World Enviorment Day 2020: दुनियाभर में 5 जून के दिन विश्व पर्यावरण दिवस (World Enviorment Day) मनाया जाता है. इस दिन को मनाने के पीछे खास मकसद होता है. मकसद यह कि समाज, देश व धरती को हम जीने के लायक बना सकें. मकसद यह कि हमारे द्वारा फैलाई गई गंदगी कहीं हमपर ही भारी न पड़ जाए. मकसद यह कि हमारे कारण किसी की मौत न हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह वातावरण वैसी ही बनी रहे जैसी हमारे जन्म के वक्त हमारे पूर्वजों ने इसे हमें सौंपा था. लेकिन यह तो रहा मकसद की बात लेकिन क्या हम इस दिन को मनाने के अलावा प्रकृति की सच में किसी प्रकार फिक्र करते हैं. भारत और कुछ देशों को छोड़ दें तो पेड़ों और कम उत्पादन के कारण अभी हालत ठीक है. लेकिन जिस दिन देश में कई फैक्ट्रियां लगेंगी तो पेड़ काटे जाएंगे. इससे हमें दोहरा नुकसान होगा. एक तो हमने पेड़ काट दिया जिससे तमाम तरह के नुकसान. दूसरा कि हमने फैक्ट्रियों को लगाया जिस कारण भारी मात्रा में हवा में जहर घुलने लगेगा. Also Read - भारत को मिला अमेरिका का समर्थन, माइक पॉम्पिओ बोले- चीन को भारत ने दिया सही जवाब

आज के वक्त वायु प्रदूषण दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है. दुनियाभर के तमाम देश व उनके शहर कई तरह के वायु प्रदूषण और हवा में केमिकल की मात्रा को लेकर जिम्मेदार हैं. कई देशों इसमें आगे पीछे होते रहते हैं. लेकिन आज हम बात करेंगे उन देशों के बारे में जहां वायु प्रदूषण सबसे ज्यादा है. यह प्रदूषण फैक्ट्रियों के कारण हो सकता है. यह प्रदूषण गाड़ियों के धुएं और कंस्ट्रक्शन के कामों के कारण हो सकता है. आपको बता दें कि वैज्ञानिक दो तरीकों से वायु प्रदूषण को मापते हैं पहला पीएम 2.5 माइक्रोमीटर. और दूसरा पीएम 10 माइक्रोमीटर. पीएम 2.5 में सभी ऐसे धल-कण आते हैं जो आसानी से दिखाई नहीं पड़ते हैं और आसानी से हमारे फेफड़ों और शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं. वहीं पीएम 10 में आते हैं धूल, गंदगी इत्यादि जो हमें दिखाई पड़ता है. लेकिन आपको बता दें कि वायु प्रदूषण हर विकासशील और विकसित देशों में देखने को मिल रहा है. आज के वक्त में यह एक वैश्विक समस्या बन चुकी है. Also Read - पाकिस्तान ने कहा- कुलभूषण जाधव ने अपील दायर करने से मना किया, भारत ने दावे को बताया ‘स्वांग’

इन देशों में प्रदूषण है खतरनाक Also Read - कांग्रेस का सवाल- भारतीय सेना LAC पर हमारी ही सरजमी से क्यों हट रही है पीछे, क्या पीएम मोदी के शब्दों के मायने नहीं?

बीजिंग (चीन/China)

चीन की राजनैतिक राजधानी बीजिंग में हालात इस कदर है कि उसे दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में गिना जाता है. इसकी वजह बीजिंग की आबादी, बीजिंग में निर्माण कार्य व वहां की फैक्ट्रियां हैं. यहां फैक्ट्रियों और गाड़ियों से निकलने वाले धुए वायु प्रदूषण का मुख्य कारण हैं. यहां हालात रहने लायक नहीं है. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट की मानें तो दुनिया की 80 फीसदी आबादी ऐसे इलाकों में रहती है जहां हवा फेफड़ों के लिए बेहद हानिकारक हो चुकी है और यह कई तरह की बिमारियों का कारण भी है.

ओनित्सा (नाइजिरिया/Nigeria)

आंकड़ों की माने तो यहां पिछले कुछ सालों में आबादी दोगुनी से भी ज्यादा हो चुकी है. वहीं यहां पर काफी मात्रा में फैक्ट्रियों और कारखानों को स्थापित किया जा रहा है. इस कारण विश्वभर में यह देश प्रदूषण के मामले में गिना जाता है. यही नहीं यहां पर कंस्ट्रक्शन के कामों के कारण भी यहां वायु प्रदूषण देखने को मिलता है. वहीं इस शहर की बात करें तो नाइजीरिया में यहां सबसे ज्यादा ट्रैफिक की समस्या देखने को मिलती है. यहां कि वायु गुणवत्ता काफी खराब है जो कि फेफड़ों को आसानी से नुकसान पहुंचा सकती है.

जबोल (ईरान/Iran)

जबोल शहर की अगर बात करें तो यहां ना ही फैक्ट्रियां हैं और न ही लोगों की यहां ज्यादा आबादी है. बावजूद इसके यहां पर हवा में काफी धूलकण देखने को मिलता है. इसकी मुख्य वजह है अफगानिस्तान युद्ध. अफगानिस्तान में लगातार चल रही लड़ाई के कारण यहां की हवाओं में धूल-कण व गंदगी देखने को मिलती है. यहां हर साल गर्मी के मौसम में तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच जाता है. यहां आए दिन धूल भरे तूफान (Dust Storm) देखने को मिल जाता है. कई बार प्रशासन द्वारा यहां रह रहे लोगों को रेसक्यू भी करना पड़ता है.

नई दिल्ली (भारत/India)

विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो दिल्ली दुनिया की सबसे तेज गति से प्रदूषित होने वाले शहरों में से एक बन चुका है. बीजिंग में प्रदूषण जितने वक्त में फैला उससे आधे वक्त में राजधानी दिल्ली में प्रदूषण देखने को मिल रहा है. राजधानी में ढाई करोड़ की आबादी के बीच अगर वाहनों की बात करें तो आबादी से ज्यादा यहां लोगों के पास वाहन है. साथ ही यहां पर कारखानों के धुए, कंस्ट्रक्शन के काम, वाहनों के धुएं, पड़ोसी राज्यों में पुराली जलाने के कारण आए दिन यहां प्रदूषण देखने को मिलता है. यहां प्रदूषण के कारण ज्यादातर लोगों को सांस संबंधी समस्या, सर दर्द, गले में खरास के मामले देखने को मिलते हैं. यहां प्रदूषण की स्थिति ठंड के मौसम में और भी भयावह हो जाती है. क्योंकि हवा में इस दौरान धूलकण समाहित होते हैं साथ ही पड़ोसी राज्यों से आ रहे धुएं के कारण स्मॉग टर्म की बात होने लगती है.