नई दिल्ली. मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर आज 45 साल के हो गए हैं. लेकिन अपने 45वें बर्थडे से 20 साल पहले उन्होंने एक ऐसा तूफान मचाया था, जिसमें फंसकर ऑस्ट्रेलिया तबाह हो गया था. ये उस समय की बात है जिस वक्त वर्ल्ड क्रिकेट में कंगारू क्रिकेट की तूती बोलती थी. ये उस दौर की बात है जब स्टीव वॉ की कप्तानी में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की रंगत ही कुछ अलग होती थी. लेकिन, वो सचिन थे जिन्होंने अकेले दम पर इतनी रौबदार टीम को भी पानी पिला दिया, वो भी एक बार नहीं बल्कि बैक टू बैक दो बार. 1998 में शारजाह में हुए कोका कोला कप में सचिन की उन दो पारियों ने लोगों को दीवाना बना लिया था. उनके बल्ले से रनों का ऐसा तूफान निकला था जिसमें कंगारू खिलाड़ी बिखर गए थे. वैसे तो सचिन के नाम 100 इंटरनेशनल शतक और कई सारी लाजवाब पारियां दर्ज हैं. लेकिन 20 साल पहले शारजाह में खेली गईं उनकी ये दो वनडे पारियां नायाब हैं.

22 अप्रैल 1998 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोका कोला कप के सेमीफाइनल में खेली सचिन की इस पारी को लोग आज भी नहीं भूलते. रेत के तूफान से आधे घंटे तक बाधित इस मैच में सचिन ने 131 गेंदों पर 143 रन बनाए थे, जिसमें 5 छक्के और 9 चैके शामिल थे. हालांकि, सचिन की इस पारी के बावजूद भारत ये मैच हार गया था, लेकिन बेहतर नेट रन रेट की वजह से भारत फाइनल में जगह बनाने में कामयाब रहा.

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24 अप्रैल 1998 को कोका कोला कप का फाइनल खेला गया, जिसमें रेत का तूफान तो दोबारा नहीं आया लेकिन सचिन के बल्ले के तूफान से ऑस्ट्रेलिया की तबाही का मंजर हर किसी ने देखा. अपने 25वें जन्मदिन पर खेली इस धमाकेदार पारी में सचिन ने 12 चौके और 3 छक्के के साथ 134 रन बनाते हुए भारत की जीत का बिगुल फूंका.

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बैक टू बैक जड़े इन दो दमदार शतकों के दमपर सचिन ने इस वनडे सीरीज में 435 रन बनाए और उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया. ये वही सीरीज है जिसके बाद वॉर्न को सचिन सपने में भी डराने लगे थे. शारजाह में खेली सचिन की इन दो ताबड़तोड़ पारियों को डेजर्ट स्ट्रोम भी जाता है, जिसे अपने 45वें जन्मदिन पर याद करते हुए मास्टर ब्लास्टर कहते हैं,” उस दौरान ऑस्ट्रेलियाई टीम को हराना लगभग नामुमकिन था. उनके पास कई महान खिलाड़ी थे, लेकिन मेरी तैयारी अच्छी थी. जब वे भारत आए तो उससे पहले मैंने खुद को टर्निंग ट्रैक पर तैयार किया. शेन वॉर्न से निपटने के लिए मैंने लक्ष्मण शिवरामाकृष्णनन के साथ चेन्नई में तैयारी की. मुंबई में मैंने नीलेश कुलकर्णी, राजेश पवार और साईराज बहुतुले के साथ तैयारी की. इस तैयारी में मेरे भाई अजीत ने भी मेरी मदद की. इन सबके साथ और मेहनत का नतीजा रहा कि मैं भारत को जीत दिलाने में कामयाब रहा.”