नई दिल्ली. इंग्लैंड में हो रहे विश्व कप क्रिकेट के मुकाबलों में आए दिन बारिश की वजह से मैच में बाधा आने की खबरें आती हैं. गुरुवार को तो भारत-न्यूजीलैंड (INDvsNZ Match) का मैच बारिश की वजह से ही नहीं हो सका. इसके पहले भी दो मैचों में एक भी गेंद नहीं फेंकी जा सकी थी. भारत-न्यूजीलैंड मैच के रद्द होने की चर्चा इसलिए ज्यादा हो रही है, क्योंकि दुनिया में क्रिकेट के सबसे बड़े प्रशंसक भारत में ही हैं. गुरुवार को नॉटिंघम में- जहां भारत-न्यूजीलैंड मैच होना था- हजारों की संख्या में भारतीय प्रशंसक मौजूद थे. इन प्रशंसकों को मैच न होने पर निराशा हुई. मैच न होने के पीछे एक वजह ये भी बताई गई कि बारिश थमने के बाद मैदान, क्रिकेट की भाषा में जिसे आउटफील्ड कहते हैं, गीला था, जिसकी वजह से खेल संभव नहीं था. ऐसे में एक चर्चा बड़े जोर-शोर से उठी कि क्या इंग्लैंड के पास क्रिकेट के मैदान को ढंकने के लिए कवर नहीं हैं? क्या मैदान को ढंकने वाले कवर इतने महंगे हैं कि इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) इसे खरीद नहीं सकता?

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दरअसल, कुछ साल पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI ने क्रिकेट के मैदानों को बारिश से बचाने के लिए ग्राउंड-कवर खरीदे थे. इनकी मौजूदा आधिकारिक कीमत का तो पता नहीं, मगर तीन साल पहले जब बीसीसीआई ने इसकी खरीदारी की थी, उस समय एक ग्राउंड-कवर की लागत लगभग एक करोड़ रुपए आई थी. कोलकाता के एक मैच के दौरान हुई बारिश और ग्राउंड-कवर की उपयोगिता को क्रिकेट के प्रशंसक अपनी आंखों से देख चुके हैं. ऐसे में इंग्लैंड में जब बारिश की वजह से मैच-दर-मैच धुलते जा रहे हैं, तो प्रशंसकों का नाराज होना लाजिमी है.

ECB की नादानी से प्रशंसकों में गुस्सा
कई पूर्व खिलाड़ियों और क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना था कि ट्रेंट ब्रिज मैदान को पूरी तरह से ढंक लेने वाले कवर अगर होते, तो भारत-न्यूजीलैंड के बीच मैच कराया जा सकता था. क्रिकेट के प्रशंसकों की नाराजगी इस बात को लेकर ज्यादा थी कि एक तो जून के महीने में विश्वकप के मुकाबले कराए गए और बारिश से बचने के लिए ग्राउंड-कवर की खरीद पर ध्यान ही नहीं दिया गया. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, नॉटिंघम का मैच देखने आए लोगों का कहना था कि इंग्लैंड में सबसे जरूरी बात जो सिखाई जाती है, वह है बारिश से बचाव का तरीका सीखना. इंग्लैंड में रहने वाले आम लोग भी रेन-कोट को लेकर गंभीर रहते हैं, तो फिर क्रिकेट ग्राउंड को लेकर ऐसा क्यों नहीं सोचा जा सकता.

सौरभ गांगुली ने कसा तंज
ट्रेंट ब्रिज में बारिश की वजह से मैच रद्द होने और मैदान के गीला होने को लेकर भारत के पूर्व क्रिकेटर सौरभ गांगुली ने मजेदार व्यंग्य भी किया. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने कहा, ‘कोलकाता के ईडेन गार्डन मैदान के लिए हम लोगों ने फुल-ग्राउंड कवर मंगवा रखे हैं. मजेदार यह है कि यह ग्राउंड कवर इंग्लैंड से ही खरीदा गया था. मुझे हैरानी हो रही है कि इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने अपने देश के मैदानों को बारिश से बचाने के बारे में क्यों नहीं सोचा.’ बीसीसीआई के पूर्व अधिकारी अनुराग ठाकुर ने भी ग्राउंड-कवर को लेकर रोचक बात कही. अखबार से बातचीत में ठाकुर ने कहा कि भारत में हुए वर्ल्ड टी-20 टूर्नामेंट के मुकाबले विश्व कप का बजट तीन गुणा ज्यादा है. इतने बजट में यह संभव था कि जून के महीने में होने वाले मैच के लिए ग्राउंड-कवर खरीद लिए जाते, लेकिन ECB ने इसकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया.

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भारत से सीख लेते तो न पछताते
दरअसल, क्रिकेट के मैदान को पूरी तरह ढंक लेने वाले ग्राउंड-कवर को लेकर भारत में जैसी सक्रियता दिखाई गई, इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ऐसा कर पाने में नाकाम रहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016 में भारत में जब टी-20 विश्व कप मुकाबले हुए थे, उस समय मानसून का मौसम नहीं था. बावजूद इसके बीसीसीआई ने कुछ ग्राउंड-कवर खरीदे थे. इनमें से हर एक की कीमत एक करोड़ रुपए थी. कोलकाता के ईडेन गार्डन मैदान में भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान बारिश होने और मैदान को पूरी तरह से ढंक दिए जाने का उदाहरण सबके सामने है. ग्राउंड-कवर की वजह से ही यह मैच खेला जा सका था. इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने इससे सीख नहीं ली. इंग्लैंड ने बारिश के मौसम में विश्व कप टूर्नामेंट का आयोजन कराने को जोखिम तो उठाया, मगर इसके लिए इंतजाम नहीं कर पाया.

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