Year Ender 2020: साल 2020 का समापन होने वाला है. हर साल की तरह इस साल भी कई यादें ऐसी हैं जो आसानी से धुंधली नहीं होंगी. इस बार लगभग पूरा साल कोरोना वायरस (Coronavirus) और उससे उपजी चुनौतियों का रहा. 2020 की शुरुआत के कुछ महीने बाद ही देश में इस जानलेवा महामारी ने दस्तक दे दी. इसके अलावा भी कई ऐसी चीजें रहीं जिसे आसानी से भूला नहीं जा सकता. इस साल दिल्ली और बिहार में महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2020) भी हुए. वहीं, मध्यप्रदेश में सत्ता का सियासी संग्राम भी देखने को मिला.Also Read - Maharashtra Lockdown Update: महाराष्ट्र में रेस्तरां और दुकानों को खोलने का समय बढ़ाया गया, 22 अक्टूबर से खुलेंगे मनोरंजन पार्क

उधर, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में पूर्वोत्तर से उठी आवाज 2020 की शुरुआत में देशभर में विरोध प्रदर्शन की शक्ल ले चुकी थी. CAA के विरोध में भड़की हिंसा फरवरी के आखिर तक दंगों में तब्दील हो गई. कई लोगों की जान भी गई. इसके अलावा 2012 के निर्भया गैंगरेप के दोषियों को फांसी की सजा भी इसी साल दी गई. लद्दाख के गलवान घाटी में चीन की ‘चालबाजी’ में देश के 20 जवान शहीद हो गए. तो दूसरी तरफ सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी ने फिल्म इंडस्ट्री को झकझोर दिया. बॉलीवुड इंडस्ट्री से कई मशहूर अभिनेता, गायक, निर्देशक और म्यूजिक डायरेक्टर हमें अलविदा कह गए. वहीं, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से लेकर मोदी सरकार के मंत्री भी इस साल हमसे जुदा हो गए. Also Read - बॉलीवुड की इस मशहूर प्रोड्यूसर ने लॉकडाउन में डोनेट किया अपना 100 लीटर ब्रेस्ट मिल्क

वहीं, लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का रास्ता भी अख्तियार किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2020 में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया और मंदिर की आधारशिला रखी. उधर, बाबरी विध्वंस मामले में कोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत ने 28 साल बाद अपना फैसला सुनाया और लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी जैसे कई दिग्गज बरी हो गए. उधर, हाथरस गैंगरेप मर्डर केस और पालघर लिंचिंग मामले ने भी देश को झकझोर दिया. इसके साथ-साथ केरल (Kerala) के पलक्कड (Palakkad) में एक गर्भवती हथिनी (Pregnant Elephant) की मौत से पूरा देश कराह उठा. हर किसी ने इस हैवानियत की निंदा की. उधर, उत्तर प्रदेश के बिकरू में आठ पुलिसकर्मियों को मार दिया गया और बाद में आरोपी विकास दुबे को पुलिस ने एक एनकाउंटर में ढेर कर दिया. Also Read - Coronavirus cases In India: कोरोना संक्रमण के दैनिक मामले पहुंचे 13,596, एक्टिव मामले हुए 2 लाख से कम

वहीं, मोदी सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) को भी इस साल मंजूरी दे दी. रक्षा के क्षेत्र में इस साल अहम सफलता तब मिली जब बहुप्रतिक्षित ‘राफेल’ फाइटर जेट का पहला खेप भारत पहुंचा. साल के आखिर में किसानों ने तीन नए कृषि कानूनों को लेकर देश की राजधानी दिल्ली में धरना दे दिया. वहीं, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से भी साल 2020 काफी खराब रहा. अर्थव्यवस्था पर कोरोना महामारी की गहरी मार पड़ी. वहीं, देश में पहली बार लॉकडाउन लगा. आजादी के बाद ट्रेन सेवाओं पर भी पहली बार ब्रेक लगी. साथ ही लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूरों का पलायन हुआ…..

इन 20 बातों के लिए हमेशा याद आएगा साल 2020

1. कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic)

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साल 2020 की शुरुआत के एक दो महीने ही बीते थे कि देश में कोरोना संक्रमण का पहला मामला सामने आ गया. फिर इसकी संख्या लगातार बढ़ती गई और इसने देश को पटरी से उतार दिया. अब तक देश में 99 लाख से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं और 1 लाख 43 हजार से ज्यादा की जान जा चुकी है. देश में जल्द ही संक्रमण के मामलों की संख्या एक करोड़ पहुंच जाएगी. पूरे देश की निगाहें अब कोरोना वैक्सीन पर टिकी हुई हैं.

2. लॉकडाउन (Lockdown)

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कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemic) की वजह से देश में पहली बार लॉकडाउन (Lockdown) लगाया गया. प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पहली बार देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की. 24 मार्च 2020 को PM मोदी ने 21 दिनों के लिए देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की. इसके बाद लॉकडाउन को कई फेज में 31 मई तक बढ़ाया (Lockdown Extension) जाता रहा. इसके बाद 1 जून से फेज मैनर में प्रतिबंधों के साथ देश को अनलॉक करने की शुरुआत की गई.

3. ट्रेन, हवाई और मेट्रो सेवाओं पर रोक (Train, Aeroplane and Metro Services Stopped)

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कोरोना संक्रमण और देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से ट्रेन सेवाओं पर पहली बार ब्रेक लगी. इसके अलावा हवाई यातायात और मेट्रो सेवाओं को भी पूरी तरह से बंद कर दिया गया. अभी भी देश में नियमित ट्रेनों और हवाई सेवाओं का परिचालन सुचारू रूप से शुरू नहीं हो सका है. वहीं, मेट्रो सेवाएं बहाल जरूर हुई हैं, लेकिन कई राज्यों में लोकल सेवाओं पर प्रतिबंध जारी है.

4. मजदूरों का पलायन और रोजगार संकट (Migrant Crisis)

देशव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से आर्थिक गतिविधियां ठप हो गईं. इससे प्रवासी मजदूर पलायन करने को मजबूर हो गए. उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया. चूकि देश में यातायात की सभी सुविधाओं पर बैन था इस वजह से सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर घर जाने वाले मजदूरों की तस्वीरें और दर्द बयां करती कहानियां हमेशा लोगों के जहन में रहेंगी.

5. दिल्ली और बिहार में विधानसभा चुनाव (Delhi And Bihar Assembly Elections)

फरवरी 2020 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Elections) में आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) का एक बार फिर डंका बजा. आप ने 70 में 62 सीटों पर कब्जा जमाया और 8 सीटें भाजपा के खाते में आई. कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया. वहीं, बिहार में कोरोना के दौर (अक्टूबर-नवंबर) में चुनाव संपन्न हुआ और एक बार फिर NDA की सरकार बनी और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने.

6. मध्य प्रदेश में सत्ता संग्राम (Madhya Pradesh Political Crisis)

मध्य प्रदेश में बड़ी राजनीतिक हलचल तब हुई जब ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) कांग्रेस (Congress) के ‘हाथ’ का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए. इसके बाद इस्तीफे का सिलसिला शुरू हुआ और राजनीतिक रस्साकशी में कमलनाथ (Kamal Nath) की सरकार गिर गई. शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) एक बार फिर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने.

7. अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास (Ram Mandir Foundation Stone In Ayodhya)

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अयोध्या (Ayodhya) में भव्य राम मंदिर (Ram Temple) का रास्ता साफ हो गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त को राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया और मंदिर की आधारशिला रखी.

8. दिल्ली दंगा और नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन (Delhi Riots And CAA Protest)

पूर्वोत्तर के कई शहरों में प्रदर्शन के बाद दिल्ली के शाहीनबाग में नागरिकता कानून (Citizenship (Amendment) Act) के खिलाफ लंबे समय तक प्रदर्शन चला और हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए. उधर, सीएए के विरोध में भड़की हिंसा फरवरी महीने के आखिर तक दंगों में तब्दील हो गई. दिल्ली में कानून के समर्थक और विरोधी आपस में भिड़ गए. दिल्ली दंगों में 50 से ज्यादा लोगों की जान चली गई और सैकड़ों लोग घायल हुए. कई दिनों तक उत्तर पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा रहा.

9. निर्भया के दोषियों को फांसी (Nirbhaya Convicts Hanged)

देश को झकझोर देने वाले साल 2012 के निर्भया गैंगरेप और मर्डर (Nirbhaya Gangrape Murder) के दोषियों को आखिरकार फांसी पर लटका दिया गया. दिल्ली के तिहाड़ जेल में 20 मार्च 2020 को निर्भया के चार गुनाहगारों मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय सिंह को फांसी पर लटकाया गया. निर्भया के एक दोषी राम सिंह ने 2013 में तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी.

10. सुशांत सिंह राजपूत की मौत (Sushant Singh Rajput Death)

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput Death) जून महीने में अपने फ्लैट में मृत पाए गए. सुशांत राजपूत की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रखा दिया. उनकी मौत में गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) का नाम आया और बॉलीवुड में ड्रग्स कनेक्शन का एंगल भी. रिया चक्रवर्ती को ड्रग्स मामले में NCB ने कुछ दिनों तक हिरासत में भी रखा और बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियों से पूछताछ भी हुई. फिलहाल रिया जमानत पर बाहर हैं. वहीं, CBI सुशांत की मौत की गुत्थी सुलझानें जुटी है.

11. राजनीति के कई दिग्गजों का निधन

Pranab Mukherjee

राजनीति के कई दिग्गजों को साल 2020 ने हमसे छीन लिया. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee), लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के संस्थापक रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan), वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल (Ahmed Patel), पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह (Jaswant Singh), दिग्गज नेता अमर सिंह (Amar Singh), असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई (Tarun Gogoi) और बिहार के दिग्गज नेता रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) का इस साल निधन हो गया.

12. फिल्म इंडस्ट्री से भी कई हस्तियों का छूटा साथ

rishi kapoor last film sharmaji namkeen to have a theatre release main

फिल्म इंडस्ट्री से भी कई दिग्गज हस्तियों को 2020 ने हमसे छीन लिया. अभिनेता ऋषि कपूर (Rishi kapoor), इरफान खान (Irrfan Khan), जाने माने शायर और गीतकार राहत इंदौरी (Rahat Indori), मशहूर बांग्ला अभिनेता सौमित्र चटर्जी (Soumitra Chatterjee), आसिफ बसरा, म्यूजीशियन एसपी बालासुब्रमण्यम (SP Balasubrahmanyam), डायरेक्टर निशिकांत कामत (Nishikant Kamat),कॉमेडियन जगदीप (Jagdeep), कोरियोग्राफर सरोज खान (Saroj Khan),महान फिल्मकार बासु चटर्जी (फिल्मकार ), और म्यूजिक डायरेक्टर वाजिद खान (Wajid Khan) को हमसे छीन लिया.

13. केरल में गर्भवती हथिनी की हत्या (Pregnant Elephant Death In Kerala)

Kerala CM Pinarayi Vijayan, the pregnant elephant who died and BJP MP-animal rights activist Maneka Gandhi

केरल (Kerala) के पलक्कड (Palakkad) में एक गर्भवती हथिनी (Pregnant Elephant) की मौत से पूरा देश कराह उठा. हर किसी ने इस हैवानियत की कड़ी निंदा की. पूरे देश में इसके खिलाफ गम और गुस्सा दिखा. केंद्र और राज्य दोनों ने इसे क्रूर हत्या करार देते हुए निंदा की.

14. विकास दुबे एनकाउंटर (Vikas Dubey Encounter)

उत्तर प्रदेश के कानपुर में जुलाई 2020 की एक रात दिल को दहला देने वाली वारदात का गवाह बना. बिकरू गांव में 8 पुलिसकर्मियों पर ताबड़तोड़ गोलियां दागी गईं. दरअसल पुलिस गैंगस्टर विकास दुबे (Vikas Dubey) को गिरफ्तार करने गई थी. विकास को इसकी भनक लग गई और उसने पूरी तैयारी से पुलिस पर हमला बोल दिया, जिसमें 8 पुलिसवालों की जान चली गई. कई दिनों तक छिपे होने के बाद पुलिस ने एमपी के उज्जैन से विकास को गिरफ्तार किया. यूपी पुलिस जब विकास दुबे को लेकर वापस आ रही थी तब गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ और विकास दुबे भागने की फिराक में मारा गया.

15. हाथरस गैंगरेप, मर्डर केस (Hathras Gangrape And Murder Case)

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सितंबर महीने में उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक 20 साल की दलित लड़की से गांव के ही कुछ लड़कों ने दरिंदगी की. हैवानों ने रेप के दौरान लड़की के साथ मारपीट की. वहसी दरिदों ने लड़की की शरीर को ऐसी यातनाएं दीं, जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा फट पड़े. शुरुआती इलाज के बाद 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पीड़िता ने दम तोड़ दिया. इसके बाद आनन-फानन में यूपी पुलिस ने देर रात करीब 3 बजे पीड़ित परिवार को घर में बंद कर लड़की का अंतिम संस्कार कर दिया. इस पर सियासत गरमाई रही और यूपी पुलिस सवालों के घेरे में आ गई है. बाद में SIT का गठन हुआ और सीबीआई को जांच सौंपी गई.

16. पालघर में साधुओं की हत्या ( Palghar Mob Lynching)

महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं और उनके ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या से देशभर में खासा आक्रोश फैला. जिले के गढ़चिंचले गांव में अप्रैल, 2020 में यह घटना घटी. मुंबई से कार में सवार होकर अंतिम संस्कार में शामिल होने सूरत जा रहे दो साधुओं और उनके चालक की भीड़ ने बच्चा चोर समझकर पीट-पीटकर हत्या कर दी. स्थानीय पुलिस और राज्य CID इस मामले में अब तक 134 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इस घटना की निंदा भी पूरे देश में हुई.

17. 28 साल बाद बाबरी विध्वंस में फैसला (Babri Masjid Verdict)

Babri Masjid Case

6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाए जाने के मामले में 28 साल बाद 30 सितंबर को फैसला आया. सीबीआई की विशेष अदालत (CBI Court) ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया और कहा कि मस्जिद विध्वंस (Babri Masjid) सुनियोजित नहीं थी. जज ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि नेताओं के भाषण का ऑडियो साफ नहीं है. नेताओं ने भीड़ को रोकने की कोशिश भी की. जज ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है. मामले में BJP के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह समेत 32 आरोपी थे.

18. ‘राफेल’ से लैस हुई सेना

जुलाई महीने में राफेल (Rafale) की पहली खेप (5 विमान) भारत पहुंच गई. चीन के साथ सीमा विवाद के बीच राफेल लड़ाकू विमानों के आने से भारतीय सेना की ताकत में इजाफा माना जा रहा है. विमानों के अंबाला एयरबेस पर पहुंचने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने कहा था कि राफेल लड़ाकू विमानों का भारत में आना हमारे सैन्य इतिहास में नए युग की शुरुआत है. इन बहुआयामी (Multirole) विमानों से वायुसेना की क्षमताओं के क्रांतिकारी बदलाव आएंगे.

19. अर्थव्यवस्था की बदहाल स्थिति

Coronavirus Effect on Indian Economy

अर्थव्यवस्था के लिहाज से साल 2020 काफी खराब रहा. अर्थव्यवस्था पर कोरोना महामारी की गहरी मार पड़ी. कोरोना को काबू करने के लिए देश में लगाए गए लॉकडाउन से आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप हो गईं. भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष (2020-21) के लिए जीडीपी में 7.5 फीसदी गिरावट का अनुमान लगाया है.

20. किसान आंदोलन (Kisan Andolan)

साल 2020 के आखिरी महीने में नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों का आंदोलन (Farmers Protest) शुरू हो गया. केंद्र सरकार सितंबर महीने में 3 नए कृषि विधेयक लाई, जो संसद की मंजूरी और राष्ट्रपति की मुहर के बाद कानून बने. किसानों को ये कानून रास नहीं आ रहे हैं. किसान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में डेरा डाले हुए हैं और सरकार से लंबी लड़ाई को तैयार हैं. किसान इन कानूनों को रद्द करने से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं. फिलहाल मान-मनौव्वल का सिलसिला जारी है और सरकार के साथ कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है.