र से जुड़ी कुछ खास बातों को बताने वाले हैं जिन्हें जानकर आपको इसकी सारगर्भिता का अंदाजा हो जाएगा. Also Read - Twitter Blocks 500 Accounts: चेतावनी के बाद ट्विटर की बड़ी कार्रवाई, बंद किए 500 अकाउंट्स, विवादित # हटाया

अशोक चक्र की अगर बात करें तो इसे भारत के तिरंगे झंडे में भी देखा जाता है. तिरंगे में अशोक चक्र में 24 तीलियां होती हैं. यह बौद्ध धर्मचक्र का चित्रण या यूं कहें कि धम्मचक्र परिवर्तन का चित्रण है. इस चक्र में मौजूद 24 तीलिया इंसान के 24 गुणों को दर्शाती हैं. Also Read - 26 जनवरी को लाल किले पर नहीं हुआ तिरंगे का अपमान, वीडियो में नहीं दिखी ऐसी कोई बात: शिवसेना

लायन कैपिटल की अगर बात रें तो पूरे अशोक स्तंभ को कमल के फूल की आकृति के ऊपर बनाया गया है. इसमें बनाए गए बड़े स्तंभ को लायन कैपिटल कहा जाता है. बता दें कि तीसरी शताब्दी में इसका निर्माण भारत के महान शासक अशोक द्वारा करवाया गया था. Also Read - Republic Day Violence: गणतंत्र दिवस हिंसा के खिलाफ याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, लाल किले पर फहराया गया था धार्मिक ध्वज

इस स्तंभ में चार शेर हैं. हालांकि सामने से केवल इसमें 3 ही शेर दिखाई देते हैं. क्योंकि एक शेर की आकृति पीछे की तरफ छिप जाती है. ये चार शेर शक्ति, साहत, आत्मविश्वास और गौरव के प्रतीक हैं.

इस स्तंभ में घोड़ा और बैल की भी आकृति आपको दिखाई पड़ती है. घोड़े और बैल के बीच एक पहिया की आकृति को भी देखा जा सकता है. स्तंभ की पूर्व दिशा की ओर हाथी, पश्चिम की ओर बैल, दक्षिण की ओर घोड़ा और उत्तर की ओर शेर दिखाई पड़ते हैं जिन्हें पहियों के माध्यम से अलग होते दिखाया गया है.

अशोक स्तंभ के निचले भाग पर भारतीय परंपरा का सर्वोच्च वाक्य यानी आदर्श वाक्य सत्यमेव जयते लिखा गया है. इसका मतलब है सत्य की विजय. बता दें कि इसे मुण्डका उपनिषद से लिया गया है.