नई दिल्ली: भले ही हम फुटबॉल खेलने के मामले में दुनिया के अन्य देशों से कदमताल नहीं मिला पा रहे हों लेकिन फुटबॉल बनाने और बेचने के मामले में आगे हैं. भारत का फुटबॉल एक्सपोर्ट मार्केट 15 प्रतिशत की गति से वृद्धि कर रहा है. साउथ अमेरिका और यूरोप में फुटबॉल की बढ़ती मांग के कारण भारत के फुटबॉल एक्सपोर्ट मार्केट 2017-18 में लगभग 70.5 करोड़ डॉलर का रहा. दुनिया के 60 देशों ने 2017-18 में मेड इन इंडिया फुटबॉल का आयात किया. कॉमर्स डिपार्टमेंट का ने एक ट्वीट में इसकी जानकारी दी.

डिपार्टमेंट ने बताया कि इंडिया के स्पोर्ट्स गुड्स और टॉय सेक्टर से सबसे ज्यादा फुटबॉल का एक्सपोर्ट हो रहा है. भारत में बनने वाले फुटबॉल किन देशों में एक्सपोर्टो हो रहे हैं. कॉमर्स डिपार्टमेंट का कहना है कि टॉप-10 देशों की बात करें तो यूके, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, आयरलैंड, यूएई, अर्जेनटिना, स्पेन, फ्रांस यूए और चिली में मेड इन इंडिया फुटबॉल की डिमांड ज्यादा है. 2016-17 में एक्सपोर्ट 8.93 मिलियन डॉलर था जबकि 2015-16 में यह 12.8 मिलिनय था.

विश्व कप की वजह से जालंधर की फुटबॉल इंडस्ट्री के कारोबार में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी. अब तक घरेलू व विदेशी बाजार में जालंधर की इंडस्ट्री 2 लाख के करीब फुटबॉल बनाकर भेज चुकी है. दरअसल, जालंधर की इंडस्ट्री में 60 फुटबॉल मैन्यूफैक्चरर्स यूनिट हैं, जो प्रतिवर्ष 350 करोड़ रुपये का कारोबार करते हैं.

एक्सपोर्टर्स ने बताया कि चीन और पाकिस्तान में फुटबॉल भारत के मुकाबले 10 प्रतिशत सस्ते हैं. जालंधर इंडस्ट्री को इन्सेंटिव न मिलने की वजह से फुटबॉल महंगे हैं. पहले सरकार फुटबॉल एक्सपोर्टर्स को 11 प्रतिशत ड्रा बैक ड्यूटी देती थी. दो माह पहले सरकार ने ड्यूटी को ढाई फीसद कर दिया था. सरकार इन्सेंटिव नहीं देती तो फुटबॉल इंडस्ट्री को सरवाइव करना मुश्किल हो जाएगा.