मुंबई: यह मुकाबला दबाव वाला था. इसलिए कि एक और हार से टीम इंडिया के लिए सीरीज हारने का खतरा था. वो भी उस टीम के खिलाफ जिसके बारे में सीरीज शुरू होने से पहले तक कहा जा रहा था कि वो भारतीय टीम के सामने कोई चुनौती भी शायद ही पेश कर पाए. टॉस जीतकर जब भारतीय टीम बैटिंग के लिए उतरी तो शिखर धवन और रोहित शर्मा ने अच्छी शुरुआत दी. फिर पहले धवन आउट हुए और कप्तान विराट कोहली भी ज्यादा देर टिक नहीं पाए. लेकिन इसके बाद रोहित शर्मा के साथ मिलकर अंबति रायडू ने ऐसी बल्लेबाजी की कि वेस्टइंडीज के लिए जीत की सारी संभावनाएं खत्म हो गईं.

रायडू की यह पारी भारतीय टीम के लिए इस मैच की सबसे बड़ी खबर है. इसलिए क्योंकि वर्ल्डकप से करीब छह महीने पहले टीम इंडिया इस सीरीज में अपने टीम कॉम्बिनेशन को परख रही है. सबसे बड़ी चिंता बैटिंग ऑर्डर में नंबर चार को लेकर है. 2015 के वर्ल्ड कप के बाद से भारतीय टीम इस पोजिशन पर 17 खिलाड़ियों को आजमा चुकी है, लेकिन कोई भी अपनी जगह पक्की नहीं कर पाया. इस सीरीज की शुरुआत में कप्तान कोहली ने कहा था कि वे नंबर चार के लिए अंबति रायडू को आजमाना चाहते हैं और उन्हें इसके लिए पर्याप्त समय भी देना चाहते हैं. इस लिहाज से देखें तो रायडू की यह पारी टीम मैनेजमेंट के लिए सुकून देने वाली है.

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केवल टीम मैनेजमेंट ही नहीं, क्रिकेट फैंस के लिए भी यह उतनी ही अच्छी खबर है. इसका कारण यह कि पिछले चार सालों में वनडे मैचों में नंबर चार पर भारतीय टीम की ओर से चार शतक ही लगे हैं. शतक लगाने वालों में विराट कोहली, मनीष पांडे, युवराज सिंह और अब अंबति रायडू शामिल हैं. रायडू की इस पारी की अच्छी बात यह थी कि वे किसी जल्दबाजी में नहीं दिखे. तब भी नहीं जब दूसरे छोर पर रोहित शर्मा ताबड़तोड़ बल्लेबाजी कर रहे थे. उन्होंने कभी भी उनकी देखादेखी शॉट्स लगाने की कोशिश नहीं की, फिर भी स्ट्राइक रेट में ज्यादा पीछे नहीं रहे. वे एक-दो रन लेकर पारी को आगे बढ़ाते रहे. रोहित शर्मा के आउट होने के बाद उन्होंने अपने हाथ खोले और टीम के स्कोर को 375 के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई.

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रायडू की क्षमताओं के बारे में पहले भी संदेह नहीं था. भारतीय टीम के लिए अब तक जो उन्होंने मैच खेले हैं, उसमें उनका औसत 50 के करीब है. इस साल आईपीएल के बाद से उनका फॉर्म भी जबरदस्त रहा है. उनकी खासियत यह भी है कि जरूरत पड़ने पर वे ओपनिंग कर सकते हैं और लोअर ऑर्डर में फिनिशर की भूमिका भी निभा सकते हैं. वे ताबड़तोड़ बल्लेबाजी कर सकते हैं और दबाव हो तो रुककर भी खेल सकते हैं. एक संदेह उनकी फिटनेस को लेकर था जिसके चलते उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में उन्हें टीम से बाहर रहना पड़ा था. लेकिन इस सीरीज में अपने प्रदर्शन और इस शतकीय पारी से उन्होंने बता दिया है कि वे टीम इंडिया के लिए हर जिम्मेदारी निभाने को तैयार हैं.