World Milk Day: 1 जून यानी विश्व दुग्ध दिवस, संयुक्त राष्ट्र (United Nation) द्वारा हर साल इसे इसी दिन मनाया जाता है. इस दिन को मनाने की मकसद डेयरी या दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में स्थिरता, आजीविक और आर्थिक विकास का योगदान है. दुनियाभर में दूध से पोषित हो रहे लोगों व इससे चलने वाली आजीविका के कारण इस दिन को विशेष महत्व दिया जाता है. इस दिन को मनाने का मकसद दुनियाभर में दूध को वैश्विक भोजन के रूप में मान्यता देना है.Also Read - म्यामांर में सैन्य तख्तापलट के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र का बड़ा कदम, प्रस्ताव किया पारित, भारत ने नहीं किया मतदान

हर साल दुग्ध दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा एक थीम निर्धारित किया जाता है. इस थीम का मकसद यह होता है कि लोगों तक दूध की पहुंच को आसान बनाया जा सके साथ ही लोगों को दूध के प्रति जागरूक भी किया जा सके. बता दें कि पहले इस दिन को मैराथन, स्कूली गतिविधियों, व कई तरह के प्रोग्राम्स के जरिए इस दिन को मनाया जाता था. साथ ही इसके लिए कई तरह के कैंपेन भी चलाए जाते थे. Also Read - पीएम नरेंद्र मोदी इस दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा को कर सकते हैं संबोधित, 75 साल में पहली बार होने जा रहा है ऐसा

साल 2001 में इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई थी. इसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र के विभाग खाद्य औऱ कृषि संगठन द्वारा की गई थी. पिछले साल विश्व दुग्ध दिवस में 72 देशों ने भाग लिया था. इन देशों में लगभग 586 प्रोग्राम्स का आयोजन किया गया था. आपको बता दें कि भारत में 1 जून के विश्व दुग्ध दिवस व 26 नवंबर के राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाया जाता है. क्योंकि इसी दिन साल 1921 में श्वेत क्रांति के जनक व भारत में दुग्ध उत्पादन के जनक कहे जाने वाले वर्गीज कुरियन का जन्म हुआ था. Also Read - नेपाल को UN से मिला बड़ा झटका, विवादास्पद मानचित्र को मान्यता देने से किया इनकार!