पूरे ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर खिलाड़ियों की इंजरी से प्रभावित रही भारतीय क्रिकेट टीम ने युवा खिलाड़ियों के साहसिक प्रयास के दम पर बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में 2-1 से शानदार जीत की। इन युवा खिलाड़ियों में तेज गेंदबा नवदीप सैनी (Navdeep Saini) भी शामिल हैं, जिन्होंने ग्रोइन इंजरी होने के बावजूद गाबा टेस्ट में गेंदबाजी की। Also Read - IND vs ENG: भारत को जीत दिलाकर बोले, Rishabh Pant- जरूरत के वक्त प्रदर्शन करने से बेहतर कुछ नहीं

स्वदेश लौटे सैनी ने कहा कि जब गाबा टेस्ट के दौरान कप्तान अजिंक्य रहाणे (Ajinkya Rahane) ने उनसे पूछा कि क्या वो चोट के साथ गेंदबाजी सकेंगे तो उन्होंने हां कहा और फिर पांच ओवर डाले। सैनी ने कहा, ‘‘अजिंक्य भैया ने पूछने पूछा कि क्या मैं चोट के बावजूद गेंदबाजी कर सकता हूं , मुझे तो हां कहना ही था।’’ Also Read - IND vs ENG: Pant-Sundar की जुगलबंदी के बाद, Axar-Ashwin की फिरकी में फिर फंसे अंग्रेज, भारत ने 3-1 से जीती सीरीज

सिडनी में अपने पहले टेस्ट में चार विकेट लेने के बाद सैनी को गाबा पर ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में चोट लगी और वो 7.5 ओवर ही डाल सके। भारतीय टीम इससे पहले ही खिलाड़ियों की फिटनेस समस्या से परेशान थी। सैनी ने कहा, ‘‘मैं ठीक था लेकिन अचानक चोट लग गई। मैने सोचा कि इतने अहम मैच में चोट क्यों लगी जब मुझे इतने साल बाद खेलने का मौका मिला था।’’ Also Read - IPL 2021 Schedule: 9 अप्रैल से शुरू होगा आईपीएल 2021, 30 मई को खेला जाएगा फाइनल! गवर्निंग काउंसिल की मंजूरी का इंतजार

उन्होंने कहा, ‘‘मैं बस यही चाहता था कि चोट के बावजूद खेल सकूं। इस तरह का मौका शायद दोबारा कभी ना मिले। कप्तान ने पूछा कि क्या मैं खेल सकूंगा। मुझे दर्द था लेकिन मैने कहा कि मैं जो कर सकूंगा, करूंगा। अब मैं ठीक हो रहा हूं और जल्दी ही फिट हो जाऊंगा ।’’

भारत के लिए 10 टी20 और सात वनडे खेल चुके सैनी इंग्लैंड के खिलाफ पांच फरवरी से शुरू हो रही टेस्ट सीरीज के पहले दो मैचों के लिए भारतीय टीम में नहीं हैं। अपने चार टेस्ट विकेटों में से सबसे खास विकेट के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘‘सभी विकेट खास हैं लेकिन पहला विकेट कभी नहीं भूल सकते जब तक वो नहीं मिल जाता, आप पहले विकेट के बारे में ही सोचते रहते हैं।’’

ऑस्ट्रेलिया में पहली बार टेस्ट खेलने को यादगार अनुभव बताते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ऑस्ट्रेलियाई पिचों पर मिलने वाले उछाल से रोमांचित होना स्वाभाविक है। ऐसे में शॉर्ट गेंद डालने का लालच आता है लेकिन टेस्ट क्रिकेट सिर्फ इतना ही नहीं है। इसमें संयम रखकर लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होता है। ऑस्ट्रेलिया में अच्छे प्रदर्शन के लिए मानसिक रूप से मजबूत होना जरूरी है। वे अंत तक हार नहीं मानते। भारतीय टीम प्रबंधन काफी सहयोगी था जिसमें कप्तान और रोहित भैया शामिल थे। उन्होंने कहा कि वैसे ही गेंदबाजी करूं, जैसी रणजी ट्रॉफी में करता हूं।’’

मोहम्मद सिराज (Mohammad Siraj) से तालमेल के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘वो मेरे सबसे अच्छे दोस्तों में से हैं। हमने भारत ए के लिए काफी क्रिकेट साथ खेला है।हम गेंदबाजी के बारे में काफी बात करते हैं। वो पहले मैच में मेरी काफी मदद कर रहा था। उसने अपने पिता के निधन के बाद रूककर दिखाया कि वो कितना मजबूत है। उसकी मौजूदगी टीम के लिए काफी अहम है।’’