
Gaurav Barar
गौरव बरार (Gaurav Barar) एक अनुभवी पत्रकार और कंटेंट विशेषज्ञ हैं जिनके पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में, इंडिया.कॉम में बतौर चीफ सब एडिटर अपनी सेवाएं ... और पढ़ें
Asia Cup 2025 Trophy: भारत ने पाकिस्तान को हराकर एशिया कप 2025 का खिताब अपने नाम कर लिया. यह भारत का एशिया कप में नौवां खिताब है. फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जहां कई मौकों पर ऐसा लगा कि पाकिस्तान बाजी मार सकता है, लेकिन भारतीय टीम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की. हालांकि मैच के बाद हुए ट्रॉफी वितरण समारोह ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया.
मैच के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन और एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से मना कर दिया. इसके बाद ट्रॉफी को मंच से हटाकर बाहर भेज दिया गया. भारतीय खिलाड़ियों ने बिना ट्रॉफी के ही जीत का जश्न मनाया और “काल्पनिक ट्रॉफी” के साथ फोटो खिंचवाई. इस घटना के बाद यह सवाल उठने लगे कि क्या अब टीम इंडिया को आधिकारिक ट्रॉफी मिलेगी?
आईसीसी की आचार संहिता के अनुसार, किसी कप्तान द्वारा ट्रॉफी लेने से इनकार करना ‘क्रिकेट की भावना’ के खिलाफ माना जा सकता है. हालांकि, इस पर कोई स्पष्ट नियम नहीं है कि ऐसी स्थिति में क्या कार्रवाई होगी. भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव को इस पर स्पष्टीकरण देना होगा कि उन्होंने ट्रॉफी क्यों नहीं ली. इसके बाद एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) इस मामले की जांच कर सकती है.
ट्रॉफी न लेना, खेल भावना का उल्लंघन माना जा सकता है. आईसीसी की आचार संहिता का मूल उद्देश्य खेल की गरिमा बनाए रखना है. यदि किसी कप्तान को ट्रॉफी न लेने का कोई वैध कारण है, तो उसे आईसीसी के सामने रखना आवश्यक होता है.
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) इस घटना को लेकर नवंबर में होने वाली आईसीसी बैठक में आधिकारिक रूप से विरोध दर्ज करवाने की तैयारी में है. बीसीसीआई सचिव देवाजीत सैकिया ने कहा कि भारतीय टीम उस व्यक्ति से ट्रॉफी नहीं ले सकती, जो भारत के खिलाफ आक्रामक रवैया रखता हो. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रॉफी को नकवी द्वारा अपने होटल ले जाना न केवल अनुचित है, बल्कि अपमानजनक भी है.
भारत ने एशिया कप 2025 की ट्रॉफी अपने प्रदर्शन के दम पर जीती है. टीम इंडिया ने सभी विपक्षी टीमों को हराकर यह खिताब हासिल किया है. ऐसे में, ट्रॉफी पर उनका पूर्ण अधिकार बनता है. यदि भारतीय खिलाड़ी किसी व्यक्ति विशेष से ट्रॉफी लेना नहीं चाहते और इस पर कोई नियम भी लागू नहीं होता, तो यह उनका व्यक्तिगत और टीम का सामूहिक निर्णय है. लेकिन विजेता टीम से ट्रॉफी छीनना या उसे सौंपने से मना करना, खेल भावना के विरुद्ध है.
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