प्रिय एबी डिविलियर्स,

मैंने सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट खेलते देखा है. मैंने विवियन रिचर्ड्स को भी देखा है जब वे अपने अंतरराष्‍ट्रीय करियर के ढलान पर थे. मैंने कपिलदेव के ऑलराउंड परफॉर्मेंस पर भी तालियां बजाई हैं और स्‍टीव वॉ की फाइटिंग स्पिरिट का भी मैं कद्रदान रहा हूं. सबसे बड़ी बात कि मैं भारत का रहने वाला हूं जहां क्रिकेट खिलाडि़यों को हीरो बनने की जरूरत नहीं होती, उनके प्रशंसक खुद ही उन्‍हें भगवान के दर्जे तक पहुंचा देते हैं. लेकिन आज तुम्‍हारे संन्‍यास की खबर के बाद मैं बेहद निराश हूं. मैं मानता हूं कि खेल के दौरान लगने वाली चोटों पर किसी का नियंत्रण नहीं होता और तुम भी इनसे ऊब कर ही अंतरराट्रीय क्रिकेट से दूर होने को मजबूर हुए हो, लेकिन मैदान पर तुम्‍हें नहीं देख पाने का खयाल ही मुझे अंदर से परेशान कर दे रहा है.

इसकी वजहें भी हैं. मैंने जितने खिलाडि़यों के बारे में ऊपर चर्चा की, वे सभी महान हैं लेकिन कोई भी तुम्‍हारे जैसा नहीं है. वे क्रिकेट खेलते थे, लेकिन तुमने तो क्रिकेट को ही खेल बना दिया. मैंने कई खिलाडि़यों को अनोखे शॉट्स खेलते देखे हैं. डग मैरिलियर का स्‍कूप, तिलकरत्‍ने दिलशान का दिल स्‍कूप, विराट कोहली का कवर ड्राइव, राहुल द्रविड़ का शॉर्ट आर्म पुल और क्रिस गेल के हवा-हवाई शॉट्स सबने देखे हैं लेकिन इनमें से कोई ऐसा नहीं है जो एक ही गेंद पर कवर ड्राइव और रिवर्स स्‍कूप खेल सके. ऐसा कोई नहीं हुआ जो स्‍क्‍वायर ड्राइव की पॉजिशन में हो और गेंद को पैडल स्‍वीप कर दे. मैदान पर करारे शॉट लगाने वाले कई हुए और आगे भी होंगे, लेकिन कोई क्रिकेटर वैसे 360 डिग्री शॉट्स नहीं खेल सकता, जैसा तुम करते हो.

जब तुम्‍हें पहली बार देखा था तो तुम सलामी बल्‍लेबाज थे. टीम के लिए विकेटकीपिंग भी करते थे. चोट ने तुम्‍हें पहले विकेटकीपिंग से दूर किया, टीम की जरूरतों ने तुम्‍हें ओपनर से मिड्ल ऑर्डर का बैट्समैन बना दिया, लेकिन इससे तुम्‍हारे खेल का अंदाज बदला नहीं, बल्कि तुम विपक्षी टीमों के लिए और खतरनाक हो गए. जनवरी, 2015 में वेस्‍टइंडीज के खिलाफ 31 गेंद पर तुम्‍हारे अविश्‍वसनीय शतक को भला कौन भूल सकता है. और यह तो केवल एक उदाहरण है. ऐसी कितनी पारियां तुम्‍हारे फैन्‍स के दिलों में हमेशा के लिए कैद होकर रह गई हैं.

मैंने उम्‍मीद की थी कि 2019 के वर्ल्‍डकप तक तो तुम्‍हें अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट में देखने का मौका मिलते रहेगा, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा. बस तुमसे एक अपील है. अंतरराष्‍ट्रीय मैचों में भले न खेलो, लेकिन आईपीएल जैसी लीगों से किनारा मत करना. क्रिकेट का यह फटाफट फॉर्मेट तुम्‍हारी फिटनेस पर भी ज्‍यादा दबाव नहीं डाल सकता. वैसे भी तुम्‍हारी उम्र अभी उतनी नहीं हुई कि तुम क्रिकेट के मैदान से पूरी तरह दूर हो जाओ. अंतरराष्‍ट्रीय मैचों में न सही, आईपीएल जैसे टूर्नामेंट में तुम्‍हें खेलते देखकर मेरे जैसे प्रशंसकों को सुकून मिलेगा.