नई दिल्ली : पहले मैच में न्यूजीलैंड के खिलाफ बुरी तरह मात खाने के बाद श्रीलंका को आईसीसी विश्व कप-2019 के अपने अगले मैच में मंगलवार को मुश्किल टीम अफगानिस्तान से भिड़ना है. दोनों टीमें यहां सोफिया गार्डन्स स्टेडियम में मुकाबला खेलेंगी. दोनों टीमों का यह दूसरा मैच है. श्रीलंका को जहां न्यूजीलैंड ने रौंदा था तो वहीं अफगानिस्तान को ऑस्ट्रेलिया ने पटका था. हालांकि अगर प्रदर्शन की बात की जाए तो अफगानिस्तान का प्रदर्शन बेहतर रहा था.

श्रीलंका कीवी टीम के सामने नतमस्तक हो गई थी और सिर्फ 136 रनों पर सिमट गई थी, वहीं अफगानिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खराब शुरुआत के बाद भी बल्लेबाजी में कड़ी प्रतिस्पर्धा दिखाई थी और 200 के पार जाने में सफल रही थी. इन दोनों की तुलना की जाए तो अफगानिस्तान की टीम इस समय बेहतर स्थिति में है क्योंकि उसके अंदर जीतने के लिए वो जुनून और प्रतिद्वंद्विता है, जिसकी दरकार होती है वहीं श्रीलंका हताश से भरी नजर आ रही है.

श्रीलंका को निश्चित तौर पर जीतने के लिए अपनी मानसिकता में बड़े बदलाव की जरूरत है.बल्लेबाजी में तो टीम ऑस्ट्रेलिया के सामने कुछ भी नहीं कर पाई थी. सिर्फ कप्तान दिमुथ करुणारत्ने ने भी कुछ रन किए थे. जिस तरह की बल्लेबाजी श्रीलंका ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ की थी उस तरह की अगर अफगानिस्तान के खिलाफ रही तो इसमें हैरानी वाली बात नहीं होगी कि श्रीलंका एक बार फिर कम स्कोर पर पवेलियन लौट ले.

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अफगानिस्तान की ताकत उसकी गेंदबाजी है. राशिद खान, मुजीब उर रहमान और मोहम्मद नबी की स्पिन तिगड़ी किसी भी बल्लेबाजी क्रम को ध्वस्त करने का दम रखती है. तेज गेंदबाजी में कप्तान गुलबदीन नैब, दौलत जादरान, हामिद हसन हैं जो अच्छी लय में हैं. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कम स्कोर होने का बाद भी इन सभी ने कभी भी रन करना आसान नहीं बनाया था.

वहीं, श्रीलंका की गेंदबाजी भी कमजोर है. सबसे अनुभवी लसिथ मलिंगा उस फॉर्म में नहीं दिख रहे हैं जिसके लिए वो जाने जाते हैं. थिसारा परेरा, नुवान प्रदीप भी प्रभाव नहीं छोड़ पा रहे हैं. जीतने के लिए इन सभी को बेहतर करने की जरूरत है. अफगानिस्तान बेशक पहला मैच हार गई है लेकिन उसने जो प्रतिद्वंद्विता दिखाई थी उससे उसका आत्मविश्वास जरूर बढ़ा होगा. बल्लेबाजी में पिछले मैच में नाजीबुल्लाह जादरान, रहमत शाह ने बल्ले से अच्छा किया था. नैब ने भी संघर्षपूर्ण पारी खेली थी.

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टीम के लिए चिंता की बात सलामी बल्लेबाजी होगी क्योंकि पहले मैच में मोहम्मद शाहजाद और हजरतुल्लाह जाजई खाता भी नहीं खोल पाए थे. यह मैच सही मायने में श्रीलंका के लिए चुनौती है क्योंकि इस समय 1996 की विश्व विजेता की स्थिति अंतर्राष्ट्रीय स्तर में अफगानिस्तान से भी गई गुजरी है.