क्रिकेट में उम्र धोखाधड़ी के मामले कोई नई बात नहीं है. कइयों को इस मामले में बैन भी किया गया है तो कई खिलाड़ियों के मामले कोर्ट में लंबित है. ऐसा ही एक ताजा मामला दिल्ली में सामने आया है.

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दिल्ली के क्रिकेटर प्रिंस राम निवास यादव को अंडर-19 टूर्नामेंट में आयु में हेराफेरी के मामले में दोषी पाए जाने के बाद बीसीसीआई ने अगले दो सत्र के लिए घरेलू क्रिकेट से प्रतिबंधित किया है.

दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के साथ पंजीकृत यादव को बीसीसीआई ने तुरंत प्रभाव से अयोग्य कर दिया है और साथ ही 2020-21 और 2021-22 घरेलू सत्र में उसके भाग लेने पर भी पाबंदी लगा दी है.

डीडीसीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘इसकी पुष्टि हो गई है. हमें बीसीसीआई से सूचना मिली है कि प्रिंस यादव को आयु में हेराफेरी का दोषी पाया गया है.’

बीसीसीआई ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा जारी प्रमाण पत्र के आधार पर कार्रवाई की जिसमें प्रिंस यादव की जन्मतिथि 10 जून 1996 थी लेकिन इस क्रिकेटर ने क्रिकेट बोर्ड को जो जन्म प्रमाण पत्र सौंपा था उसमें उसकी जन्मतिथि 12 दिसंबर 2001 दर्ज थी.

डीडीसीए को भेजे ईमेल में बीसीसीआई ने कहा, ‘प्रिंस राम निवास यादव (खिलाड़ी पहचान संख्या 12968), जिसे डीडीसीए ने 2018-19 सत्र में अंडर-19 आयु वर्ग में पंजीकृत किया और फिर 2019-2020 में पुन: पंजीकरण किया गया. इस क्रिकेटर ने हाल में जो जन्म प्रमाण पत्र सौंपा है उसके अनुसार उसकी जन्मतिथि 12 दिसंबर 2001 है.’

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बीसीसीआई ने 30 नवंबर को डीडीसीए को भेजे पत्र में कहा, ‘क्रिकेटर के अधिक उम्र का होने से संबंधित शिकायत पर कार्रवाई करते हुए बीसीसीआई ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से उससे संबंधित जानकारी मांगी और पता चला कि प्रिंस यादव ने 2012 में 10वीं की परीक्षा पास की और उनकी असल जन्म तिथि 10 जून 1996 है.’

बीसीसीआई ने कहा कि आयु वर्ग के टूर्नामेंटों में फायदे उठाने के लिए यादव ने एक से अधिक जन्म प्रमाण पत्र बनवाए.

बोर्ड ने कहा, ‘इसे देखते हुए प्रिंस यादव को तुरंत प्रभाव से अयोग्य किया जाता है और उनके बीसीसीआई के दो घरेलू सत्र 2020-21 और 2021-22 में बीसीसीआई के किसी भी टूर्नामेंट में खेलने पर प्रतिबंध होगा. दो साल का प्रतिबंध पूरा होने के बाद उसे सिर्फ सीनियर पुरुष क्रिकेट टूर्नामेंट में खेलने की स्वीकृति होगी.’

दिल्ली क्रिकेट में कुछ मामले तो पुलिस के पास भी लंबित पड़े हैं क्योंकि खिलाड़ी अब सीनियर स्तर पर खेल रहे हैं. मनजोत कालरा और हिम्मत सिंह ऐसे दो खिलाड़ी हैं जिनके खिलाफ आयु धोखाधड़ी के मामले लंबित हैं और वे अब दिल्ली की सीनियर टीम में हैं.

(इनपुट-भाषा)