दुबई: एशिया कप 2018 के फाइनल मुकाबले के पहले 25 ओवर का खेल केवल दो खिलाड़ियों के नाम रहा. इसमें दोनों टीमों का एक-एक खिलाड़ी शामिल था- भारत के केदार जाधव और बांग्लादेश के लिए लिटन दास. सुपरस्टार्स से सजी इन टीमों में ये दोनों ही कम चर्चित और लो प्रोफाइल रहने वाले हैं, लेकिन फाइनल मुकाबले की शुरुआत इन दोनों के नाम ही लिखा जाएगा. Also Read - भारत-बांग्लादेश के पहले Day-Night टेस्ट मैच को मिले रिकॉर्ड दर्शक, आंकड़े जारी

इसकी वजहें भी हैं. टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी बांग्लादेश टीम की अधिकतर उम्मीदें मुश्फिकुर रहीम, मोहम्मद मिथुन और महमूदुल्लाह पर टिकी थीं. तमीम इकबाल के चोटिल होने के बाद ये तीनों ही पिछले मैचों में टीम की बल्लेबाजी को संभाल रहे थे. फाइनल में इन तीनों का बल्ला बिलकुल नहीं चला, लेकिन लिटन दास ने उनकी कमी नहीं खलने दी. Also Read - सचिन ने आज ही के दिन जड़ा था 100वां शतक, लेकिन मायूस हो गए थे क्रिकेट फैंस

पारी की शुरुआत करने आए लिटन के जोड़ीदार मेंहदी हसन थे जो अमूमन लोअर ऑर्डर में बल्लेबाजी करते हैं. पारी की शुरुआत में मेंहदी की तकनीकी कमियां साफ दिख रही थीं. वे खुलकर रन भी नहीं बना पा रहे थे. लेकिन लिटन तो जैसे इस सबसे बेखबर थे. उन्होंने सबसे पहले भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह की खबर ली. इस जोड़ी को फिलहाल दुनिया की सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजों की जोड़ी माना जाता है लेकिन लिटन पर उनका कोई असर नहीं पड़ा. पहले पांच ओवर में ही उन्होंने इन दोनों की ऐसी धुनाई की कि भारतीय कप्तान रोहित शर्मा को स्पिन गेंदबाजों की मदद लेनी पड़ी. Also Read - BAN vs ZIM, 1st T20I: सौम्‍स सरकार, लिटन दास के शानदार प्रदर्शन से बांग्‍लादेश ने जीता पहला मुकाबला

हालांकि, ऐसा नहीं था कि लिटन स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ मुश्किल में थे. उनहोंने चहल के एक ही ओवर में दो छक्के लगाए. कुलदीप यादव भी उन्हें प्रभावित नहीं कर पाए. उन्होंने हर गेंदबाज के खिलाफ जमकर शॉट्स लगाए जबकि दूसरे छोर से कोई उनका साथ नहीं दे पा रहा था. मेंहदी हसन के बाद इमरूल कएस, रहीम, मिथुन और महमूदुल्लाह भी सस्ते में चलते बने, लेकिन लिटन खड़ रहे और अपनी टीम को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचने का आधार तैयार किया.

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कमोबेश यही हालत भारतीय टीम की भी रही. भुवनेश्वर, बुमराह, चहल, कुलदीप और जडेजा ने टूर्नामेंट में अब तक किसी टीम को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया था, लेकिन फाइनल मुकाबले के शुरुआती ओवर्स में वे पूरी तरह बेअसर रहे. जब नियमित गेंदबाज विकेट नहीं ले पाए तो रोहित शर्मा ने गेंद केदार जाधव को थमाई. जाधव ने अपने दूसरे ओवर में मेंहदी हसन को आउट कर टीम इंडिया को पहली सफलता दिलाई. फिर उन्होंने मुश्फिकुर रहीम को भी आउट किया. घरेलू क्रिकेट में भी कभी-कभार ही गेंदबाजी करने वाले जाधव की गेंदों पर कोई भी बांग्लादेशी बल्लेबाज रन नहीं बना पा रहा था. जाधव के बॉलिंग अटैक में आने के बाद 10 ओवर में बांग्लादेश ने केवल 24 रन बनाए और चार विकेट खोए जबकि इससे पहले तक टीम का रन रेट छह रन प्रति ओवर के करीब था.

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लिटन दास ने बांग्लोदश को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाया तो केदार ने बल्लेबाजों पर नकेल कसने में कोई कसर नहीं छोड़ी. लेकिन यह तो इस मुकाबले का आगाज भर है. मैच का फैसला किस टीम के पक्ष में जाता है, उसके बाद ही यह तय होगा कि दोनों में से किसने अपनी टीम के लिए निर्णायक भूमिका निभाई.