जकार्ता: दुती चंद के कोच एन रमेश के अनुसार इस धाविका ने अपनी कम लंबाई की भरपाई तेज कदमों से की है. कोच ने साथ ही यहां एशियाई खेलों में दो रजत पदक जीने का श्रेय कड़े ‘स्पीड रबर ट्रेनिंग’ कार्यक्रम को दिया. ओड़िशा की पांच फीट तीन इंच लंबी दुती 100 और 200 मीटर दौड़ में दूसरे स्थान पर रही. उनका 100 मीटर में रजत पदक भारत का इस स्पर्धा में 20 साल में पहला पदक है. Also Read - IOA ने की शर्मनाक गलती, चेक पर लिखे खिलाड़ियों के गलत नाम

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इन पदकों ने अंतरराष्ट्रीय महासंघ आईएएएफ की विवादास्पद हाइपरएंड्रोगेनिज्म नीति के कारण हुए निलंबन से मिले घावों को भी कुछ हद तक कम कर दिया है. आईएएएफ की इस विवादास्पद नीति के खिलाफ दुती खेल पंचाट की शरण में गई थी और फैसला उनके पक्ष में आया था. Also Read - एशियन गेम्स 2018: भारत प्रणब रहे गोल्ड मेडल जीतने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी

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रमेश ने कहा, ‘‘उसकी शुरुआत नैसर्गिक है, उसके कदमों की गति काफी अच्छी है, इसलिए हमने पहले 30 से 40 मीटर पर कड़ी मेहनत की. इस सत्र में गति में इजाफे के लिए मैंने दुती से स्पीड रबर के साथ ट्रेनिंग करने को कहा.’’

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स्पीड रबर प्रक्रिया में घुटनों के ठीक ऊपर बैंड पहना जाता है जिससे प्रतिरोध बढ़ जाता है. इस ड्रिल से मांसपेशियों की ताकत बढ़ जाती है जिससे फर्राटा धावक को तेजी से दौड़ने में मदद मिलती है. रमेश ने कहा, ‘‘अगर आप नियमित रूप से ऐसा करते हैं तो इससे आप प्रतिस्पर्धा के दौरान भी इसी दमखम के साथ दौड़ सकते हो.’’

उन्होंने कहा, ‘‘अपने शरीर पर रबर बांधकर दौड़ते हुए संतुलन बनाना आसान नहीं होता. यह काफी तकनीकी ट्रेनिंग है. सबसे पहले आप ड्रिल में हिस्सा लेते हो, फिर आसान दौड़ और फिर तेजी से दौड़.’’