नई दिल्ली. अगर आप सूट बनवाने के दौरान दर्जी को एक यो दो बार नाप देने में खीझ जाते हैं तो आपके लिए यह जानना दिलचस्प होगा कि मैडम तुसाड के संग्रहालय में अगर आपका पुतला लगाना हो तो विशेषज्ञों की एक टीम तकरीबन आपके 200 नाप लेगी. फिर करीब 6 महीने की मेहनत के बाद मोम का बुत तैयार होता है. इस काम में डेढ़ से 2 करोड़ रुपए खर्च होते हैं. अब अगर कभी आप मैडम तुसाड म्यूजियम में घूमने जाएं, तो इस नजरिए से भी चर्चित हस्तियों के मोम के पुतलों पर गौर फरमाइएगा. वैसे दिल्ली के मैडम तुसाड वैक्स म्यूजियम जाने की प्लानिंग कर रहे हों तो कल यानी शुक्रवार को कर सकते हैं, क्योंकि कल 18 मई है. इस दिन को पूरे विश्व में संग्रहालय दिवस के रूप में मनाया जाता है. इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ म्यूजियम्स के अनुसार दुनिया के 120 देशों के 30 हजार से ज्यादा संग्रहालयों में इस मौके पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. Also Read - Delhi-Ghaziabad Border : कोरोना के खतरे के चलते गाजियाबाद-दिल्ली बॉर्डर फिर हुआ सील, जाम में फंसी हजारों गाड़ियां

एक डॉक्टर से मोम की मूर्तियां बनाना सीखा था मैडम तुसाड ने
आज हम जिस मैडम तुसाड को उनके वैक्स म्यूजियम के लिए जानते हैं, उनके बचपन का नाम मेरी गोजोल्स था. उनका जन्म 1761 में फ्रांस के स्ट्रॉसबर्ग में हुआ था. एक लड़ाई में पिता की मृत्यु के बाद मेरी गोजोल्स की मां डॉक्टर कर्टियस के यहां काम करती थीं. डॉ. कर्टियस को मोम की मूर्तियां बनाने का शौक था. उसी ने मेरी गोजोल्स को भी इस कला का प्रशिक्षण दिया. 1795 में मेरी गोजोल्स ने इंजीनियर फ्रेंकोइस तुसाड से शादी की और मेरी गोजोल्स, मैडम मेरी तुसाड हो गईं. उनकी शादी कुछ ही साल चली और पति से अलग होकर मैडम तुसाड लंदन चली आईं. लंदन में उन्होंने अपना स्टूडियो खोला, जिसमें फ्रांसीसी क्रांति के दौरान मारे गए लोगों के बुत रखे गए थे. बाद के दिनों में मैडम तुसाड अपना संग्रहालय लंदन के मेरिलबोन स्ट्रीट में लेकर चली आईं. आज भी मैडम तुसाड का सबसे बड़ा और प्रमुख संग्रहालय लंदन में इसी जगह पर स्थित है. अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस को लेकर आइए जानते हैं दिल्ली के मैडम तुसाड म्यूजियम के बारे में. Also Read - दिल्ली में ‘पृथक बिस्तरों की कमी’, तीन और निजी अस्पतालों में होगा कोविड-19 के मरीजों का उपचार

मैडम मेरी तुसाड. (फोटोः मैडम तुसाड.कॉम)

मैडम मेरी तुसाड. (फोटोः मैडम तुसाड.कॉम)

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कनॉट प्लेस का रीगलः जहां दिखाई जाती थी फिल्में, वहीं है वैक्स म्यूजियम
दिल्ली के 84 साल पुराने जिस रीगल थिएटर में कभी अमिताभ बच्चन की चलती फिरती फिल्में दिखाई जाती थीं, वहां आज मैडम तुसाड का विश्वप्रसिद्ध वैक्स संग्रहालय है, जहां बहुत से पुतलों के बीच सदी के महानायक का खामोश बुत भी खड़ा है. दरअसल जब भारत में तुसाड संग्रहालय बनाने की बात चली तो दिल्ली के साथ साथ मुंबई के बारे में भी विचार किया गया, लेकिन इत्तेफाकन इसी बीच दिल्ली के कनाट प्लेस का रीगल सिनेमा बंद हो गया और यह स्थान संग्रहालय के लिए एकदम मुफीद लगा. मैडम तुसाड वैक्स संग्रहालय का संचालन करने वाली ब्रिटेन की मर्लिन इंटरटेनमेंट के एक महाप्रबंधक अंशुल जैन ने यह तमाम जानकारी दी. उन्होंने बताया कि संग्रहालय में जिन लोगों के बुत लगाए गए हैं उनके बारे में संपूर्ण जानकारी भी दर्शकों को दी जाती है.

दिल्ली के संग्रहालय में रखी करीना कपूर खान की मोम की प्रतिमा.

दिल्ली के संग्रहालय में रखी करीना कपूर खान की मोम की प्रतिमा.

 

दिल्ली में जल्द लगेंगे विराट कोहली और सनी लियोन के बुत
‘अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’ पर जैन ने बताया कि दिल्ली में बनाया गया यह संग्रहालय मैडम तुसाड संग्रहालय की श्रृंखला की 23वीं कड़ी है. शुरू में इसमें मोम के 43 बुत लगाए गए थे, जो अब 50 हो गए हैं. संग्रहालय में कुल 50 बुत लगाए जा सकते हैं. उन्होंने बताया कि एक प्रतिकृति को बनाने में डेढ़ से ढाई करोड़ रुपए का खर्च आता है. इसे विशेषज्ञ मेकअप आर्टिस्ट सहित 20 से अधिक कलाकार बनाते हैं. एक प्रतिकृति को तैयार करने में करीब 6 महीने का वक्त लगता है. उन्होंने बताया कि जल्द ही दिल्ली के वैक्स म्यूजियम में क्रिकेटर विराट कोहली और फिल्म अदाकारा सनी लियोन के बुत भी लगाए जाएंगे. कोहली को हूबहू मोम में ढालने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम लंदन से आई और उनके 200 माप लिए गए.

दिल्ली के संग्रहालय में रखी सचिन तेंदुलकर की मोम की प्रतिमा.

दिल्ली के संग्रहालय में रखी सचिन तेंदुलकर की मोम की प्रतिमा.

 

हर साल बदल दिए जाते हैं संग्रहालय के बुत
नई दिल्ली के मैडम तुसाड में नेहरू, ध्यानचंद, टैगोर की प्रतिकृति नहीं होने के बारे में उन्होंने बताया कि हर साल नई प्रतिकृतियों को अन्य संग्रहालयों से बदला जाता है, ताकि संग्रहालय का नयापन बना रहे. यह बदलाव विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की मांग के आधार पर किया जाता है. कुछ ही महीने पहले सिंगापुर के मैडम तुसाड संग्रहालय में अनिल कपूर का बुत भेजा गया है. अंशुल जैन ने बताया कि दिल्ली की शरीर को जला देने वाली गर्मी का असर इन मोम के पुतलों पर न हो, इसके लिए वैक्स म्यूजियम में निश्चित तापमान बनाए रखा जाता है. संग्रहालय का तापमान बढ़ न जाए इसलिए एक वक्त में यहां 500 लोग ही अंदर रह सकते हैं. इससे अधिक लोग होने पर प्रतिकृति को नुकसान पहुंच सकता है. इसके रखरखाव के लिए विशेषज्ञों की एक अलग टीम है. जैन ने कहा, ‘संग्रहालय में पुतलों की संख्या सीमित है क्योंकि कनाट प्लेस की रीगल बिल्डिंग धरोहर इमारत है और इसमें फेरबदल करने के लिए कई तरह की स्वीकृतियों की जरूरत होती है. हम कोशिश कर रहे हैं और लोगों को जल्द ही कुछ और लोगों के बुत देखने को मिलें.’

इनपुट – एजेंसी.