आज हमारे जीवन में इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट का महत्त्व बहुत ज्यादा है. ये सामान कब जीवन का अभिन्न अंग बन गए पता ही नहीं चला. समय के तेज पहिए से लद कर शौक अक्सर जरूरत बन जाती है. आज 21 नवंबर है और पूरा विश्व इस दिन को ‘वर्ल्ड टेलीविजन डे’ (World Television Day) के रूप में मना रहा है. सोचिए ना, कैसे एक ‘ब्लैक एंड वाइट’ बक्सा निरंतर अपने आप को आधुनिकता से कदम मिलाए बदलता चला गया. विश्व के कई देशों में इस दिन को ‘विश्व दूरदर्शन दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है. टेलीविजन का आविष्कार एक क्रांति का आविष्कार था जिसके दम पर पूरी दुनिया आप के करीब रह सकें.

क्या है आखिर इस टेलीविजन का इतिहास –

अमेरिकी वैज्ञानिक जॉन लॉगी बेयर्ड ने साल 1927 में टेलीविजन का आविष्कार किया था. कई असफलताओं के बाद आविष्कार के 7 सालों के अंतराल में टीवी को इलेक्ट्रानिक रूप देने की कोशिश चलती रही और आखिरकार साल 1934 में ये यंत्र पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक स्वरुप धारण कर चुका था. जैसे ही टीवी के परिवेश में बिजली दौड़ने लगी 2 साल के अंदर ही कई आधुनिक टीवी के स्टेशन खोल दिए गए. धीरे धीरे मनोरंजन और समाचार का एक महत्वपूर्ण साधन की शक्ल में इसे देखा जाने लगा. लेकिन अब भी इस आविष्कार को वो न्याय नहीं मिल पाया था जिसका ये हकदार था. फिर कुछ साल बाद सन 1996 में संयुक्त राष्ट्र ने टेलीविजन के प्रभाव को आम जिंदगी में बढ़ता देख 21 नवंबर, 1996 का दिन विश्व टेलीविजन दिवस (World Television Day) के रूप में मनाने का ऐलान कर दिया.

दिलचस्प बात तो ये है कि इस इंकलाबी आविष्कार को भारत तक पहुंचने में काफी वक्त लग गया. 15 सितंबर 1959 यानी आविष्कार के 32 साल बाद टीवी ने भारत में कदम रखा. शुरुआती दिनों में कई मुश्किलों का सामना करते हुए पहला टेलीविजन राजधानी दिल्ली में दूरदर्शन केन्द्र की स्थापना के शुभ अवसर के साथ किया गया.

आज के समय में टेलीविजन ने अपनी भूमिका की परिभाषाएं बदल ली हैं. हर उत्पत्ति अपने साथ वरदान और अभिशाप दोनों को जन्म देती है. ठीक वैसे ही टेलीविजन ने इस दौर में अपने दोनों चेहरों से आपको मिलवा दिया है. तय आपको करना है कि कौन किसका अनुयायी है.