ऑस्‍ट्रेलिया में खेली जा रही वनडे सीरीज के पहले मुकाबले में टीम इंडिया को हार का सामना करना पड़ा. रोहित शर्मा की बेहतरीन शतकीय पारी भी भारत को जीत नहीं दिला पाई. अधिकांश लोगों का मानना है कि जब पहले चार ओवर में ही टॉप ऑर्डर के तीन बल्‍लेबाज आउट हो जाएं तो टीम के लिए किसी भी लक्ष्‍य को हासिल करना आसान नहीं होता. कुछ लोग महेंद्र सिंह धोनी की धीमी बल्‍लेबाजी को भी हार का कारण बता सकते हैं, लेकिन ऐसा करते हुए वे ऑस्‍ट्रेलियाई पारी के अंतिम 10 ओवरों को भूल जाते हैं. यदि इस पर थोड़ा गौर करें तो ऑस्‍ट्रेलिया की जीत का कारण पता चलेगा और टीम इंडिया की उस कमजोरी का पता चलेगा जो पिछले एक साल से उसके लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है.

टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी ऑस्‍ट्रेलियाई टीम की शुरुआत भी अच्‍छी नहीं रही थी. कप्‍तान एरोन फिंच के सस्‍ते में आउट होने के बाद 40वें ओवर के अंत तक कंगारू टीम का स्‍कोर 4 विकेट पर 195 रन था. ऐसा लग रहा था कि ऑस्‍ट्रेलियाई टीम भारत के सामने 260 रनों के आसपास का लक्ष्‍य रखेगी, लेकिन अंतिम 10 ओवरों में उसके बल्‍लेबाजों ने 93 रन ठोंक डाले और टीम का स्‍कोर 288 तक पहुंचा दिया. हैंड्सकॉम्‍ब और स्‍टोइनिस ने ताबड़तोड़ छक्‍के लगाए और मुकाबले को भारत की पहुंच से दूर कर दिया.

अब बात करते हैं टीम इंडिया की उस कमजोरी की जिसके चलते ऑस्‍ट्रेलिया इतना बड़ा स्‍कोर खड़ा करने में कामयाब रही. इन अंतिम 10 ओवरों में भारत की ओर से तीन ओवर की गेंदबाजी भुवनेश्‍वर कुमार ने फेंकी और इसमें उन्‍होंने 40 रन दे डाले. यदि हम मैच के अंतिम नतीजे को देखें तो भारतीय टीम 34 रनों से हारी. इस नजरिए से देखें तो भुवी की गेंदबाजी ने भी टीम इंडिया की किस्‍मत पर असर डाला.

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भुवी केवल इस मैच ही नहीं, पिछले एक साल से अपनी फॉर्म के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इसकी अब तक ज्‍यादा चर्चा नहीं हुई क्‍योंकि जसप्रीत बुमराह कर मौजूदगी में टीम इंडिया स्‍लॉग ओवर्स में विपक्षी टीम को नियंत्रित करने में सफल रहती थी. इस मैच में बुमराह नहीं थे, शमी लंबे समय बाद वनडे क्रिकेट खेल रहे थे और खलील के पास अनुभव की कमी है. ऐसे में टीम के स्‍ट्राइक तेज गेंदबाज की जिम्‍मेदारी भुवी के कंधों पर थी जिसे निभाने में वे सफल नहीं हुए.

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भुवनेश्‍वर पिछले एक साल से चोटों से भी परेशान रहे हैं और इससे शायद उनकी गेंदबाजी पर असर पड़ा है. साल 2018 में उन्‍होंने टीम इंडिया के लिए 14 मैच खेले और केवल 11 विकेट ही ले पाए. कंजूस गेंदबाज माने जाने वाले भुवी की गेंदों पर विपक्षी बल्‍लेबाजों के लिए रन बनाना भी आसान था क्‍योंकि 2018 में उन्‍होंने प्रति ओवर 5.31 रन खर्च किए. 2012 से भारत के लिए वनडे खेल रहे भुवी का इससे खराब प्रदर्शन केवल 2012 में रहा था. 2015 में उन्‍होंने 13 मैचों में 16 विकेट लिए थे और प्रति ओवर 5.57 रन दिए थे. स्‍ट्राइक रेट के मामले में भुवी के लिए 2018 सबसे खराब रहा. इस साल उन्‍होंने 48.81 की औसत से विकेट लिए जो उनके अंतरराष्‍ट्रीय करियर में सबसे ज्‍यादा है.

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2018 में खेले 14 वनडे मैचों में से सात में भुवनेश्‍वर विकेट नहीं मिला. ऐसा भी मौका आया जब लगातार पांच मैचों में उन्‍हें एक भी विकेट नहीं मिला. भुवनेश्‍वर कभी भी गेंदों की तेजी के लिए नहीं जाने जाते थे, लेकिन नई गेंद को स्विंग कराने की उनकी क्षमता लाजवाब थी. इसी के दम पर वे टीम इंडिया में जगह बनाने में सफल रहे थे और वनडे टीम के नियमित सदस्‍य भी बने. हालांकि, एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि भुवी की गेंदें अब उतनी स्विंग नहीं होतीं. पिछले कुछ वर्षों में में गेंदबाजी के तरीके में भी बदलाव आया है. पहले वे स्विंग हासिल करने के लिए ज्‍यादा गेंदें फुल लेंथ की डालते थे. स्विंग मिलना कम हुआ तो वे ईशांत शर्मा की तरह हिट द डेक गेंदबाज बनने लगे.

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टीम इंडिया की समस्‍या यह है कि वर्ल्‍ड कप में अब ज्‍यादा समय नहीं है और भुवी का खराब फॉर्म उसके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है. टीम को ऑस्‍ट्रेलिया की कमजोर मानी जा रही टीम के खिलाफ भी वनडे सीरीज में यह कमजोरी भारी पड़ सकती है.