नई दिल्ली. हैदराबाद में भारत के खिलाफ सीरीज का पहला वनडे मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के कप्तान एरॉन फिंच के करियर का 100वां वनडे था. उम्मीद थी कि करियर के इस अहम पड़ाव पर वो अपने बल्ले में लगी जंग मिटा देंगे. लेकिन, जैसे ही बुमराह से पाला पड़ा उन्हें तो जैसे सांप सूंघ गया. सिर्फ 3 गेंदों पर ही बुमराह ने फिंच के 100वें वनडे की कहानी का अंत कर दिया. नतीजा ये हुआ कि वो खाता भी नहीं खोल सके और हाथ मलते पवेलियन लौट गए.

कप्तान हो तो कप्तान जैसा भी तो खेलो

एरॉन फिंच को ऑस्ट्रेलिया का कप्तान कहलाना पसंद है. भारत के खिलाफ पहले वनडे से पहले जब उनसे पूछा गया था कि टीम में वॉर्नर और स्मिथ के आने के बाद उनकी भूमिका क्या होगी, तो बड़ी अकड़ के साथ उन्होंने खुद को ऑस्ट्रलिया का कप्तान बताया था.

अच्छा होता फिंच अगर अपनी इस कथनी को करनी में तब्दील कर थोड़ी अकड़ मैदान पर बल्लेबाजी में भी दिखा देते. और, ऐसा नहीं है कि कंगारू कप्तान फिंच के फ्लॉप होने की कहानी सिर्फ एक या दो मैचों से बरकरार है, बल्कि ये सिलसिला लंबा है.

फिंच का फ्लॉप शो

हैदराबाद वनडे मिलाकर फिंच ने पिछली 9 इंटरनेशनल इनिंग में सिर्फ 1 बार दहाई का आंकड़ा पार किया जब उन्होंने 14 रन बनाए. इसके अलावा इस दौरान 3 बार वो खाता नहीं खोल सके. यही नहीं वनडे और T20 मिलाकर बात करें तो जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे में खेली T20 की 172 रन की सबसे बड़ी इंटरनेशनल पारी के बाद फिंच ने शतक तो दूर एक भी अर्धशतक भी नहीं लगाया. इस दौरान उन्होंने 20 लीमिटेड ओवर मैच खेले.

2018 के बाद बेअसर फिंच

2018 की शुरुआत से अब तक फिंच का क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में औसत देखिए और समझिए कि उनका फॉ़र्म कितना खराब है. इस दौरान फिंच का टेस्ट में औसत 27.80 का रहा, वनडे में 11.85 और T20 में औसत 7.50 का. यानि, जिस फॉर्म ऑफ क्रिकेट के लिए फिंच जाने जाते हैं उसी में उनकी बत्ती पूरी तरह से गुल है. और, इसमें कोई दो राय नहीं कि इसका असर ऑस्ट्रेलियाई टीम के मुकाबलों के नतीजों पर भी पड़ रहा है.