नई दिल्‍ली: मैदान पर लगे चोटों ने अंतत: उस खिलाड़ी को भी 22 गज की पिच से दूर कर दिया जिसने अपने करियर में किसी बाधा को तवज्‍जो देने से इंकार कर दिया. अपने 14 साल लंबे अंतरराष्‍ट्रीय करियर में उन्‍होंने हर वो काम किया जो हर खिलाड़ी का सपना होता है. बल्‍लेबाजी करते हुए वे सुपरमैन बन जाते, मैदान का कोई कोना बाकी नहीं रहता जहां उनके शॉट्स नहीं पहुंचते. वे मूलत: एक विकेटकीपर बैट्समैन थे, लेकिन उनकी फील्डिंग सांसें रोक लेने वाली थी. अभी हाल ही में आईपीएल में उनके एक कैच को विराट कोहली ने स्‍पाइडरमैन जैसा बताया. ऐसा नहीं कि वे गेंदबाजी नहीं करते थे. वे मध्‍यम गति के उपयोगी गेंदबाज भी थे.

इतनी बातें शायद क्रिकेट इतिहास में एक ही खिलाड़ी के बारे में लिखी जा सकती हैं. दक्षिण अफ्रीका के ए बी डिविलियर्स जिन्‍होंने बुधवार को अचानक अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट से अपने संन्‍यास की घोषणा कर दी. 2004 में इंग्‍लैंड के खिलाफ पोर्ट एलिजाबेथ में अपने करियर की शुरुआत करने वाले डिविलियर्स ने कुल 114 टेस्‍ट मैच खेले. इसमें उन्‍होंने 50.66 की औसत से 8765 रन बनाए. इसमें 22 शतक और 46 अर्धशतक शामिल हैं. 228 वनडे मैचों में उनके खाते में 9577 रन दर्ज हैं. वनडे मैचों में उन्‍होंने 25 शतक और 53 अर्धशतक लगाए, लेकिन सबसे चौंकाने वाला उनका स्‍ट्राइक रेट है. वनडे मैचों में उनका स्‍ट्राइक रेट 101.39 का है. इसी तरह 78 अंतरराष्‍ट्रीय टी20 मैचों में उन्‍होंने 1672 रन बनाए.

वनडे मैचों में सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड उनके नाम दर्ज हैं, लेकिन डिविलियर्स के करियर को इन आंकड़ों और रिकॉर्ड्स के सहारे बयां नहीं किया जा सकता. मैदान पर उनकी मौजूदगी का ऐसा असर था कि विपक्षी टीमों के फैन्‍स भी उनकी बल्‍लेबाजी देखने के लिए प्रतिबद्धता बदल लेते थे. भारत जैसे देश में जहां देशी क्रिकेटर्स को भगवान की तरह पूजा जाता है, वहां भी डिविलियर्स के मैदान पर उतरते ही दर्शकों का शोर उनकी लोकप्रियता के बारे में बताता है. अफसोस कि उनके 360 डिग्री शॉट्स अब अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट में नहीं दिखेंगे लेकिन साथ में यह उम्‍मीद भी कि आईपीएल और दूसरी टी20 लीगों में उनका बल्‍ला अपनी चमक बिखेरता रहेगा.