जकार्ता। स्वप्ना बर्मन ने दांत दर्द के बावजूद एशियाई खेलों की हेप्टाथलन में स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रचा. वह इन खेलों में सोने का तमगा जीतने वाली पहली भारतीय हैं. 21 साल की बर्मन ने दो दिन तक चली सात स्पर्धाओं में 6026 अंक बनाये. इस दौरान उन्होंने ऊंची कूद (1003 अंक) और भाला फेंक (872 अंक) में पहला तथा गोला फेंक (707 अंक) और लंबी कूद (865 अंक) में दूसरा स्थान हासिल किया था. Also Read - IOA ने की शर्मनाक गलती, चेक पर लिखे खिलाड़ियों के गलत नाम

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उनका खराब प्रदर्शन 100 मीटर (981 अंक, पांचवां स्थान) और 200 मीटर (790 अंक, सातवां स्थान) में रहा. सात स्पर्धाओं में से आखिरी स्पर्धा 800 मीटर में उतरने से पहले बर्मन चीन की क्विंगलिंग वांग पर 64 अंक की बढ़त बना रखी थी. उन्हें इस आखिरी स्पर्धा में अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत थी और वह इसमें चौथे स्थान पर रही. Also Read - एशियन गेम्स 2018: भारत प्रणब रहे गोल्ड मेडल जीतने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी

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गोल्ड जीतने के बाद स्वप्ना ने कहा कि गोल्ड मेडल जीतने ेक बाद मैंने अपना सपना पूरा कर लिया और कोच की उम्मीदों को भी पूरा किया है. मैं घायल थी लेकिन लेकिन लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए पूरा जोर लगा दिया. गाल पर पट्टी बंधी होने के बारे में बर्मन ने कहा, मैं बहुत ज्यादा चॉकलेट खाती हूं और इसलिए मेरे दांत में दर्द होने लगा. मेरी स्पर्धा से दो दिन पहले इसमें दर्द होने लगा था. दर्द काफी तेज था लेकिन मैं नहीं चाहती थी कि मेरी वर्षों की मेहनत बेकार जाए. इसलिए मैंने दर्द को भुलाकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया.

पिछली साल स्पर्धा में गिर गई थीं

इसी स्पर्धा के दौरान वह पिछले साल भुवनेश्वर में एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दौरान गिर गयी थी लेकिन आज इसमें चौथे स्थान पर रहने के बावजूद वह चैंपियन बनी. हेप्टाथलन में भाग ले रही एक अन्य भारतीय पूर्णिमा हेम्ब्रम 800 मीटर में उतरने से पहले जापान की युकी यामासाकी से 18 अंक पीछे थी लेकिन उन्होंने बर्मन से थोड़ा पहले दौड़ पूरी की और ओवरआल 5837 अंक लेकर चौथे स्थान पर रही.

क्विंगलिंग (5954 अंक) को रजत और यामासाकी (5873) को कांस्य पदक मिला. बर्मन से पहले बंगाल की सोमा बिश्वास और कर्नाटक की जेजे शोभा और प्रमिला अयप्पा ही एशियाई खेलों में इस स्पर्धा में पदक जीत पायी थीं. बिश्वास और शोभा बुसान एशियाई खेल (2002) और दोहा एशियाई खेल (2006) में दूसरे और तीसरे स्थान पर रही थी जबकि प्रमिला ने ग्वांग्झू (2010) में कांस्य पदक जीता था.