नई दिल्ली. क्रिकेट इतिहास के पन्नों में केपटाउन के बॉल टेंपरिंग कांड की पूरी कहानी लिखी जा चुकी है. जेन्टलमैन गेम के सुनहरे भविष्य के लिए क्रिकेट की ये डार्क स्टोरी बड़ी मिसाल की तरह है. और ये मिसाल इसलिए बनी है क्योंकि इसके गुनाहगारों को उम्मीद से बढ़कर सजा दी गई है. ऐसा नहीं है कि क्रिकेट हिस्ट्री में बॉल टेंपरिंग इससे पहले नहीं हुई लेकिन केपटाउन में जो हुआ वो कांड थोड़ा अलग था. वो कहते हैं ना कि चोरी तब तक चोरी नहीं होती जब तक पकड़ी ना जाए. यहां तो चोरी भी पकड़ी गई और चोर ने अपना गुनाह भी कबूल किया. Also Read - IPL 2020: स्टीव स्मिथ का कनकशन बढ़ा सकता है राजस्थान की मुसीबत; CA के साथ मिलकर रखेंगे नजर

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इस कबूलनामें का असर भी दुनिया के सामने हैं. वो तीनों क्रिकेटर जो बॉल टेंपरिंग के दोषी थे, स्मिथ, वॉर्नर और बेनक्रॉफ्ट, उन पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने लंबे वक्त के लिए बैन लगा दिया. बैन लगने के बाद इन क्रिकेटरों के ऑस्ट्रेलिया वापसी की तस्वीरें भी सामने आ चुकी हैं.

 

लेहमन को क्लीन चिट देने वाला ‘वीडियो’

करीब ढाई घंटे की मीटिंग के बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने इन खिलाड़ियों पर तो बैन लगा दिया. लेकिन कोच डैरेन लेहमन को क्लीन चिट दिए जाने को लेकर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया निशाने पर आ गया. लेहमन पर सवाल उठे कि जब मैदान पर बॉल टेपरिंग को अंजाम दिया जा रहा था तो वो ड्रेसिंग रूम में वाकी-टाकी पर क्या कर रहे थे. ऐसा कैसे हो सकता है कि कोच को टीम के बॉल टेंपरिंग करने की जानकारी ना हो, वो भी तब जब ये फैसला स्टीव स्मिथ के मुताबिक टीम के लीडरग्रुप का था. खुद ऑस्ट्रेलिया के पूर्व खिलाड़ियों माइकल क्लार्क और जॉन बुकानन का भी ये मानना है कि कोच टीम के लीडरग्रुप का हिस्सा होता है. लेहमन को क्लीन चिट देने को लेकर अपने ऊपर उठते इन तमाम सवालों का जवाब क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने 47 सेकेंड के एक छोटे से वीडियो के जरिए दिया है.

 

47 सेकेंड के वीडियो में क्या है ?

इस वीडियो में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के CEO जेम्स सदरलैंड से जब ये सवाल किया गया कि क्या आप बता सकते हैं कि लेहमन और उनकी वाकी टाकी का राज क्या था . इस पर सदरलैंड ने कहा,” ईयॉन रॉय की जांच में जो सामने आया है उसके मुताबिक लेहमन वाकी टाकी के जरिए मैदान पर जो चल रहा था उसे लेकर ये संदेश भेज रहे थे कि हो क्या रहा है. ईयॉन रॉय की जांच में बॉल टेंपरिंग में लेहमन की भूमिका शामिल नहीं है.”

सदरलैंड के बयान ने लेहमन के खिलाफ उठते सारे सवालों पर विराम लगाने की कोशिश तो की है. लेकिन सवाल अब भी उन गेंदबाजों को लेकर बरकरार है जिनके लिए बेनक्रॉफ्ट केपटाउन टेस्ट के तीसरे दिन मैदान पर गेंद की शक्ल को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे, ताकि उन्हें रिवर्स स्विंग मिले.

रिवर्स स्विंग का फायदा

केपटाउन टेस्ट में हेजलवुल ने रिवर्स स्विंग से 4 विकेट लिए तो वहीं पैट कमिंस ने रिवर्स स्विंग के जरिए 3 विकेट अपने नाम किए. यही नहीं रिवर्स स्विंग का फायदा स्टार्क और मार्श को भी मिलता दिखा. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन गेंदबाजों को बॉल टेंपरिंग का पता नहीं था. अगर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को रिवर्स स्विंग कराने में मदद मिल रही थी तो उसी पिच पर रबाडा और मॉर्केल जैसे अफ्रीकी गेंदबाजों को रिवर्स स्विंग मिलनी चाहिए थी, जबकि ऐसा नहीं हुआ.

साफ है क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अपने 47 सेकेंड के बयान से लेहमन को बेदाग तो साबित कर दिया लेकिन गेंदबाजों को लेकर उसकी प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है.