नई दिल्ली : टीम इंडिया ने वर्ल्ड क्रिकेट को कई बेहतरीन खिलाड़ी दिए हैं. इनमें एक स्टार खिलाड़ी अनिल कुंबले भी रहे हैं. कुंबले ने अपनी प्रतिभा के दम पर भारतीय टीम में जगह बनायी और दमदार प्रदर्शन की बदौलत वर्ल्ड क्रिकेट में एक अलग पहचान बनायी. आज इस पूर्व दिग्गज गेंदबाज का जन्मदिन है. कुंबले हमेशा क्रिकेट के प्रति समर्पित रहे हैं और उनका समर्पण मैदान पर दिखाई भी देता था. इसका सबसे अच्छा उदाहरण 2002 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला गया एक मैच था. Also Read - लॉकडाउन में बुर्जुग पिता कर रहे इस भारतीय विकेटकीपर की प्रैक्टिस में मदद

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दरअसल साल 2002 में भारतीय टीम टेस्ट सीरीज के लिए वेस्टइंडीज दौरे पर गई. इस सीरीज का एक मैच एंटीगुआ में खेला गया. इस मुकाबले में बल्लेबाजी के दौरान कुंबले का जबड़ा बाउंसर बॉल से टूट गया. इस वजह से उन्होंने अगले दिन पूरे चेहरे पर पट्टी बांधकर रखी और मैदान पर उतरे. कुंबले ने 14 ओवर की गेंदबाजी में विपक्षी टीम के सबसे मजबूत खिलाड़ी ब्रायन लारा का महत्वपूर्ण विकेट भी टीम के लिए हासिल किया. इस तरह उन्होंने एंटीगुआ टेस्ट मैच को यादगार बना दिया. Also Read - शुरुआत में लगा कि ठीक हूं लेकिन अब असहज महसूस कर रहा हूं : आर अश्विन

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कुंबले से जुड़ी एक दिलचस्प बात यह भी है कि उन्हें जंबो के नाम से पुकारा जाता था. असल में कुंबले लम्बी कद-काठी की वजह से तेज गेंदबाज की तरह नजर आते थे. लेकिन वो हमेशा बतौर स्पिन गेंदबाज टीम का हिस्सा रहे. वो एक ऐसा स्पिनर रहे हैं जिनकी गेंदें ज्यादा टर्न नहीं लेती थीं. इसके साथ ही सटीक लाइन-लेंथ उनकी गेंदबाजी का अहम हिस्सा रही. उनमें ‘जंबो जेट’ की तरह उछाल थी, जिससे बल्लेबाजों के पसीने छूट जाते थे। यही वजह रही कि उन्हें ‘जंबो’ कहा जाने लगा.